राज्यों ने मांगी केंद्र से मदद, कहा- कोरोना और लॉकडाउन के चलते सैलरी देने तक में हो रही परेशानी

राज्यों ने मांगी केंद्र से मदद, कहा- कोरोना और लॉकडाउन के चलते सैलरी देने तक में हो रही परेशानी
राज्यों के वित्त मंत्री जीएसटी मुआवजे की देरी के कारण परेशान हैं

Salary Crisis in States: जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों को अब ज्यादातर चीजों पर टैक्स लेने का अधिकार नहीं है. ऐसे में राज्यों को जीएसटी लागू होने के बाद के 5 साल तक किसी भी कर नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार को करनी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 27, 2020, 9:37 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) और फिर उसके चलते लगाए गए लॉकडाउन ने राज्यों की कमर तोड़कर रख दी है. करीब एक दर्जन राज्यों की शिकायत है कि उन्हें अपने कर्मचारियों को सैलरी (Salary) देने तक में दिक्कत आ रही है. कई राज्य देर से सैलरी दे रहे हैं, जबकि कुछ राज्यों ने सैलरी को होल्ड पर डाल दिया है. लिहाजा आर्थिक तंगी के चलते राज्यों ने केंद्र सरकार से मदद मांगी है. ऐसे में आज राज्यों की निगाहें जीएसटी काउंसिल की बैठक पर टिकी हैं. दरअसल राज्यों को जीएसटी के बकाया पैसे नहीं मिले हैं.

इन राज्यों में परेशानी
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक महाराष्ट्र, पंजाब, कर्नाटक और त्रिपुरा में मेडिकल स्टाफ को सैलरी देने में परेशानी हो रही है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में शिक्षकों को वेतन देने में देरी हो रही है. लिहाजा ज्यादातर राज्य बकाया जीएसटी की मांग कर रहे हैं. अप्रैल से ही जीएसटी के पेमेंट पेंडिंग हैं. बता दें कि जीएसटी कानून के तहत राज्यों को जीएसटी लागू होने के बाद के 5 साल तक किसी भी कर नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार को करनी है.

टैक्स नहीं मिल रहे हैं राज्यों को
राज्यों के वित्त मंत्री जीएसटी मुआवजे की देरी के कारण परेशान हैं. बता दें कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों को अब ज्यादातर चीजों पर टैक्स लेने का अधिकार नहीं है. सिर्फ पेट्रोलियम, शराब और स्टांप ड्यूटी को छोड़कर बाक़ी टैक्स केंद्र सरकार ही जीएसटी के तहत लेती है. जीएसटी में राज्यों के कर राजस्व का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा है और राज्यों के कुल राजस्व का लगभग 60 प्रतिशत.



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राज्यों की परेशानी
राज्य सरकार के एक मंत्री ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते राज्यों की वित्तीय स्थिति और भी ज्यादा खराब हो गई है. दरअसल राज्य में महामारी को रोकने के लिए जरूरी खर्चे में कटौती करने में वो असमर्थ हैं. उन्होंने कहा, 'हमारे सभी टैक्स भारत सरकार जीएसटी के तहत लेती है. अब वे कह रहे हैं कि हम आपको अभी मदद नहीं कर सकते क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं है.'
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