पास हुए, अगली क्लास में पहुंचे, अब कहां जांए; परीक्षा रद्द होने से बच्चों का भविष्य अधर में

दसवीं और 12वीं के बच्चों की परीक्षाएं रद्द किए जाने और उन्हें प्रमोट किए जाने के बाद अब एक नई बहस शुरू हो गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दसवीं और 12वीं के बच्चों की परीक्षाएं रद्द किए जाने और उन्हें प्रमोट किए जाने के बाद अब एक नई बहस शुरू हो गई है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

Exams in Covid-19: जानकारों का कहना है कि इसका उपाय यह है कि अकादमिक साल (Academic Year) बदल दिया जाए. जरूरी नहीं कि यह जून में शुरू होकर मार्च में खत्म हो. सरकार के पास इसे बदलने की ताकत है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: June 11, 2021, 10:39 AM IST
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(सौम्या कलसा)

नई दिल्ली. देश के कई हिस्सों में छात्र-छात्राओं का भविष्य अधर में है. दसवीं और 12वीं के बच्चों की परीक्षाएं रद्द किए जाने और उन्हें प्रमोट किए जाने के बाद अब एक नई बहस शुरू हो गई है. कर्नाटक सरकार (Karnataka Government) ने कहा है कि रिपीटर्स यानी जो एक ही कक्षा में एक से ज्यादा बार पढ़े हैं, उन्हें तो परीक्षा देने ही होगी और जल्द ही इसके लिए तारीख घोषित होगी. अब रिपीटर्स ने राज्य के शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार के इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है कि क्यों उन्हें अन्य बच्चों की तरह प्रमोट नहीं किया जा रहा है.

शिक्षाविद वीना मोहन कहती हैं कि मुद्दा पेचीदा है. स्कूलों ने आम विद्यार्थियों के लिए तो रिविज़न पूरा कर दिया है और रिपीटर्स के लिए ऑनलाइन क्लास चल रही हैं लेकिन परीक्षाओं को लेकर स्थिति साफ नहीं है. वर्तमान में 6 विषयों को 2 में बदल दिया गया है जो कि बेहद गैर वैज्ञानिक तरीका है. ऐसा माना जा सकता है कि रिपीटर्स की परीक्षा सितंबर या उसके बाद होगी. जो भी हो, उनका पूरा साल तो बर्बाद हो ही गया है. कॉलेजों में भर्ती शुरू हो चुकी है और इन बच्चों के लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

कर्नाटक के निजी स्कूल संघ के सचिव डी शशि कुमार कहते हैं कि कर्नाटक में इस साल तीस हज़ार बच्चों ने क्लास रिपीट की है. कुछ एक अंक से रह गए लेकिन उन्हें भी फिर से परीक्षा देनी होगी. अब परीक्षा की ऐसी प्रणाली नहीं बची है जो सर्वमान्य हो. इस पर रिपीटर्स के लिए परीक्षा की अलग प्रणाली अपने आप में पूरी प्रक्रिया को टेढ़ा कर देती है.
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जानकारों का कहना है कि इसका उपाय यह है कि अकादमिक साल बदल दिया जाए. जरूरी नहीं कि यह जून में शुरू होकर मार्च में खत्म हो. सरकार के पास इसे बदलने की ताकत है. कोविड को कम होने दिया जाए और अकादमिक साल को जनवरी से दिसंबर किया जाए. तो अगर एक नई लहर आती भी है तो कम से कम कुछ क्लास तो हो ही पाएंगी.

वीना याद करती हैं 1990 के साल को जब कई कॉलेजों ने साफ किया था कि बैंगलुरू यूनिवर्सिटी के छात्र आवेदन न दें क्योंकि उस साल यूनिवर्सिटी में परीक्षा से जुड़ा एक बड़ा घोटाला हुआ था. 2021 में पास हुए छात्रों को भी ऐसे ही हालात का सामना करना पड़ सकता है जिससे इनके करियर और आगे की पढ़ाई पर बड़ा असर पड़ सकता है.



जाहिर तौर पर जिस गैर वैज्ञानिक तरीके से बच्चों को अंक दिए जा रहे हैं उससे मेहनत करने वाले बच्चों पर ज्यादा असर पड़ेगा. जो आगे की पढ़ाई के लिए अच्छे कॉलेजों में जाना चाहते हैं, उनकी राह आसान नहीं होगी.


तेलंगाना में भी यही हाल है. कोविड -19 के बढ़ते मामलों के बीच सरकार ने यहां भी 10वीं की परीक्षा रद्द कर बच्चों को प्रमोट करने का फैसला लिया है. सरकार ने तय किया है कि बच्चों को ग्रेड दिए जाएंगे. इसी तरह कॉलेज के पहले और दूसरे साल की परीक्षा भी रद्द कर दी गई है और प्रमोशन दे दिया गया है. इस बीच राज्य सरकार आईआईटी में प्रवेश चाहने वालों के लिए नए दिशा निर्देश तैयार कर रही है. जल्द ही यूनिवर्सिटी में दाखिले के लिए भी नए निर्देश जारी किए जाएंगे.

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