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महामारी के कारण कंप्यूटर चिप की बढ़ी मांग तो दुनिया भर में मचा त्राहिमाम

महामारी के कारण कंप्यूटर चिप की बढ़ी मांग तो दुनिया भर में मचा त्राहिमाम

चिप दुनिया के सबसे छोटे लेकिन सबसे सटीक उत्पादों में से एक है.  (फाइल फोटो  )

चिप दुनिया के सबसे छोटे लेकिन सबसे सटीक उत्पादों में से एक है. (फाइल फोटो )

कारों का उत्पादन ठप पड़ा है, दुकानों पर प्ले स्टेशन ढूंढे से नहीं मिल रहे हैं और ब्रॉडबैंड मुहैया कराने वालों को राउटर के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है. पूरी दुनिया में ये स्थिति एक जैसी ही है औऱ इसकी वजह भी एक ही है-सेमीकंडक्टर, जिसे आम भाषा में चिप के तौर पर भी जाना जाता है.

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    नई दिल्‍ली.  कारों का उत्पादन ठप पड़ा है, दुकानों पर प्ले स्टेशन ढूंढे से नहीं मिल रहे हैं और ब्रॉडबैंड मुहैया कराने वालों को राउटर के लिए महीनों इंतजार करना पड़ रहा है. पूरी दुनिया में ये स्थिति एक जैसी ही है औऱ इसकी वजह भी एक ही है-सेमीकंडक्टर, जिसे आम भाषा में चिप के तौर पर भी जाना जाता है. चिप दुनिया के सबसे छोटे लेकिन सबसे सटीक उत्पादों में से एक है. लागत औऱ इसके निर्माण की पेचीदगी के चलते, ताइवान (taiwan) सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी (टीएसएमसी) और दक्षिण कोरिया की सैमसंग (samsung) इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी पर दुनिया की निर्भरता बढ़ गई थी. कोविड महामारी के दौरान जब अमेरिका (America) और चीन (china)  के बीच तनाव बढ़ा तो इस निर्भरता में बढ़ोतरी हो गई. अब वैश्विक स्तर पर इसके उत्पादन को बढ़ाने के लिए आने वाले वर्षों में अरबों डॉलर खर्च किए जाने हैं.

    कमी क्यों हो रही है- कुछ तथ्य, कुछ सत्य

    घर में सिमटी दुनिया- महामारी के वजह से जब दुनिया भर ने लॉकडाउन देखा तो लोग घरों से काम करने पर मजबूर हुए, स्कूल बंद हो गए ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक्स उपकरणों की मांग में अब तक की सबसे ज्यादा तेजी देखी गई, जिसकी वजह से चिप की मांग में भी कल्पना से परे का इजाफा देखा गया. घरों में काम करने के चलते लैपटॉप की मांग बीते दशकों में सबसे ज्यादा रही. इसी तरह घरेलू नेटवर्किंग से जुड़े उपकरण जैसे राउटर, वैबकैम, मॉनिटर, क्रोमबुक, घरेलू उपकरण जैसे टीवी, एयरप्यूरीफायर की मांग में भी इजाफा देखने को मिला.

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    अनुमान में उतार चढ़ाव- महामारी के दौरान कार निर्माताओं को उम्मीद नहीं थी कि कारों की बिक्री में इतनी तेजी से इजाफा हो सकता है, उन्होंने 2020 के अंत में मांग को बढ़ाने में जल्दी तो दिखाई, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी क्योंकि चिप निर्माता कंप्यूटर और स्मार्टफोन की बड़ी कंपनी जैसे एप्पल की मांग को पूरा कर रहे थे.
    जमाखोरी – कंप्यूटर निर्माताओं ने 2020 की शुरुआत में आपूर्ति की कमी को लेकर चेतावनी दी थी. इसी साल के मध्य में हुआवेई टेक्नोलॉजी कंपनी, जो चीन की स्मार्टफोन निर्माता कंपनी है और वैश्विक बाज़ार में नेटवर्किंग से जुड़े उत्पाद निर्माण पर अपनी पकड़ के लिए जानी जाती है. उसने चिप की जमाखोरी करना शुरू कर दिया ताकि अमेरिका के लगाए प्रतिबंध के बावजूद वह बची रह सके. उधर चीन का चिप आयात करीब 380 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया जबकि इससे पहले वाले साल में यह 330 बिलियन डॉलर था.
    कोढ़ में खाज – फरवरी में भयानक सर्दी के चलते टेक्सास में बिजली की आपूर्ति ठप पड़ गई जिससे ऑस्टिन के इर्द गिर्द एरिया में सेमीकंडक्टर बनाने वाले प्लांट बंद पड़ गए. इसकी वजह से सैमसंग को सामान्य स्थिति में आने में मार्च तक का समय लग गया. उधर जापान के रेनेसस इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्प जो स्वचालित चिप का बड़ा प्रदाता है उसकी यूनिट में भयानक आग लग गई जिससे पूरे महीने भर उत्पादन बाधित रहा.

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    असर किस पर- चिप की कमी के चलते कार निर्माताओं को इस साल करीब 210 बिलियन डॉलर के नुकसान का अनुमान है और वे करीब 7.7 मिलियन वाहन कम बना सके हैं. सैमसंग ने चेतावनी देते हुए कहा कि आपूर्ति और मांग में वैश्विक स्तर पर घोर असंतुलन देखने को मिल रहा है. वहीं टीएसएमसी का अनुमान है कि कमी 2022 में भी बनी रह सकती है. कुछ ब्रॉडबैंड प्रदाता तो एक साल से इंटरनेट राउटर के आने का इंतजार कर रहे हैं. एप्पल का कहना है कि आइ पैड और मैक्स की बिक्री में कमी आई जिससे उनकी तीसरी तिमाही की बिक्री पर 3 से 4 बिलियन डॉलर का असर पड़ा. टोयोटा मोटर्स कॉर्प ने सितंबर में अपने 14 प्लांट में निर्माण को स्थगित कर दिया था.

    चिप है क्या- चिप इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं को स्मार्ट बनाने का काम करता है. यह आमतौर पर सिलिकॉन से बना होता है जो बिजली का अर्ध संचालन यानी सेमी कंडक्ट करता है. चिप कई तरह के काम करता है. जैसे मेमोरी चिप जो डेटा संग्रहण का काम करती है, इसी तरह लॉजिक चिप जो प्रोग्राम चलाने और किसी उपकरण के दिमाग की तरह काम करता है. आमतौर पर इसे एप्पल या एनवीडिया के नाम से जाना जाता है. लेकिन यह कंपनिया सेमीकंडक्टर के डिजाइन का काम करती हैं. इन्हें जहां निर्माण किया जाता है उन्हें फाउंड्री कहा जाता है.

    चिप निर्माण की प्रतिस्पर्धा में मुश्किल क्या है- उन्नत किस्म की लॉजिक चिप बनाने में असाधारण सटीकता की ज़रूरत होती है जिसके साथ ही तेजी से होते बदलावों के चलते लंबी अवधि का दांव लगा होता है. एक प्लांट को बनाने में अरबों डॉलर की लागत आती है औऱ इस निवेश की भरपाई के लिए इन्हें 24 घंटे, 7 दिन लगातार चलते रहना होता है, इसके लिए इन्हें भारी मात्रा में बिजली और पानी की ज़रूरत होती है. यही नहीं यह इतना नाजुक होता है कि धूल के कण, दूर आया भूकंप का झटका और बहुत छोटा सा आघात भी इसे नुकसान पहुंचा सकता है.

    बड़े निर्माता – फाउंड्री जगत में टीएसएमसी शुरुआती कंपनियों में से है, जो विशुद्ध रूप से दूसरों के लिए चिप निर्माण का ही काम करती है. इसकी शुरुआत 1980 में सरकार की मदद से हुई थी. अब यह सबसे बेहतरीन चिप का निर्माण करती है. वैश्विक स्तर पर फाउंड्री बाजार में तीन सबसे बड़ी निर्माता कंपनियों का कुल साझा भी इससे कम है.

    सैमसंग मेमोरी चिप निर्माण में अग्रणी कंपनी है और लगातार टीएसएमसी को मात देने की कोशिश करती रही है. यह लगातार अपने उत्पादन तकनीक को बेहतर कर रही है और नई कंपनियों जैसे क्वालकोम इंक और एनवीडिया कॉर्प के ऑर्डर इन्हें मिल रहे हैं.
    इंटेल कॉर्प, इस फील्ड में एक और बड़ा नाम है, लेकिन अमेरिका की यह कंपनी अपने खुद के ब्रांड के निर्माण पर ही केंद्रित है, जो लैपटॉप और डेस्कटॉप कंप्यूटर के लिए सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू) के तौर पर काम करती है. इंटेल ने फाउंड्री जगत में सेंध लगाने के लिए 20 बिलियन डॉलर निवेश करके एरिजोना में दो कारखाने स्थापित किये हैं. और यह दूसरे चिप निर्माताओं को खरीदने का भी मन बना रही है. इसी तरह कुछ छोटे निर्माताओं में अमेरिका के ग्लोबल फाउंड्रीज इंक, चीन की सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग इंटरनेशनल कॉर्प (एसएमआईसी) और ताइवान की यूनाइटेड माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्प शामिल है. लेकिन तकनीक के मामले में यह टीएसएमसी से से दो से तीन जेनरेशन पीछे हैं.

    गला काट प्रतियोगिता और चिप निर्माण के सूरमा – चिप निर्माण की दोनों दिग्गज कंपनी दुनिया में अपना प्रभुत्व बनाए रखने के लिए भारी निवेश कर रही हैं. टीएसएमसी ने अप्रैल में बताया था कि वह अगले तीन सालों में अपने पूंजीगत खर्च को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर कर देगी, इसमें 2021 में क्षमता विस्तार और उन्नयन पर लगभग $ 30 बिलियन भी शामिल है. पिछले साल यह निवेश रिकॉर्ड 17 अरब डॉलर का था. वहीं सैमसंग अपने ताइवानी प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ने के लिए एक दशक लंबी परियोजना के साथ करीब 151 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है. उधर चीन अमेरिकी प्रौद्योगिकी पर अपनी निर्भरता को कम करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है, हालांकि मोटर वाहन क्षेत्र में, चीनी चिप डिजाइन कंपनियां अभी भी उन्नत चिप्स के साथ आने में सक्षम नहीं हैं जो आज की स्मार्ट कारों के लिए दिमाग का काम करती हैं. इसके लिए चीन ने इस साल फिर से अत्याधुनिक चिप्स में खर्च बढ़ाने और अनुसंधान को बढ़ावा देने का वादा किया था.

    एशिया के बाहर का हाल- अमेरिका जो फिलहाल चिप डिजाइन के मामले में दुनिया में अव्वल है, घरेलू स्तर पर अत्याधुनिक कारखानों के निर्माण को प्रोत्साहित कर रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अमेरिका में सेमीकंडक्टर उत्पादन और शोध के लिए कम से कम 50 बिलियन डॉलर की सहायता देने का प्रस्ताव दिया था. खास बात यह है कि यह बिल कांग्रेस में आसानी से उसी दिन पास हो गया था. इनका प्रशासन एरिजोना में 12 बिलियन डॉलर लागत के टीएसएमसी प्लांट के निर्माण को प्रोत्साहित करने औऱ टेक्सास में सैमसंग के 17 बिलियन डॉलर की लागत वाले प्लांट के निर्माण में सहायता देगा. इसी तरह यूरोपियन संघ आधिकारिक तौर पर यूरोप में अत्याधुनिक सेमीकंडक्टर कारखाना बनाने के लिए रास्ते तलाश रही है.

    तकनीक कहां पर ठहरेगी- जैसे-जैसे 5जी मोबाइल नेटवर्क बढ़ेगा, ज्यादा डेटा वाले वीडियो गेम की स्ट्रीमिंग की मांग बढ़ेगी. क्योंकि काफी लोग अभी भी घर से काम कर रहे हैं. ऐसे में ज्यादा शक्तिशाली चिप की जरूरत पड़ेगी. टीएसएमसी और सैमसंग ट्रांजिस्टर को अधिक सूक्ष्म बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि एक ही चिप में अधिक ट्रांजिस्टर लग सकें. इसी तरह के छोटे बदलाव भी लागत पर बहुत असर डाल सकते हैं. जैसे अमेजन वेब सर्विस इंक या क्लाउड कंप्यूटिंग प्रदाता, ऐसे ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भी नवाचार को बढ़ावा देने मे एक ताकत का काम करता है.

    ताइवान इन सब में कहां फिट होता है- इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 1970 के दशक में फैसला लिया था उसकी वजह से यह लोकतांत्रिक द्वीप आज प्रमुख खिलाड़ी के तौर पर उभरा है. अमेरिका की पूर्व इलेक्ट्रॉनिक कंपनी आरसीए कॉर्प के साथ तकनीकी हस्तांतरण के सौदे के तहत यह हुआ था. अब अमेरिका को उस स्तर पर जाने में वर्षों लग जाएंगे. बोस्टन कंसल्टिंग समूह और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एसोसिएशन का अनुमान है कि अमेरिका को चिप निर्माण में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बनने में करीब 10 साल और 1 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का खर्च लगेगा. उधर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सेमीकंडक्टर सहित प्रमुख प्रौद्योगिकियों में 2025 तक 1.4 ट्रिलियन डॉलर के निवेश की योजना बनाई है. वहीं बाइडेन प्रशासन ने अमेरिकी तकनीक तक चीन की पहुंच को प्रतिबंधित करने के प्रयासों को जारी रखने के संकेत दिए हैं. इसमें ताइवान की फाउंड्री भी शामिल हैं. उधर चीन की ताइवान से भी कई सालों से नहीं बन रही है. अर्थशास्त्री चिपनिर्माण को लेकर चल रहे भू राजनीतिक संघर्ष को एक नए चरण में प्रवेश करते हुए देख रहे हैं.

    Tags: America, China, Samsung, Taiwan

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