पश्चिम बंगाल: दुर्गा पूजा को लेकर आदेश पर फिर हाईकोर्ट जाने की तैयारी में पंडाल आयोजक

कलकत्ता हाईकोर्ट ने दुर्गा पूजा पंडालों को नो एंट्री जोन घोषित कर दिया है.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने दुर्गा पूजा पंडालों को नो एंट्री जोन घोषित कर दिया है.

इससे पहले हाईकोर्ट ने कल अपने आदेश में कहा था कि दुर्गा पंडालों के अंदर केवल आयोजक ही जा सकेंगे और बड़े पंडालों में इनकी अधिकतम संख्या 25, जबकि छोटे पंडालों में अधिकतम 15 आयोजकों को ही जाने की इजाजत होगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 10:25 AM IST
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कोलकाता. कोरोना वायरस (Coronavirus Pandemic) महामारी के मद्देनजर इस साल नवरात्रि के दौरान दुर्गा पूजा (Durga Puja Pandals) पंडालों को नो एंट्री जोन घोषित किए जाने के आदेश पर शहर के 400 शीर्ष पंडाल आयोजक कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) से दोबारा विचार करने की अपील की तैयारी में हैं. बंगाल के इस सबसे बड़े पर्व को लेकर दुर्गा पूजा आयोजकों की तरफ से उनकी संयुक्त संस्था दुर्गोत्सव कोर्ट में अपील करेगी.

दरअसल पश्चिम बंगाल में अब तक कोरोना वायरस के 3.2 लाख मामले सामने आ चुके हैं और इस बीमारी के कारण 6,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इसी के मद्देनजर जस्टिस संजीव बनर्जी और जस्टिस अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी आगंतुक को पंडाल में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

हाईकोर्ट ने सोमवार को अपने आदेश में कहा था कि दुर्गा पंडालों के अंदर केवल आयोजक ही जा सकेंगे. बड़े पंडालों में इनकी अधिकतम संख्या 25, जबकि छोटे पंडालों में अधिकतम 15 आयोजकों को ही जाने की इजाजत होगी. कोर्ट ने इसके साथ ही दुर्गा पूजा पंडालों के बाहर बैरीकेड्स लगाने का आदेश दिया था. छोटे पंडालों के लिए इसकी सीमा पांच मीटर तथा बड़े पंडालों के लिए इससे दोगुनी यानी 10 मीटर तक की थी. बेंच ने कहा कि बैरिकेडों पर प्रवेश निषेध (No Entry) के बोर्ड लगे होने चाहिए.
पीठ ने यह आदेश सब्यसाची चटर्जी नामक एक व्यक्ति की जनहित याचिका पर दिया. दुर्गा पूजा पश्चिम बंगाल का सबसे बड़ा उत्सव है, लेकिन विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने आशंका जतायी थी कि इस उत्सव में लापरवाही से वायरस का प्रकोप बढ़ सकता है. दरअसल ऐसा केरल में देखा जा चुका है, जहां ओणम के बाद संक्रमितों की संख्या में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई. (भाषा इनपुट के साथ)
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