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उद्धव की शिवसेना के लिए शिवाजी पार्क में क्यों अहम है दशहरा रैली, क्या है इसका इतिहास; जानें डिटेल

शिवसेना के लिए बहुत खास है शिवाजी पार्क (फाइल फोटो)

शिवसेना के लिए बहुत खास है शिवाजी पार्क (फाइल फोटो)

शिवसेना के लिए इसका विशेष स्थान है. शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने 56 साल पहले यहीं पहली रैली की थी और उसके बाद हर सा ...अधिक पढ़ें

मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे नीत शिवसेना के दोनों गुटों द्वारा मुंबई में आज यानी पांच अक्टूबर को अलग-अलग दशहरा रैली आयोजित की जा रही है. शिवसेना के 56 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार है, जब बुधवार को मुंबई में दो दशहरा रैलियां आयोजित होंगी. इस साल जून में सियासी उलटफेर के बाद यह पहला ऐसा सामूहिक आयोजन है, जिसमें दोनों गुट अपनी-अपनी ताकत दिखाने की तैयारी में हैं. दहशहरा रैली एक तरह से दोनों गुटों के लिए शक्ति प्रदर्शन का मौका है.

उद्धव ठाकरे आज शिवसेना के पारंपरिक दशहरा रैली आयोजन स्थल मध्य मुंबई के शिवाजी पार्क में रैली करेंगे. यहां 1996 से शिवसेना की दशहरा रैली होती आ रही है. वहीं, एकनाथ शिंदे गुट को पूर्व मुख्यमंत्री ठाकरे के निजी आवास ‘मातोश्री’ के नजदीक बांद्रा कुर्ला काम्प्लेक्स (बीकेसी) स्थित एमएमआरडीए मैदान में दशहरा पर कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी गई है. बता दें कि जून में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में शिवसेना के करीब 40 विधायकों ने बगावत कर दी थी, जिसके बाद महा विकास आघाड़ी (एमवीए) सरकार का पतन हो गया था. इसके बाद से दोनों गुटों में कटुतापूर्ण संबंध हैं और कार्यकर्ताओं को सड़क पर झड़प करते देखा गया है.

माना जा रहा है कि इस साल की दशहरा रैली न केवल उन दोनों गुटों के लिए एक मौका है, जो ‘असली’ शिवसेना होने का दावा करते हैं, बल्कि अपनी ताकत और समर्थन दिखाने का भी बहुत बड़ा अवसर है. शुरू से ही दशहरा रैली शिवसेना की आउटरीच रणनीति का एक अभिन्न पहलू रही है और 1966 में इसकी स्थापना के बाद से पार्टी हर साल इसी शिवाजी पार्क में दहशहरा रैली करती रही है, यही वजह है कि इस जगह का उद्धव गुट वाली शिवसेना के लिए बहुत महत्व है.

क्या है शिवसेना की दशहरा रैली

दरअसल, हर साल दशहरा के अवसर पर शिवसेना मध्य मुंबई में दादर के पास स्थित शिवाजी पार्क मैदान में एक मेलावा (सभा) आयोजित करती है. महाराष्ट्र भर से शिवसेना के नेता, पार्टी कार्यकर्ता और समर्थक रैली में शामिल होने के लिए हर साल मुंबई आते हैं. इस शिवाजी पार्क का ठाकरे परिवार से कई पीढ़ियों का नाता रहा है. शिवसेना के बनने के बाद से शिवाजी पार्क में ही उनकी दशहरा की रैली होती रही है.

क्या है इसका महत्व

शिवसेना की पहली दशहरा रैली 30 अक्टूबर 1966 को पार्टी की स्थापना के लगभग चार महीने बाद शिवाजी पार्क में आयोजित की गई थी. बता दें कि पार्टी की स्थापना 19 जून, 1966 को हुई थी. पहली दशहरा रैली को शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे ने संबोधित किया था. उस पहली दशहरा रैली में मौजूद शिवसेना के वरिष्ठ नेता सुभाष देसाई के अनुसार, बाल ठाकरे के पिता प्रबोधनकर ठाकरे ने भी रैली को संबोधित किया था और कहा था, ‘मैं अपने बेटे को महाराष्ट्र की सेवा के लिए पेश कर रहा हूं.’

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, साल 1966 की रैली ने शिवसेना की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और पूरे मुंबई और महाराष्ट्र में पार्टी के भविष्य को आकार दिया और इसकी सफलता ने इस दशहरा रैली को पार्टी के लिए एक वार्षिक परंपरा बना दिया. यही वजह है कि हर साल शिवसेना की दशहरा रैली इसी मैदान में होती है. जब बीएमसी ने इस मैदान में रैली करने की इजाजत नहीं दी तो यही वजह है कि ठाकरे परिवार को इस बार कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा.

शिवाजी पार्क स्थल का क्या महत्व है?

कोरोना काल के 2 साल यानी 2020 और 21 को छोड़कर शिवसेना ने हर साल शिवाजी पार्क में दशहरा रैली आयोजित की है. शिवाजी पार्क को शिव सैनिकों द्वारा ‘शिवतीर्थ’ के रूप में भी जाना जाता है. वर्ष 2012 में जब बाल ठाकरे का निधन हुआ, तब इसी मैदान में उनका अंतिम संस्कार किया गया था. शिवसैनिक इसी वजह से इसे ‘शिव तीर्थ’ कहते हैं, जहां अब बाल ठाकरे का स्मारक है. यहीं पर शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने 2019 में मुख्यमंत्री पद की शपथ भी ली थी. 1966 में बाल ठाकरे ने खुद अपनी पहली दशहरा रैली के लिए इस शिवाजी पार्क का चयन किया था, जबकि उनके करीबी नेता चाहते थे कि यह आयोजन एक बंद हॉल में हो, क्योंकि यह शिवसेना का पहला बड़ा आयोजन था.

शिवसेना की रणनीति का हिस्सा

शिवसेना सांसद गजानन कीर्तिकर ने कहा कि इस स्थान से शिवसेना प्रमुख बालासाहेब ठाकरे पार्टी का एजेंडा घोषित करते थे जैसे कि मराठी मानुष, हिंदुत्व और विविध विषयों पर पार्टी का रुख. उन्होंने कहा कि यहीं से वह विरोधियों तथा राज्य एवं केंद्र सरकारों पर भी तीखे हमले करते थे.उन्होंने कहा कि पार्क के पास ही स्वतंत्रता संग्राम सेनानी विनायक दामोदर सावरकर का एक स्मारक भी है. सावरकर उसी क्षेत्र में एक बंगले में रहते थे. ठाकरे परिवार बांद्रा स्थित ‘मातोश्री’ बंगले से पहले उसी क्षेत्र में रहता था और पार्टी मुख्यालय ‘सेना भवन’ पार्क के पास ही है.

उद्धव की शिवसेना के लिए इस साल की दशहरा रैली महत्वपूर्ण क्यों?

शिवसेना के दोनों गुटों ने शिवाजी पार्क में दशहरा रैली आयोजित करने की अनुमति के लिए इस साल अगस्त में बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में आवेदन किया था. 22 अगस्त को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट के सचिव और सांसद अनिल देसाई ने शिवाजी पार्क में अपनी दशहरा रैली आयोजित करने के लिए बीएमसी की अनुमति मांगी और 30 अगस्त को एकनाथ शिंदे के खेमे से विधायक सदा सर्वंकर ने भी उसी मैदान में शिवसेना दशहरा रैली आयोजित करने की अनुमति के लिए आवेदन किया. इसके बाद कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी होने के डर से 21 सितंबर को बीएमसी ने दोनों खेमों को रैली की इजाजत देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद शिवसेना ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हाईकोर्ट ने उद्धव ठाकरे खेमे को रैली की अनुमति दे दी. इस फैसले से ठाकरे के समर्थक खुशी से झूम उठे क्योंकि वे असली शिवसेना होने के अपने दावे पर अदालती आदेश को मुहर मान रहे हैं. (इनपुट भाषा से)

Tags: Dussehra Festival, Shiv sena, Uddhav thackeray

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