छात्रसंघ चुनाव: JNU में कल प्रेसिडेंशियल डिबेट, DU में वोटिंग

डीयू में 12 सितंबर यानी के कल वोटिंग होनी है जबकि इसी दिन जेएनयू में मशहूर प्रेसिडेंशियल डिबेट होनी है, जबकि जेएनयू में 14 सितंबर को वोटिंग है.

Ankit Francis | News18Hindi
Updated: September 11, 2018, 12:41 PM IST
छात्रसंघ चुनाव: JNU में कल प्रेसिडेंशियल डिबेट, DU में वोटिंग
JNU में कल प्रेसिडेंशियल डिबेट, DU में वोटिंग
Ankit Francis | News18Hindi
Updated: September 11, 2018, 12:41 PM IST
दिल्ली के दो बड़ी यूनिवर्सिटीज जवाहर लाल नेहरु यूनिवर्सिटी (जेएनयू) और दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के छात्रसंघ चुनावों में अब एक ही दिन बाकी रह गया है. डीयू में 12 सितंबर यानी के कल वोटिंग होनी है जबकि इसी दिन जेएनयू में मशहूर प्रेसिडेंशियल डिबेट होनी है, जबकि जेएनयू में 14 सितंबर को वोटिंग है. डीयू में जहां मुकाबला एनएसयूआई और एबीवीपी के बीच है वहीं इस बार जेएनयू में लेफ्ट के चारों संगठन साथ मिलकर मैदान में हैं जिसकी वजह कैंपस में मजबूत होती बापसा और एबीवीपी को माना जा रहा है.

डीयू में कल है वोटिंग
डूसू (DUSU) चुनाव 2018 में भी एनएसयूआई और एबीवीपी के बीच ही मुकाबला माना जा रहा है. हालांकि लेफ्ट के प्रमुख संगठन आइसा और आम आदमी पार्टी के छात्र संगठन सीवाईएसएस के गठबंधन से एक तीसरी शक्ति के सामने आने के बारे में भी चर्चाएं आम हैं. कांग्रेस समर्थित एनएसयूआई ने सन्नी छिल्लर को प्रेजिडेंट, लीना को वाइस प्रेजिडेंट, आकाश चौधरी को सेक्रटरी और सौरभ यादव को ज्वॉइंट सेक्रेटरी का उम्मीदवार बनाया है.



उधर बीजेपी समर्थित एबीवीपी ने इस बार अंकिव बसोया को प्रेजिडेंट, शक्ति सिंह को वाइस प्रेजिडेंट, सुधीर डेढ़ा को सेक्रटरी और ज्योति चौधरी को ज्वॉइंट सेक्रेटरी पद के लिए चुनाव मैदान में उतारा है. लेफ्ट के छात्र संगठन आइसा की ओर से इस बार प्रेजिडेंट के लिए अभिज्ञान और वाइस प्रेजिडेंट पोस्ट के लिए अंशिका नाम फाइनल किया है. वहीं गठबंधन में सीवईएसएस की तरफ से सेक्रेटरी पद के लिए चन्द्रमणि देव और ज्वॉइंट सेक्रेटरी पद के लिए सन्नी तंवर चुनाव लड़ रहे हैं. गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी समर्थित छात्र इकाई सीवाईएसएस और वामदल समर्थित आइसा इस बार संयुक्त रूप से डूसू चुनाव लड़ रहे हैं.



डीयू में क्या हैं चुनावी मुद्दे?
एबीवीपी, एनएसयूआई और आइसा-सीवाईएसएस तीनों ही संगठनों ने हॉस्टल, मेट्रो पास, यूनिवर्सिटी स्पेशल बसें जैसे कॉमन मुद्दों के साथ डूसू चुनाव में प्रचार किया है. एनएसयूआई के ख़ास वादों में डीयू के लिए 'इंस्टिट्यूशन ऑफ एमिनेंस' टैग, स्टूडेंट कैंटीन में 0 रुपये की थाली और गर्ल्स के लिए स्पेशल बसें शामिल हैं. उधर एबीवीपी ने 50% से ज्यादा डूसू बजट लड़कियों के लिए, हर कॉलेज में लड़कियों के लिए सैनिटरी नैपकिंस वेंडिंग मशीन और सेफ और वॉयलंस फ्री कैंपस जैसे वादें किए हैं. आइसा-सीवाईएसएस गठबंधन ने दिल्ली मेट्रो में स्टूडेंट्स के रियायती पास, कैंपस में गुंडागर्दी पर काबू करने के लिए सीसीटीवी कैमरे और पुलिस बूथ और मोहल्ला क्लिनिक की तर्ज पर कॉलेजों में फ्री छात्र क्लिनिक जैसे वादें किए हैं.

जेएनयू में कल प्रेसिडेंशियल डिबेट, 14 को वोटिंग
जेएनयू को लेफ्ट पॉलिटिक्स का गढ़ माना जाता रहा है और इस यूनिवर्सिटी ने देश की लगभग सभी बड़ी पार्टियों को लीडर्स भी दिए हैं. आने वाली 14 सितंबर को एक बार फिर जेएनयू में छात्रसंघ का चुनाव है और लगातार तीसरे साल लेफ्ट पार्टियां साथ मिलकर लड़ने के लिए मजबूर नज़र आ रही हैं. इस बार लेफ्ट के चारों प्रमुख संगठन 'लेफ्ट यूनिटी' के नाम से साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं. लेफ्ट पैनल से प्रेजिडेंट पोस्ट के लिए आइसा के एनसाई बाला मैदान में हैं. वाइस प्रेजिडेंट के लिए डीएसएफ की सारिका चौधरी, सेक्रेटरी के लिए एसएफआई के एजाज अहमद और जॉइंट सेक्रेटरी के लिए एआईएसएफ की अमुथा जयदीप को मैदान में उतारा गया है.

बापसा और एबीवीपी भी काफी मजबूत
बीते जेएनयूएसयू चुनावों में बिरसा-आंबेडकर-फुले स्टूडेंट असोसिएशन (बापसा) सबसे ज्यादा वोट हासिल करने वाली दूसरे नंबर की पार्टी रही थी. बापसा ने इस बार भी चारों सीटों के लिए अपने उम्मीदवार उतारे हैं. बापसा की तरफ से अध्यक्ष पद के लिए टी प्रवीण, उपाध्यक्ष के लिए पी नाइक, जनरल सेक्रेट्री के लिए विश्वंभर नाथ प्रजापति और जॉइंट सेक्रेट्री के लिए कनकलता यादव को मैदान में उतारा है.



उधर एबीवीपी भी जेएनयू में लगातार बढ़िया प्रदर्शन कर रही है. बीते साल प्रेजिडेंट पोस्ट पर एबीवीपी की कैंडिडेट निधि त्रिपाठी दूसरे नंबर पर रही थी. एबीवीपी ने अध्यक्ष पद के लिए ललित पांडे, उपाध्यक्ष के लिए गीताश्री बरुआ, सेक्रेट्री के लिए गणेश गुर्जर और जॉइंट सेक्रेट्री के लिए वेंकट चौबे को पैनल में उतारा है. एनएसयूआई भी मैदान में है प्रेजिडेंट पोस्ट के लिए विकास यादव लड़ रहे हैं मैदान में हैं. इसके आलावा इस संगठन से वाइस प्रेजिडेंट पोस्ट के लिए लीजे के बाबू, सेक्रेटरी के लिए गुरुग रीना, जॉइंट सेक्रेटरी के मोहम्मद मुफिजुल आलम चुनाव लड़ रहे हैं.

जेएनयू में क्या हैं मुद्दे ?
इस बार प्रेजिडेंट पोस्ट के लिए 8 कैंडिडेट आमने-सामने हैं. जिनमें मुख्य संगठनों को छोड़ दें तो छात्र राजद से पहली बार जयंत कुमार भी मैदान में हैं. इनके आलावा 'सवर्ण छात्र मोर्चे' से निधि मिश्र हैं, जिनका कहना है कि वो गरीब सवर्ण की बात उठाने चुनावी मैदान में हैं. 'जेंडर जस्टिस' के नारे के साथ सैब बिलावल भी जबकि पीएचडी स्टूडेंट जानू हीर भी बतौर इंडिपेंडेंट कैंडिडेट मैदान में हैं. लेफ्ट पैनल से प्रेजिडेंट पद के उम्मीदवार एनसाई बालाजी के मुताबिक सबसे बड़ा मुद्दा है लोन स्कीम के तहत 500 करोड़ से ज्यादा का लोन, जो जेएनयू ने लिया है. इसे चुकाने के लिए यूनिवर्सिटी के पास कोई साधन नहीं है इसके चलते फीस कई गुना बढ़ेगी. इनके अलावा, GSCASH को वापस लाने, नजीब की गुमशुदगी जैसे मुद्दों पर संघर्ष जारी रहेगा.



उधर एबीवीपी के ललित पांडे का कहना है कि उनका पूरा जोर कैंपस की मूलभूत समस्याओं से निपटने पर रहेगा. हमारी मांग है कि फेलोशिप बढ़े, हॉस्टल बनाए जाएं, छात्राओं के लिए सैनिटरी नैपकिन की सुविधा हो. बापसा से प्रेजिडेंट पोस्ट के लिए थालापल्ली प्रवीण के मुताबिक दलित-पिछड़ों कि हिस्सेदारी और आरक्षण को सही से लागू करवाना उनके एजेंडे में सबसे ऊपर हैं. एनएसयूआई भी जेएनयू प्रशासन की फासीवादी नीतियों के विरोध और कैंपस की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादों के जरिये प्रचार में जुटे हैं.
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