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पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद ने प्रतिस्पर्धी रोडमैप जारी किया, 2047 तक भारत होगा एक उच्च आय वाला देश

 आज  ईएसी-पीएम ने 'इंडिया एट द रेट 100' के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता रोडमैप जारी किया.  (फोटो-twitter/@EACtoPM)

आज ईएसी-पीएम ने 'इंडिया एट द रेट 100' के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता रोडमैप जारी किया. (फोटो-twitter/@EACtoPM)

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने 30 अगस्त को 'इंडिया एट द रेट 100' के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता रोडमैप ...अधिक पढ़ें

हाइलाइट्स

ईएसी-पीएम ने 'इंडिया एट द रेट 100' के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता रोडमैप जारी किया.
2047 तक भारत के उच्च आय वाला देश बनाने का मार्ग प्रशस्त किया गया है.

नई दिल्ली. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने 30 अगस्त को ‘इंडिया एट द रेट 100’ के लिए प्रतिस्पर्धात्मकता रोडमैप जारी किया है. यह दस्तावेज ईएसी-पीएम के अध्यक्ष डॉ. बिबेक देबरॉय, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत, ईएसी-पीएम के सदस्य संजीव सान्याल की उपस्थिति में जारी किया गया. यह रोडमैप  भारत को 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने में मार्ग प्रशस्त करेगा. 

इस कार्यक्रम में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल (एचबीएस) के प्रोफेसर माइकल ई पोर्टर वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल थे. उन्होंने कार्यक्रम में कहा कि भारत दुनिया के सर्वाधिक महत्वपूर्ण देशों में से एक है और इसके पास अत्यधिक ताकत और क्षमता है. प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जुड़े पोर्टर ने कहा कि भारतीय सफल होना चाहते हैं और समृद्ध होना चाहते हैं.

इस दौरान उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत द्वारा 2047 तक उच्च आय वाला देश बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सामाजिक और आर्थिक एजेंडे को एकीकृत करने की जरूरत है. इस कार्यक्रम में एचबीएस के प्रोफेसर क्रिश्चियन केटेल्स ने कहा कि भारत उन देशों में से एक है, जिनके पास अपने सभी नागरिकों के लिए वृद्धि के अवसरों को बढ़ाने की सबसे अधिक क्षमता है.

कार्यक्रम के मुख्य बिंदु 

-यह रोडमैप भारत की वर्तमान आर्थिक स्थिति और प्रतिस्पर्धात्मक लाभों के गहन विश्लेषण के आधार पर प्राथमिकता वाली पहलों का एक समन्वित एजेंडा प्रस्तुत करता है.

-यह भारत द्वारा तत्काल प्राथमिकता दिए जाने वाले जरूरी कार्यों और इन कार्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए खुद को व्यवस्थित करने के जरूरी तरीकों के बारे में बताता है.

-बता दें कि दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि प्रतिस्पर्धात्मक दृष्टिकोण को भारत की आर्थिक और सामाजिक नीति की आधारशिला के रूप में काम करना चाहिए, ताकि इसके विकास को और आगे बढ़ाया जा सके और इसे लंबे समय तक बनाए रखा जा सके.

Tags: Economic growth, Prime Minister of India

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