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चीन संग एस जयशंकर की बात, मास्को एग्रीमेंट से लेकर पूर्वी लद्दाख में डिसइंगेजमेंट पर चर्चा

चीनी समकक्ष वांग यी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर.  (PTI File)

चीनी समकक्ष वांग यी के साथ विदेश मंत्री एस. जयशंकर. (PTI File)

India China News: पैंगोंग झील के उत्तरी एवं दक्षिणी छोर से भारत और चीन के सैनिकों, अस्त्र-शस्त्रों तथा अन्य सैन्य उपकरणों को हटाए जाने की प्रक्रिया 18 फरवरी को पूरी हो चुकी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 25, 2021, 9:16 PM IST
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नई दिल्ली. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बृहस्पतिवार को चीन के विदेश मंत्री के साथ सीमा गतिरोध पर ‘मास्को समझौते’ के क्रियान्वयन पर चर्चा की और साथ ही सैनिकों की वापसी की स्थिति की समीक्षा की. शांघाई सहयोग संगठन (एससीओ) सम्मेलन से इतर पिछले वर्ष 10 सितंबर को मास्को में हुई बैठक में जयशंकर और वांग यी ने पांच बिन्दुओं पर सहमति व्यक्त की थी.


इसमें सैनिकों के तेजी से पीछे हटने, ऐसे किसी कदम से बचने जिससे तनाव बढ़े और सीमा प्रबंधन पर प्रोटोकाल का पालन तथा वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति बहाल करने जैसे कदम शामिल हैं. उन्होंने ट्वीट किया, "आज चीन के विदेश मंत्री वांग यी से बात की. इस दौरान सीमा गतिरोध पर ‘मास्को समझौते’ के क्रियान्वयन पर चर्चा की तथा सैनिकों की वापसी की स्थिति की समीक्षा की."


बता दें कि पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के उत्तरी एवं दक्षिणी छोर से भारत और चीन के सैनिकों, अस्त्र-शस्त्रों तथा अन्य सैन्य उपकरणों को हटाए जाने की प्रक्रिया 18 फरवरी को पूरी हो चुकी है और अब पूर्वी लद्दाख में हॉट स्प्रिंग्स, गोगरा और देपसांग जैसे क्षेत्रों से भी सैन्य वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. 20 फरवीर को चीन की तरफ मोल्दो सीमा क्षेत्र में शुरू हुई कोर कमांडर स्तर की 10वें दौर की वार्ता में आगे की प्रकिया पर चर्चा हुई थी.




S Jaishankar Tweet
S Jaishankar Tweet

दोनों देशों के बीच सैन्य गतिरोध को नौ महीने हो गए हैं. समझौते के बाद दोनों पक्षों ने पैंगोंग झील के उत्तरी और दक्षिणी छोर क्षेत्रों से अपने-अपने सैनिकों को वापस बुला लिया है तथा अस्त्र-शस्त्रों, अन्य सैन्य उपकरणों, बंकरों एवं अन्य निर्माण को भी हटा लिया है. सूत्रों ने कहा कि 10वें दौर की वार्ता में चर्चा का मुख्य बिंदु अन्य इलाकों से भी वापसी की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का है. दोनों पक्ष इसके लिए तौर-तरीकों पर चर्चा करने के लिए वार्ता कर रहे हैं.




पैंगोंग झील क्षेत्र से सैन्य वापसी की प्रक्रिया 10 फरवरी को शुरू हुई थी जो गत बृहस्पतिवार (18 फरवरी) को पूरी हो गई थी. दोनों देशों के बीच पिछले साल पांच मई को पैंगोंग झील क्षेत्र में हिंसक संघर्ष के बाद सैन्य गतिरोध शुरू हुआ था और फिर हर रोज बदलते घटनाक्रम में दोनों पक्षों ने भारी संख्या में सैनिकों तथा घातक अस्त्र-शस्त्रों की तैनाती कर दी थी.




गतिरोध के लगभग पांच महीने बाद भारतीय सैनिकों ने कार्रवाई करते हुए पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर क्षेत्र में मुखपारी, रेचिल ला और मगर हिल क्षेत्रों में सामरिक महत्व की कई पर्वत चोटियों पर तैनाती कर दी थी. नौवें दौर की सैन्य वार्ता में भारत ने विशेषकर पैंगोंग झील के उत्तरी क्षेत्र में फिंगर 4 से फिंगर 8 तक के क्षेत्रों से चीनी सैनिकों की वापसी पर जोर दिया था. वहीं, चीन ने पैंगोंग झील के दक्षिणी छोर पर सामरिक महत्व की चोटियों से भारतीय सैनिकों की वापसी पर जोर दिया था.


(इनपुट भाषा से भी)

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