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बड़ी मात्रा में मांस खाने से और भी बदतर हो रहा है जलवायु संकट, स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे

बड़ी मात्रा में मांस खाने से और भी बदतर हो रहा है जलवायु संकट, स्टडी में चौंकाने वाले खुलासे

लीड्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में मांस को जलवायु संकट के लिए जिम्मदार माना है. (सांकेतिक तस्वीर)

लीड्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अपने अध्ययन में मांस को जलवायु संकट के लिए जिम्मदार माना है. (सांकेतिक तस्वीर)

Meat Climate Crisis University of Leeds Study: रिसर्च टीम ने 3,000 से अधिक खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण का अध्ययन किया और पाया कि मांस का प्रसंस्करण जलवायु को सबसे अधिक प्रभावित करता है. लगभग 200 व्यक्तियों के आहार का भी अध्ययन किया और आंकड़ों से पता चला कि उत्सर्जन में शाकाहारी भोजन की तुलना में मांसाहारी भोजन का योगदान लगभग 59 प्रतिशत अधिक होता है.

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    नई दिल्ली. एक नए अध्ययन में सामने आया है कि शरीर के लिए फायदेमंद माने जाने वाले मांस से भरपूर आहार ग्रीनहाउस गैसों (Greenhouse Gases) के उत्पादन का एक अहम कारण हैं. लीड्स विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं (University of Leeds Researchers) द्वारा किए गए अध्ययन से पता चलता है कि मांस, विशेष रूप से लाल मांस (Red Meat) की वजह से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन (Greenhouse Gases Emission) औसत या संतुलित आहार की तुलना में 41 प्रतिशत जितना अधिक है.

    शाकाहारी भोजन की तुलना में मांसाहारी भोजन का उत्सर्जन में योगदान अधिक
    रिसर्च टीम ने 3,000 से अधिक खाद्य पदार्थों के प्रसंस्करण (Processing of Foods) का अध्ययन किया और पाया कि मांस का प्रसंस्करण (Processing of Meat) जलवायु को सबसे अधिक प्रभावित करता है. उन्होंने लगभग 200 व्यक्तियों के आहार का भी अध्ययन किया और आंकड़ों से पता चला कि उत्सर्जन में शाकाहारी भोजन की तुलना में मांसाहारी भोजन का योगदान लगभग 59 प्रतिशत अधिक होता है.

    ‘आहार की आदतों में छोटे बदलावों से हो सकता है बड़ा फायदा’
    अध्ययन के मुख्य लेखक डॉ होली रिपिन ने डेली मेल को बताया, “हम सभी पृथ्वी को बचाने में मदद करने के लिए अपनी ओर से कुछ योगदान करना चाहते हैं. हमारे काम से पता चलता है कि हमारे आहार की आदतों में छोटे बदलावों से बड़ा लाभ उठाया जा सकता है, जैसे ब्रांड में बदलाव करना, मिठाई में कटौती करना आदि.”

    ‘कम मांस का मतलब अधिक स्थिरता’
    अध्ययन इस तथ्य की पुष्टि करता है कि संतुलित मात्रा में पोषण के साथ स्वस्थ आहार से ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम होता है. अध्ययन के लेखक डॉ. डैरेन ग्रीनवुड ने कहा, “यह रिसर्च आपको पूरी तरह से मांस छोड़ने के लिए नहीं कह रहा है, लेकिन यह बताता है कि कम मांस का मतलब अधिक स्थिरता होगा.”

    Tags: Climate Change, Global warming

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