बंगाल में दांव पर EC की साख, ममता ने बताया बीजेपी की कठपुतली तो CM पर 24 घंटे के बैन से खुश नहीं बीजेपी

केंद्रीय चुनाव आयोग (फाइल फोटो)

केंद्रीय चुनाव आयोग (फाइल फोटो)

EC Faces Toughest Credibility Test: टीएमसी नेता और बंगाल की मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट को "मोदी कोड ऑफ कंडक्ट" करार दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 13, 2021, 11:36 AM IST
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अमन शर्मा

नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में केंद्रीय चुनाव आयोग (Election Commission) के लिए साख का चुनाव बन गया है. सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) जहां चुनाव आयोग को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के हाथों की कठपुतली करार दे रही हैं, वहीं बीजेपी की दलील है कि टीएमसी के खिलाफ चुनाव आयोग के फैसले उतने कड़े नहीं हैं, जितने की होने चाहिए. टीएमसी ने केंद्रीय चुनाव आयोग द्वारा ममता बनर्जी पर 24 घंटे का बैन लगाने के फैसले को लोकतंत्र के लिए काला दिन करार दिया है. इस फैसले के खिलाफ ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) मंगलवार को कोलकाता में चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरने पर बैठेंगी और बाद में रात 8 बजे बैन की अवधि समाप्त होने के बाद दो रैलियों को संबोधित करेंगी. दरअसल ममता पर चुनाव आयोग ने यह बैन टीएमसी नेता की उस अपील पर लगाया है, जिसमें उन्होंने मुस्लिम मतदाताओं से पार्टी को वोट देने के लिए कहा था. इसके अलावा ममता ने लोगों से केंद्रीय सुरक्षा बलों का घेराव करने को कहा था, अगर वे वोटिंग में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न करते हैं. दूसरी ओर बीजेपी नेताओं ने न्यूज18 से कहा कि ममता बनर्जी के खिलाफ चुनाव आयोग को और ज्यादा कड़ा एक्शन लेना चाहिए था. कम से कम 72 घंटे का बैन लगाना चाहिए था. एक बीजेपी नेता ने अपनी दलील में कहा कि चुनाव आयोग हेट स्पीच के लिए नेताओं को बैन करता है, लेकिन इस मामले एक सांप्रदायिक अपील की गई थी, जोकि सुरक्षा बलों के खतरा उत्पन्न कर सकती थी, जिसकी वजह से सीतलकुची में कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर स्थिति पैदा करती थी. बता दें कि सीतलकुची में चुनावी हिंसा के दौरान पांच लोगों की जान चली गई थी.

बीजेपी नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग ने पहले नेताओं पर लंबी अवधि के लिए बैन किया है. 2019 के लोकसभा चुनाव में यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उनके 'अली-बजरंग बली' कमेंट के चलते 72 घंटे के लिए बैन किया गया था. इसके अलावा बसपा नेता मायावती पर 48 घंटे का बैन लगा था, मायावती ने मुस्लिम मतदाताओं से कांग्रेस को वोट ना देने की अपील की थी. सपा नेता आजम खान और बीजेपी की मनेका गांधी को 72 घंटे और 48 घंटे के लिए बैन किया गया था. आजम खान ने बीजेपी नेता जया प्रदा पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जबकि मनेका गांधी मुस्लिम से उन्हें वोट देने को कहा था. उसी तरह दिल्ली विधानसभा चुनावों के लिए चुनाव आयोग ने अनुराग ठाकुर और परवेश वर्मा पर 72 और 96 घंटे का बैन लगाता था. इसी तरह 2019 में प्रज्ञा ठाकुर पर 72 घंटे का बैन लगा था. लेकिन, ममता बनर्जी के साथ चुनाव आयोग बच्चों जैसा व्यवहार कर रहा है.

हालांकि सिर्फ बीजेपी को चुनाव आयोग से शिकायत हो, ऐसा नहीं है. टीएमसी नेता और बंगाल की मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग के मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट को "मोदी कोड ऑफ कंडक्ट" करार दिया है. न्यूज18 से एक टीएमसी नेता ने कहा, "चुनाव आयोग से सवाल है कि आखिर बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के 'बेगम' और 'मिनी पाकिस्तान' जैसे बयान पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया. अधिकारी ने दो हफ्ते पहले नंदीग्राम में ये बयान दिए थे. चुनाव आयोग 8 अप्रैल को उनके खिलाफ नोटिस जारी कर सकता था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. मुख्यमंत्री पर बैन लगाने के बाद चुनाव आयोग से अब ज्यादा सवाल होंगे. क्या आयोग दिलीप घोष और राहुल सिन्हा जैसे बीजेपी नेताओं के खिलाफ कोई एक्शन लेगा. सीतलकुची में हिंसा के बाद दिलीप घोष ने कहा था, "शरारती बच्चे गोलियों के सामने आ गए" और ऐसा दोबारा होगा अगर कोई अपनी सीमा को पार करता है. राहुल सिन्हा का बयान था कि ''चार लोगों की जगह आठ लोग मारे जाने चाहिए थे''. हमने चुनाव आयोग से इस बारे में शिकायत की है, देखते हैं कि बीजेपी नेताओं के खिलाफ एक्शन लेने की हिम्मत उनमें है कि नहीं, जैसे कि उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ फैसला लिया है.
चुनाव आयोग का ममता बनर्जी पर 24 घंटे के लिए बैन लगाने को कूचबिहार के सीतलकूची हिंसा और पांचवें चरण की वोटिंग के पहले तनाव को कम करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, किसी बीजेपी नेता के खिलाफ चुनाव आयोग का ऐक्शन नहीं होने से टीएमसी आयोग पर केंद्र के दबाव में काम करने का आरोप लगा रही है. चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि ए राजा पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के खिलाफ बयान देने के कारण 48 घंटे का बैन लगा था. असम में बीजेपी नेता हेमंत विस्वा सरमा के खिलाफ पहले 48 घंटे और फिर माफी मांगने के बाद उनपर प्रतिबंध की अवधि को घटाकर 24 घंटे कर दिया गया था. लेकिन ममता बनर्जी की तरफ से अपने बयान को लेकर कोई माफी सामने नहीं आई.

हालांकि, राजनेता चुनाव आयोग के बैन की भी काट निकालते हैं. जैसे 2019 में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर तीन दिन के बैन लगने के बाद वह एक मंदिर की यात्रा पर गए और वोटरों को संदेश दे दिया. ममता बनर्जी भी कल कोलकाता में गांधी मूर्ति के सामने टीएमसी के बड़े नेताओं के संग धरने पर बैठेंगी. इस धरने को टीवी पर दिखाया जाएगा और इस तरह उनका मकसद भी पूरा होगा. टीएमसी चुनाव आयोग के बैन का लाभ लेने की कोशिश करेगी. सीतलकूची घटना बीच चुनाव में टीएमसी के लिए एक लाइफलाइन की तरह सामने आया है. हालांकि, बीजेपी नेताओं का मानना है कि यह टीएमसी की यह योजना ठीक वैसे ही काम नहीं आएगी जैसे सीएम ममता का व्हीलचेयर कैंपेन काम नहीं आया. ममता की अलोकप्रियता ऐसा होने नहीं देगी. बीजेपी नेता ने कहा कि सीतलकूची की घटना से साफ पता चलता है कि केंद्रीय बलों के कारण राज्य में निष्पक्ष चुनाव होंगे.





इस बीच, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि 2019 के बाद चुनाव आयोग को पहली बार इस तरह के हमले झेलने पड़ रहे हैं. 2019 में कांग्रेस ने आयोग पर पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह को प्रोटेक्ट करने का आरोप लगाया था. पश्चिम बंगाल में कोरोना गाइडलाइंस का भी खुलेआम उल्लंघन हो रहा है और ये भी तब हो रहा है जब देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है.

वहीं चुनाव आयोग के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर News18 से कहा कि आयोग को भड़काऊ भाषण, खासकर सितलकुची फायरिंग को लेकर बयानबाज़ी कर रहे हैं उन बीजेपी नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई करनी चाहिए. वह कहते हैं, 'अगर कोई शिकायत दर्ज नहीं करा रहा है तब भी चुनाव आयोग को इस पर स्वत: संज्ञान लेना चाहिए. यह चुनाव निर्वाचन आयोग के साख की परीक्षा है, क्योंकि राज्य में इतनी बड़ी संख्या में सुरक्षाबल भेजने के बावजूद हिंसा हो रही है और इसे लेकर बदस्तूर बयानबाज़ी चल रही है.
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