मद्रास HC की मौखिक टिप्पणी के खिलाफ क्यों गए SC, चुनाव आयोग ने बताया

चुनाव आयोग  (फाइल फोटो)

चुनाव आयोग (फाइल फोटो)

आयोग (Election Commission) ने उस खबर को लेकर यह टिप्पणी की है जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग की तरफ से ही मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई कि न्यायाधीशों द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियों की रिर्पोटिंग से मीडिया को रोका जाए तथा सुप्रीमकोर्ट में आयोग ने एक विशेष अनुमति याचिका भी दायर की.

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नई दिल्ली. निर्वाचन आयोग (Election Commission) ने बुधवार को कहा कि इसको लेकर सर्वसम्मति थी कि न्यायाधीशों द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियों की मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट से कोई गुहार नहीं लगानी चाहिए. आयोग ने उस खबर को लेकर यह टिप्पणी की है जिसमें कहा गया है कि चुनाव आयोग की तरफ से ही मद्रास हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई कि न्यायाधीशों द्वारा की गई मौखिक टिप्पणियों की रिर्पोटिंग से मीडिया को रोका जाए तथा सुप्रीमकोर्ट में आयोग ने एक विशेष अनुमति याचिका भी दायर की.

यह पूरा मामला मद्रास हाईकोर्ट की उस टिप्पणी से जुड़ा है जिसमें उसने विधानसभा चुनाव के लिए जनसभाओं की अनुमति देने के संदर्भ में चुनाव आयोग के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि आयोग के लोगों पर ‘हत्या का मामला’ चलना चाहिए. चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आयोग ने मद्रास हाईकोर्ट की ओर से की गई मौखिक टिप्पणियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. उन्होंने कहा कि इन मौखिक टिप्पणियों के आधार पर लोग चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर सकते हैं.

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क्या आयोग में सर्वसम्मति थी?
इस अधिकारी ने इसका उल्लेख किया कि मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ पश्चिम बंगाल में एक मामला भी दर्ज करा दिया गया. यह पूछे जाने पर कि क्या मौखिक टिप्पणियों की रिपोर्टिंग से मीडिया को रोकने के लिए मद्रास हाईकोर्ट का रुख करने को लेकर आयोग में सर्वसम्मति थी तो एक अन्य अधिकारी ने एक बयान के उस हिस्से का हवाला दिया जिसमें कहा गया था, ‘किसी भी फैसले से पहले आयोग में उचित विचार-विमर्श होता है.’

आयोग ने एक बयान में कहा कि इसको लेकर सर्वसम्मति थी कि सुप्रीमकोर्ट के समक्ष मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने को लेकर कोई गुहार नहीं लगाई जाएगी.

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