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इन पांच वजहों के चलते बढ़ाई जा सकती है रिटायरमेंट की उम्र

News18Hindi
Updated: July 4, 2019, 9:59 PM IST
इन पांच वजहों के चलते बढ़ाई जा सकती है रिटायरमेंट की उम्र
आर्थिक सर्वेक्षण में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाए जाने के संकेत दिए गए हैं (न्यूज 18 क्रिएटिव)

इस सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि 2021-31 के बीच जनसंख्या 1% से कम वृद्धि दर से बढ़ेगी और 2031-41 के बीच जनसंख्या 0.5% से कम वृद्धि दर से बढ़ेगी.

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भारत के आर्थिक सर्वेक्षण-2109 में कहा गया है कि लोगों की बढ़ती उम्र के चलते रिटायरमेंट की उम्र भी बढ़ाई जानी चाहिए. आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि अगले दो दशकों में जनसंख्या वृद्धि में कमी आएगी. इस सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया है कि 2021-31 के बीच जनसंख्या 1% से कम वृद्धि दर से बढ़ेगी और 2031-41 के बीच जनसंख्या 0.5% से कम वृद्धि दर से बढ़ेगी.

आर्थिक सर्वेक्षण-2019 में कहा गया है कि भारत की जनसंख्या के 2031-41 के बीच 0.5% की दर से बढ़ने की उम्मीद है. जिसका मतलब होगा कि उस समय तक भारत में जन्म दर बहुत कम हो जाएगी और लोगों की औसत उम्र बहुत बढ़ जाएगी. रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसे में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ना भी लगभग तय है.

पेंशन और रिटायरमेंट की प्लानिंग में काम आएंगे ये आंकड़े
सर्वे में कहा गया है कि चूंकि रिटायरमेंट की उम्र में बढ़ोत्तरी लगभग तय है. ऐसे में पहले से ही इसके संकेत दे देना उपयुक्त होगा. बल्कि एक दशक पहले ही इसके संकेत दे दिए जाने चाहिए ताकि नौकरियां करने वाले तैयार रहें.

इस सर्वेक्षण में कहा गया है कि लोगों की औसत आयु बढ़ने की दशा में पहले से ही पेंशन और रिटायरमेंट के लिए प्लानिंग करना योजनाएं बनाने वालों के लिए मददगार होगा.

भारत के कई राज्यों में तेजी से गिरी जन्मदर
इसमें यह भी कहा गया है, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों में जनसंख्या वृद्धि में बढ़त बंद हो चुकी है. बल्कि इन देशों में जनसंख्या वृद्धि नकारात्मक हो चुकी है.
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सर्वे में यह भी कहा गया है कि यह पहले ही दिल्ली, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, पंजाब और हिमाचल प्रदेश में जन्मदर 1.6-1.7% पर पहुंच चुकी है. जबकि ज्यादा जन्मदर वाले राज्यों में यूपी, एमपी और उत्तराखंड में भी जन्मदर में तेज गिरावट देखी गई है. ऐसे में रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाकर न सिर्फ कामकाजी लोगों की जरूरत पूरी की जा सकेगी बल्कि जनसंख्या को आर्थिक मदद भी मिलेगी.

धीरे-धीरे कम होगी रोजगार खोजने वालों की संख्या
सर्वे में यह भी इशारा किया गया है कि भारत जनसंख्या वृद्धि के अगले चरण में प्रवेश कर चुका है. ऐसे में देश के कई सारे राज्यों में 2030 तक उम्रदराज नागरिकों की जनसंख्या बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी. एक चौंकाने वाली बात यह भी है कि 0-19 की उम्र वाले ब्रैकेट में तेज गिरावट देखी जा रही है.

इसे ध्यान में रखते हुए 2041 तक भारत की रोजगार में जुटी जनता के लगातार बढ़ते जाने की उम्मीद है. 2021 से 2031 के बीच 10 करोड़ बढ़ने और 2031 से 2041 के बीच करीब 4 करोड़ लोगों के रोजगार में आने की उम्मीद है. इससे अभी जो नौकरियों की बढ़ोत्तरी की दर है उसके आगे कम होने के आसार हैं. लेकिन लोगों को बढ़ती उम्र में अपने ही स्वास्थ्य की देख-रेख के लिए ज्यादा उम्र तक काम करना होगा.

प्राइमरी स्कूलों में दाखिल होने वाले बच्चे भी होंगे कम
इसमें यह भी कहा गया है कि इसका असर शिक्षा पर भी पड़ेगा. जैसे जो बच्चे प्राइमरी स्कूल जाते हैं, उनकी संख्या में भी बदलाव आएगा. इसमें कहा गया है कि 2021 से 2041 के बीच स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या में 18.4% की कमी आ जाएगी. इसके बहुत ही महत्वपूर्ण सामाजिक और आर्थिक परिणाम होंगे. इसमें कहा गया है कि ऐसे में ज्यादा स्कूल बनाने के बजाए राज्यों को हालिया स्कूलों में शिक्षा की स्थिति को सुधारने पर ज्यादा जोर देना चाहिए. साथ ही बच्चों के बढ़ते पढ़ाई के खर्च के चलते पैसों की ज्यादा जरूरत होगी.

अन्य कई कारण भी होंगे रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने की वजह
नए आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है, यह महत्वपूर्ण है कि नए तथ्यों की रौशनी में नए तरीके से अनुमान और लक्ष्य तय किए जाएं. खासकर इसमें लोगों के बारे में बड़े स्तर पर मौजूद आंकड़ों की मदद ली जाए. शहरीकरण, ऊर्जा की जरूरतें, जंगल, पानी की उपलब्धता, पर्यावरण में परिवर्तन और दूसरे लंबे वक्त के लिए प्रभावी रहने वाले सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का जनसंख्या और रिटायरमेंट की उम्र पर गहरा प्रभाव पड़ेगा.

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First published: July 4, 2019, 9:16 PM IST
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