अर्थशास्त्री रघुराम राजन, अमर्त्य सेन और अभिजीत बनर्जी ने सरकार को दिए 10 सुझाव

अर्थशास्त्री रघुराम राजन, अमर्त्य सेन और अभिजीत बनर्जी ने सरकार को दिए 10 सुझाव
लॉकडाउन की वजह से भारत को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. (फाइल फोटो)

तीनों अर्थशास्त्रियों का मानना है कि लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से भारतीय अर्थव्यस्था को भारी नुकसान हुआ है ऐसे में आमदनी और नौकरियों पर संकट गहरा गया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 17, 2020, 7:18 AM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (CoronaVirus) की जंग जीतने के दुनियाभर के देशों ने लॉकडाउन (Lockdown) किया हुआ है. भारत (India) में भी पिछले 24 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन है. ऐसे में स्कूल कॉलेज, बाजार, कारखाने और सरकारी कार्यालय पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं. लॉकडाउन की वजह से भारत को अब तक 8 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है. लॉकडाउन की वजह से गिरती भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) को रफ्तार ​देने के लिए तीन बड़े अर्थशास्त्री आरबीआई के पूर्व गवर्न्रर रघुराम राजन (Raghuram Rajan), नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन (Amartya Sen) और नोबेल विजेता अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee)सरकार को कुछ सुझाव दिए है.

तीनों दिग्गज अर्थशास्त्रियों ने मिलकर 'द इंडियन एक्सप्रेस' में एक लेख लिखा है. तीनों अर्थशास्त्रियों का मानना है कि लॉकडाउन की वजह से भारतीय अर्थव्यस्था को भारी नुकसान हुआ है ऐसे में आमदनी और नौकरियों पर संकट गहरा गया है. इसके साथ ही उन्होंने सरकार को कुछ सुझाव भी दिए हैं.

1. भारतीय अर्थव्यस्था को भारी नुकसान से बचाने के लिए सरकार को काफी सोच समझकर खर्च करना चाहिए और उन्हें जगह पर पैसे लगाने चाहिए जहां इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है. हालांकि, ये भी कहा गया है कि ऐसे में समय में उन लोगों की मदद में कटौती बिल्कुल नहीं की जानी चाहिए, जिन्हें मदद की सबसे ज्यादा जरूरत है.



2. लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों को पड़ा है और लोगों की रोजी रोटी का संकट आ गया है. लॉकडाउन में सबकुछ बंद होने के कारण बेरोजगारी की समस्या बढ़ती जा रही है. ऐसे में डिलीवरी सिस्टम में बदलाव किया जाना चाहिए. देश में जिस तरह से लॉकडाउन तोड़ने के मामले सामने आए हैं ऐसे में मजदूरों की बुनियादी जरूरतों को ध्यान में रखकर जल्द से जल्द कोई कदम उठाना चाहिए.
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लॉकडाउन से सबसे ज्यादा नुकसान दिहाड़ी मजदूरों को हुआ है.


3. फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के स्टॉक्स भरे पड़े हैं. मार्च 2020 की रिपोर्ट बताती है कि फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के पास 7 करोड़ टन का स्टॉक है. बफर स्टॉक की तुलना में ये तीन गुना है, ऐसे में सरकार को चाहिए कि वह इन स्टॉक का इस्तेमाल गरीबों तक जल्द से जल्द पहुंचाने की योजना बनाए.

4. सरकार को इस बात की भनक लग चुकी है कि लॉकडाउन का सबसे ज्यादा खतर कृषि बाजार को उठाना पड़ सकता है. ऐसे में सरकार किसानों के अनाज को खरीदने के लिए लगातार जरूरी कदम उठा रही है, लेकिन नेशनल इमरजेंसी के इस दौर में पुराने स्टॉक को निकालना भी बेहद जरूरी काम है.

5. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार ने गरीबों को अगले 3 महीने तक 5 किलो अनाज देने का फैसला किया है. यह सरकार की ओर से उठाया गया सराहनीय कदम है लेकिन देश की स्थिति को देखते हुए इसे 6 माह किया जाना चाहिए.

6. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सरकार गरीबों की मदद के लिए अनाज और कैश वितरण का काम जनधन खाते या फिर राशन कार्ड की मदद से कर रही है लेकिन सरकार से इससे अलग भी कुछ सोचना होगा. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अभी भी बहुत से परिवार ऐसे हैं जिनका राशन कार्ड और जनधन खाता नहीं है ऐसे में उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है. उन्होंने इसके लिए झारखंड का उदाहरण दिया है, जहां बड़े पैमाने पर राशन कार्ड पेंडिंग पड़े हैं.

7. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि स्कूल बंद हो जाने के कारण बच्चों को स्कूल में मिलने वाला मील उन्हें नहीं मिल पा रहा है. ऐसे में सरकार को बच्चों का मील उनके घर पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों के लिए पब्लिक कैंटीन की व्यवस्था होनी चाहिए और इसके लिए सरकार को एनजीओ की मदद लेनी चाहिए.

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भारत में पिछले 24 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन है.


8. सरकार को उन गरीबों तक कैश पहुंचाने की तुरंत व्यवस्था करनी चाहिए जहां लॉकडाउन खुलने के बाद भी दिक्कत बनी रहेगी. उन्होंने कहा कि अभी सरकार जितना रुपये दे रही है एक परिवार के लिए काफी नहीं है. उन्होंने कहा ​कि किसानों की तरह ही मजदूरों को भी कैश का लाभ मिलना चाहिए.

9. अर्थशास्त्रियों का कहना है कि रवि की फसल तैयार हो चुकी है. ऐसे में सरकार को खरीदारी के बारे में फैसला लेना होगा. इसके बाद किसानों को अगली फसल के लिए पैसे और खाद की जरूरत होगी. सरकार को किसानों की इन दिक्कतों के बारे में भी सोचना होगा. ​देश में काफी लोग लोन लेते हैं. ऐसे में वह लोन कैसे चुकाएंगे इसके बारे में भी योजना बनाए जाने की जरूरत है.

10. अर्थशास्त्रियों ने कहा कि केंद्र से राज्यों को दिया जाने वाल फंड समय पर दिया जाना चाहिए. फंड मिलने के साथ ही राज्यों को भी अपने स्तर पर प्लान तैयार कर गरीबों की मदद करनी चाहिए. कुछ उद्योगों को वापस उठने में अब सरकार की जरूरत होगी ऐसे में सरकार को ऐसे उद्योगों पर ध्यान देना होगा.

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