अगस्ता वेस्टलैंड घोटालाः आरोपी राजीव सक्सेना की 385 करोड़ की संपत्ति ईडी ने की कुर्क

अगस्ता वेस्टलैंड घोटालाः आरोपी राजीव सक्सेना की 385 करोड़ की संपत्ति ईडी ने की कुर्क
राजीव सक्सेना को प्रत्यर्पित कर 31 जनवरी 2019 को भारत लाया गया था.

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोपी राजीव सक्सेना (Rajiv Saxena) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 (पीएमएलए) के तहत 50.90 मिलियन यूएसडी (385.44 करोड़ रुपय के बराबर) संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किए हैं.

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नई दिल्ली. अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले (Agusta Westland) और मोजर बेयर बैंक फ्रॉड केस (Moser Baer Bank Fraud case) में  प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने आरोपी राजीव सक्सेना (Rajiv Saxena) के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट 2002 (पीएमएलए) के तहत 50.90 मिलियन यूएसडी (385.44 करोड़ रुपय के बराबर) संपत्ति कुर्क करने के आदेश जारी किए हैं. ईडी ने एक बयान में कहा, 'कुर्क संपत्तियों में पाम जुमीराह, दुबई स्थित एक विला, जिसका मूल्य दो करोड़ अरब अमीरात दिरहम है और 4.555 करोड़ डॉलर के पांच स्विस बैंक खाते शामिल हैं.'

2019 में हुई थी गिरफ्तारी
अभियुक्त राजीव सक्सेना को अगस्ता वेस्टलैंड वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर (Augusta Westland Chopper) घोटाले से जुड़े धन शोधन (Money Laundering) मामले के बिचौलिया बनने के लिए  प्रत्यर्पित कर 31 जनवरी 2019 को भारत लाया गया था जिसके बाद ईडी ने राजीव को 31 जनवरी 2019 की सुबह गिरफ्तार किया था.

यह कुर्की धनशोधन के दो मामलों से जुड़ी है जो 3,600 करोड़ रुपये के वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले और मोजर बेयर बैंक धोखाधड़ी मामले से संबंधित हैं जिसमें प्रमुख आरोपियों में कंपनी के प्रमोटर, कारोबारी रतुल पुरी और उसके पिता दीपक पुरी शामिल हैं. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी भी वीवीआईपी हेलीकॉप्टर मामले में आरोपी हैं.



पीएमएलए के तहत जांच में पता चला है कि आरोपी राजीव सक्सेना एक हवाला ऑपरेटर और आवास प्रविष्टि प्रदाता है, जो मैट्रिक्स समूह की कंपनियों के रूप में जानी वाली कई कंपनियों के जरिए दुबई में एकोमेटेशन एंट्री बिजनेस चलाता है. राजीव सक्सेना ने अगस्ता वेस्टलैंड मामले में अभियुक्तों द्वारा किए गए अपराध की कार्यवाही को रोकने या मोजर बेयर इंडिया लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों को दिए गए ऋणों की गलत व्याख्या करके बैंकों को ठगने के लिए संरचनाओं का निर्माण किया था.



14 फरवरी 2019 को मिली थी अंतरिम जमानत
राजीव सक्सेना को कोर्ट ने 14 फरवरी 2019 को अंतरिम जमानत दी थी. उसके बाद कोर्ट ने 25 फरवरी को राजीव सक्सेना को नियमित जमानत दी थी. उसके बाद 25 मार्च 2019 को कोर्ट ने राजीव सक्सेना को सरकारी गवाह बनने की अनुमति दे दी.

सुनवाई के दौरान ईडी ने कहा था कि राजीव सक्सेना को सरकारी गवाह बनने की अनुमति देने के बावजूद उसने अपराध से संबंधित सभी बातों का खुलासा नहीं किया. ईडी ने बताया था कि 15 अप्रैल 2019 से लेकर 12 जुलाई 2019 तक के बीच समन जारी करने के बावजूद 25 बार राजीव सक्सेना ने जांच में सहयोग नहीं किया. यहां तक कि ईडी को बिना बताए ही वह मुंबई चला गया. जब ईडी ने उससे संपर्क किया तो उसने अपने स्वास्थ्य का हवाला दिया.

First published: May 29, 2020, 7:41 PM IST
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