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INX मीडिया घोटाला: 24 अक्टूबर तक ED की कस्टडी में रहेंगे चिदंबरम, लॉकअप में गुजारेंगे रातें

पी चिदंबरम को तिहाड़ जेल के बाद अब तुगलक थाना रोड लॉकअप में रात गुजारनी होंगी.

पी चिदंबरम को तिहाड़ जेल के बाद अब तुगलक थाना रोड लॉकअप में रात गुजारनी होंगी.

विशेष न्यायाधीश अजय कुमार कुहाड़ ने ईडी (ED) को पी चिदंबरम (P. Chidambaram) से पूछताछ की इजाजत दे दी है और साथ ही चिदंबरम को ईडी की हिरासत के दौरान घर के बने खाने, पश्चिमी शौचालय और दवाओं के इस्तेमाल की अनुमति दी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 17, 2019, 10:32 PM IST
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नई दिल्ली. आईएनएक्स मीडिया घोटाले (INX Media Scam) में आरोपी पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम (P Chidambaram) को राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के तुगलक रोड थाने के लॉकअप में सात रातें गुजारनी होंगी. दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को 24 अक्टूबर तक ईडी की हिरासत में पूछताछ के लिए भेज दिया है. ऐसे में चिदंबरम का दिन का वक्त कटेगा ED मुख्यालय में कटेगा जबकि रात तुगलक रोड थाने में बीतेगी.

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और UPA सरकार के वक्त देश के गृहमंत्री और वित्तमंत्री रहे पी. चिदंबरम को अब सीबीआई के बाद ED की टीम ने गिरफ्तार करने के बाद गुरुवार को राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया. कोर्ट में सुनवाई के बाद ED को सात दिनों की रिमांड मिल गयी. अब ED की टीम चिदंबरम से सात दिनों तक पूछताछ करेगी, लेकिन इन सात दिनों के दौरान दिन के वक्त पी चिदंबरमसे ED मुख्यालय में पूछताछ होगी. लेकिन रात के वक्त उनको ED मुख्यालय में न रखकर पास में ही स्थित तुगलक रोड थाने के लॉकअप में रात गुजारनी होगी.

ऐसा इसलिए क्योंकि ED मुख्यालय में कोई भी लॉकअप की सुविधा नहीं है. ऐसे में ED के अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए किसी भी आरोपी को रात के वक्त में इसी थाना के लॉकउप में रखते हैं. हालांकि कोर्ट से पी चिदंबरम के वकील के आग्रह पर कोर्ट ने पी चिदंबरम को उनके घर का बना हुआ खाना और दवाइयों को उपलब्ध कराने का निर्देश दे दिया है.



क्यों प्रवर्तन निदेशालय से डरते हैं आरोपी नेता?
जब भी ईडी किसी आरोपी को हिरासत में लेती है या गिरफ्तार करती है तो उससे कई घंटों तक पूछताछ की जाती है. जब उस दिन की पूछताछ की प्रकिया पूरी हो जाती है तो आरोपी का मेडिकल जांच स्थानीय सरकारी अस्पताल में करवाया जाता है, उसके बाद उसे स्थानीय थाना के अंतर्गत लॉकअप में भेजवा दिया जाता है. आरोपी को उस थाने के लॉकअप में रात गुजारना पड़ता है. वहीं बात की जाए ईडी मुख्यालय की तो यह दिल्ली के खान मार्केट इलाके में लोक नायक भवन में स्थित है.

मुख्यालय में कोई भी लॉकअप नहीं है. जिसके चलते किसी भी आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद उसका आरएमएल अस्पताल या एम्स अस्पताल में मेडिकल जांच करवाने के बाद उसे सुरक्षा व्यवस्था के साथ तुगलक रोड थाना के लॉकअप में भेज दिया जाता है.

लॉकअप में रात गुजारना बुरे दौर की बात
ईडी का एक और दफ्तर रामलीला ग्राउंड के पास एमटीएनएल बिल्डिंग के अंदर है. ईडी के सूत्रों के मुताबिक अगर उस दफ्तर में पूछताछ और गिरफ्तारी होती है तो आरोपी तो मेडिकल जांच करवाने के बाद उसे कमला मार्केट थाना के लॉकअप में भेज दिया जाता है.

लॉकअप में रात गुजारना बेहद बुरे दौर से गुजारने वाली बात मानी जा सकती है. बड़े-बड़े राजनेताओं और अन्य हस्तियों को ये सबसे नागवार गुजरता है. इसलिए वो ईडी की कस्टडी में जाने से बचते हैं. क्योंकि जब तक आरोपी हिरासत में है तब तक उसे लॉकअप में ही रात गुजारनी होगी.

सीबीआई मुख्यालय और एनआईए का लॉकअप
केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई और एनआईए जांच एजेंसी का अपना लॉकअप रूम है. जो काफी आधुनिक तरीके से बना हुआ है. लॉकअप में एयर कंडिशनर की पूरी व्यवस्था है. जिससे उस लॉकअप रूम में रात गुजारना बहुत मुश्किल भरा नहीं होता. लेकिन ईडी के पास अपनी बिल्डिंग नहीं है. लोक नायक भवन में ईडी के पास दो फ्लोर हैं बाकी के फ्लोर पर कई अन्य विभागों के दफ्तर हैं. इसलिए यहां आधुनिक लॉकअप नहीं बन पाया है. हालांकि कई बार ईडी को नए भवन देने की बात हुई लेकिन अभी तक ऐसा हो नहीं पाया है.

ईडी की हिरासत में रह चुके हैं ये नेता
केन्द्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी पिछले चार सालों के अंदर काफी सुर्खियों में है. क्योंकि पिछले चार सालों के अंदर ईडी ने कई बड़े मामलों की तफ्तीश के दौरान कई बड़े राजनीतिक हस्तियों, हवाला कारोबारियों, नक्सली और गैंगस्टर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए उसे सलाखों के पीछे भेज दिया. इसके अलावा आरोपी द्वारा गलत तरीके से अर्जित संपत्तियों को मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उसके खिलाफ उसके चल और अचल संपत्तियों को अटैच कर लिया गया.

फिर वह चाहें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव हों, सांसद कार्ति चितंबरम हों, सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा हों, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा हों, झारखंड के पुर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा हों, विजय माल्या हों, नीरव मोदी हों, हवाला कारोबारी जहूर वटाली जैसे दर्जनों के खिलाफ पिछले चार सालों के अंदर बडी कार्रवाई हुई है.

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