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Bank Scam: 19 बैंकों को कंपनी ने लगाई 2,654 करोड़ की चपत, ईडी ने शुरू की कार्रवाई

Bank Scam: 19 बैंकों को कंपनी ने लगाई 2,654 करोड़ की चपत, ईडी ने शुरू की कार्रवाई

कंपनी को लोन देने के मामले में साल 2008 में जो बैंकों के समूह के गठन के वक्त एक्सिस बैंक मियादी ऋण देने के लिए अग्रणी बैंक था. (फाइल फोटो)

कंपनी को लोन देने के मामले में साल 2008 में जो बैंकों के समूह के गठन के वक्त एक्सिस बैंक मियादी ऋण देने के लिए अग्रणी बैंक था. (फाइल फोटो)

साल 2018 मई में जांच अनेंसी सीबीआई (Central Bureau of Investigation) की गांधीनगर ब्रांच ने गुजरात की कंपनी मेसर्स डायमंड पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ बैंक लोन और भ्रष्ट्राचार से जुड़े मामले में (bank fraud case) एफआईआर दर्ज किया था. बाद में उसी मामले को ईडी ने टेकओवर किया था, ईडी के मुताबिक ये कंपनी बिजली केबल और उपकरणों का कारोबार करती है

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नई दिल्ली: 19 बैंकों से करीब 2,654 करोड़ के बैंक लोन घोटाला मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorat) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए गुजरात की कंपनी मेसर्स डायमंड पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (M/s. Diamond Power Infrastructure Ltd. (DPIL) की करीब 26.25 करोड़ रुपये की कई प्रोपर्टी को अटेचमेंट कर लिया है, अब जल्द इस कंपनी के खिलाफ और भी कई कार्रवाई की जाएगी. डीपीआईएल कम्पनी में मुख्य प्रमोटर सुरेश नारायण भटनागर, उनके बेटे अमित भटनागर और सुमित भटनागर हैं .

ईडी के अधिकारियों के मुताबिक गुजरात स्थित बड़ोदरा की ये कंपनी है  जिसके खिलाफ कुछ समय पहले केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI ) ने मामला दर्ज किया था. उसी मामले को आधार बनाते हुए बाद में ईडी ने भी इस मामले को दर्ज (ED initiated money laundering investigation) किया था. तफ्तीश के दौरान मिले सबूतों और गवाहों और आरोपियों के बयान के बाद ईडी ने कार्रवाई करते हुए फिलहाल 26.25 करोड़ की संपत्ति जिसमें कई जमीन, आवासीय प्रोपर्टी , व्यवसायिक प्रोपर्टी ( land, residential and commercial properties) को अटैचमेंट किया गया है.

सीबीआई के बाद ईडी ने की है ये कार्रवाई
साल 2018 मई में जांच अनेंसी सीबीआई (Central Bureau of Investigation) की गांधीनगर ब्रांच ने गुजरात की कंपनी मेसर्स डायमंड पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ बैंक लोन और भ्रष्ट्राचार से जुड़े मामले में (bank fraud case) एफआईआर दर्ज किया था. बाद में उसी मामले को ईडी ने टेकओवर किया था. ईडी के मुताबिक ये कंपनी बिजली केबल और उपकरणों का कारोबार करती है और अपने इसी कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए साल 2008 से लेकर 29 जून 2016 तक कुल 19 बैंकों से (consortium of 19 bank ) ये करीब 2,654 करोड़ के बैंक लोन लिया गया था, लेकिन बाद में उन पैसों को दूसरे अन्य प्रोजेक्ट में निवेश कर दिया गया.

लोन वाले पैसों को ट्रांसफर करने के लिए कई शैल कंपनियों यानी मुखौटे वाली कंपनियों (paper transactions with shell companies) का प्रयोग करके मनी लॉन्ड्रिंग की गई , जिसके वजह से बाद में इस कंपनी ने अपना नुकसान दिखाकर उन 19 बैंकों के पैसों का नुकसान पहुंचाया.

इस मामले की तफ़्तीश करने के बाद ईडी ने 26 दिसंबर 2018 को अहमदाबाद स्थित ईडी की विशेष कोर्ट में आरोपपत्र (prosecution complaint) यानी चार्जशीट दायर किया. दायर आरोपपत्र में इस बात का जिक्र है कि इस कंपनी द्वारा साल 2016 -17 में अपने आप को कर्ज की वजह से दिवालिया घोषित कर दिया, जबकि इस कम्पनी के निदेशकों द्वारा उस लोन वाले रकम को शैल कंपनियों द्वारा अन्य प्रोजेक्ट्स में निवेश किया गया. इस कंपनी को लोन देने के मामले में साल 2008 में जो बैंकों के समूह के गठन के वक्त एक्सिस बैंक (Axis Bank ) मियादी ऋण देने के लिए अग्रणी बैंक था ,जबकि बैंक ऑफ इंडिया नकदी ऋण सीमा के लिए अग्रणी बैंक था.

 इन बैंकों को लगाया गया था चूना
सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के मुताबिक गुजरात की इस कंपनी के द्वारा इन 19 बैंकों को चूना लगाया गया था ,जो प्रमुख तौर पर इस प्रकार से हैं- बैंक ऑफ इंडिया( BOI ), देना बैंक (Dena Bank ), ICICI बैंक, बैंक ऑफ बड़ोदा (BOB ), एक्सिस बैंक ( Axis Bank ), इलाहाबाद बैंक (Allahabad BANK ) , टाटा कैपिटल फाइनेंस सर्विस लिमिटेड, कॉर्पोरेशन बैंक ( Corporation Bank ), बैंक ऑफ महाराष्ट्र .

Tags: Enforcement directorate, Scam

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