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जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं चिदंबरम, हिरासत में लेकर पूछताछ की जरूरत: ED

पी. चिदंबरम
पी. चिदंबरम

चिदंबरम द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर अपने जवाब में प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि उनका रवैया टालमटोल वाला रहा है और वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 31, 2018, 5:30 PM IST
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एयरसेल-मैक्सिस धन शोधन मामले में दिल्ली की एक अदालत में पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता पी चिदंबरम द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका का प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को विरोध किया और उनसे हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग की.

चिदंबरम द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर अपने जवाब में प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि उनका रवैया टालमटोल वाला रहा है और वह जांच में सहयोग नहीं कर रहे थे. चिदंबरम की याचिका पर विशेष न्यायाधीश ओ पी सैनी की अदालत में बृहस्पतिवार को सुनवाई होगी.

सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर एयरसेल-मैक्सिस मामले में अदालत ने आठ अक्टूबर को चिदंबरम और उनके बेटे कार्ती को राहत देते हुए गिरफ्तारी से एक नवंबर तक अंतरिम संरक्षण दिया था. चिदंबरम ने निदेशालय के मामले में गिरफ्तारी से बचने के लिये इस साल 30 मई को अदालत में याचिका दायर कर संरक्षण की मांग की थी जिसमें उन्हें समय-समय पर राहत मिलती रही है.



क्या है एयरसेल मैक्सिस केस?
यह केस फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) से जुड़ा है. 2006 में एयरसेल-मैक्सिस डील को पी चिदंबरम ने बतौर वित्त मंत्री ने मंजूरी दी थी. पी चिदंबरम पर आरोप है कि उनके पास 600 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्‍ट प्रपोजल्‍स को ही मंजूरी देने का अधिकार था. इससे बड़े प्रोजेक्ट को मंजूरी देने के लिए उन्हें आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी लेनी जरूरी थी. एयरसेल-मैक्सिस डील केस 3500 करोड़ की एफडीआई की मंजूरी का था. इसके बावजूद एयरसेल-मैक्सिस एफडीआई मामले में चिदंबरम ने कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की मंजूरी के बिना मंजूरी दी गई.

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