आतंकवाद के 30 साल पुराने मामले में पुलिस ने संपादक को किया गिरफ्तार, कुछ ही देर में मिली जमानत

कश्मीर एडिटर्स गिल्ड ने बयान जारी कर कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संपादक को जमानत देने के बाद पुलिस को यह बताने के लिए कहा कि उसने पिछले तीन दशकों में केस की जांच कैसे की.

News18Hindi
Updated: June 25, 2019, 11:25 PM IST
आतंकवाद के 30 साल पुराने मामले में पुलिस ने संपादक को किया गिरफ्तार, कुछ ही देर में मिली जमानत
जम्मू कश्मीर में लगभग तीन-दशक पुराने मामले में गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों के अंदर वरिष्ठ संपादक को मिली जमानत. (सांकेतिक तस्वीर)
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Updated: June 25, 2019, 11:25 PM IST
जम्मू कश्मीर में लगभग तीन-दशक पुराने मामले में गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों के अंदर एक वरिष्ठ संपादक को स्थानीय अदालत से जमानत मिलने के बाद मंगलवार को पुलिस को शर्मसार होना पड़ा. अधिकारी ने बताया कि उर्दू दैनिक 'डेली अफाक' के संपादक गुलाम जिलानी कादरी को सोमवार की देर रात 1990 में दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया गया. यह मामला आतंकवादी और विघटनकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) की धारा तीन के तहत दर्ज किया गया था.

तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी की ओर से 15 अक्टूबर 1992 में जारी गैर जमानती वारंट के आधार पर गिरफ्तार किया गया है. जिस कानून के तहत कादरी को गिरफ्तार किया गया है, वह सरकार द्वारा स्थापित कानून के तहत लोगों या किसी भी वर्ग के लोगों में आतंक फैलाने, लोगों के बीच विभाजन करने या विभिन्न वर्गों के बीच सौहार्द एवं भाईचारे को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने के इरादे से कोई भी कार्य या बात करते हैं.

1990 का है मामला

यह मामला 1990 में आतंकी संगठनों के समाचारों के प्रकाशन से संबंधित है. कश्मीर एडिटर्स गिल्ड एवं कश्मीर यूनियन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट सहित विभिन्न पत्रकार संगठन कादरी के समर्थन में आए और यहां मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में इस गिरफ्तारी का विरोध किया. कश्मीर एडिटर्स गिल्ड ने बयान जारी कर कहा कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने संपादक को जमानत देने के बाद पुलिस को यह बताने के लिए कहा कि उसने पिछले तीन दशकों में केस की जांच कैसे की. कादरी के परिजनों ने बताया कि उन्हें बालगार्डन इलाके में स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है.

पत्रकार संगठनों ने किया निंदा

इससे पहले कश्मीर यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट समेत विभिन्न पत्रकार संगठनों ने कादरी की आधी रात में की गई गिरफ्तारी की निंदा की. संगठन ने आरोप लगाया है कि ऐसा लगता है, सरकार के इस कदम का उद्देश्य स्थानीय प्रेस की आवाज को दबाना है.

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