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effect of corona epidemic on students studies more than 40 percent students of primary classes of odisha failed to pass baseline test

40% छात्रों के हिंदी, इंग्लिश में 20 फीसद से कम नंबर आए, ओडिशा में ऑनलाइन क्लास की स्थिति

ओडिशा के छात्रों का हुआ आधारभूत मूल्यांकन (फोटो आभार twitter)

ओडिशा के छात्रों का हुआ आधारभूत मूल्यांकन (फोटो आभार twitter)

कक्षा 8 के छात्रों के लिए 27 से 29 नवंबर के बीच उड़िया, गणित और अंग्रेजी में आधारभूत मूल्यांकन किया गया था. इसी तरह, कक्षा 6 और 7 के छात्रों ने 22 से 24 नवंबर के बीच परीक्षा दी, जबकि कक्षा 1-5 के छात्रों ने 9 से 11 मार्च के बीच परीक्षा दी. प्रश्न पिछली कक्षाओं की पढ़ाई पर आधारित थे.

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    कोरोना महामारी की वजह से तमाम स्कूल तकरीबन 2 साल बाद खुल गए हैं. लॉकडाउन में छात्रों की पढ़ाई पर असर पड़ा है. कुछ दिन पहले एक रिसर्च में यह बात सामने आई थी कि खास तौर पर छोटे बच्चें, जो लॉकडाउन से पहले जिन विषयों को जानते थे, वे उन्हें भूल चुके थे. हाल ही में ओडिशा के उच्च प्राथमिक कक्षाओं का परीक्षा लिया गया, जिसमें हैरान करने वाले परिणाम सामने आए हैं. अधिकारियों के मुताबिक, इन कक्षाओं के 40 फीसदी से अधिक छात्रों को ओडिया भाषा, गणित और अंग्रेजी में 20 फीसदी से भी कम अंक प्राप्त हुए.

    मार्च 2020 से स्कूल बंद होने के बाद पिछले साल 25 अक्टूबर से ओडिशा में कक्षा 8 के छात्रों के लिए स्कूल खोले गए थे. कक्षा 6 और 7 के छात्रों के ले 15 नवंबर और कक्षा 1-5 के लिए ऑफलाइन क्लास की शुरुआत 3 जनवरी से हुई. स्कूल और जन शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि कक्षाओं में लौटने के बाद छात्रों के सीखने के नुकसान का आकलन करने के लिए, ओडिशा स्कूल शिक्षा कार्यक्रम प्राधिकरण ने तीन चरणों में कक्षा 1-8 के लिए छात्रों का आधारभूत मूल्यांकन करने का निर्णय लिया.

    छात्रों का आकलन

    हिन्दूस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक,  कक्षा 8 के छात्रों के लिए 27 से 29 नवंबर के बीच उड़िया, गणित और अंग्रेजी में आधारभूत मूल्यांकन किया गया था, जिसमें छात्रों को प्रत्येक विषय में 50 अंकों के साथ परीक्षा में बैठने के लिए कहा गया था. इसी तरह, कक्षा 6 और 7 के छात्रों ने 22 से 24 नवंबर के बीच परीक्षा दी, जबकि कक्षा 1-5 के छात्रों ने 9 से 11 मार्च के बीच परीक्षा दी. प्रश्न पिछली कक्षाओं की पढ़ाई पर आधारित थे. हालांकि 90 प्रतिशत से अधिक छात्रों ने मूल्यांकन परीक्षणों को लिखा, लेकिन ओएसईपीए के अधिकारी अनुमानित संख्या नहीं बता सके.

    ओएसईपीए के अधिकारियों ने कहा कि बेसलाइन आकलन के परिणामों से पता चला है कि कक्षा 6 में 42.40% छात्रों ने गणित में 20% से कम अंक प्राप्त किए, जबकि 40.53% छात्रों ने अंग्रेजी में समान अंक प्राप्त किए. इसी तरह, 44% कक्षा 7 के छात्रों ने उड़िया भाषा में 20% से कम अंक प्राप्त किए, जबकि 43% छात्रों ने गणित में 20% से कम अंक प्राप्त किए. कक्षा 7 के लगभग 42% छात्रों ने अंग्रेजी में 20% से कम अंक प्राप्त किए.

    कक्षा 8 के छात्रों में, लगभग 35% छात्रों ने उड़िया भाषा में 20% से कम अंक प्राप्त किए, जबकि गणित में 20% से कम अंक प्राप्त करने वाले छात्रों का प्रतिशत 40% था. अंग्रेजी में, कक्षा 8 के 42.50% छात्रों ने 20% से कम अंक प्राप्त किए। कक्षा 1 के लगभग एक-तिहाई छात्रों ने उड़िया भाषा में 50% से कम अंक प्राप्त किए, जबकि कक्षा 2 के 32% छात्रों ने 33% से कम अंक प्राप्त किए.

    ओडिशा के स्कूलों में अंतिम आधारभूत आकलन 2019 में कोविड-19 के देश में आने से पहले किया गया था लेकिन अधिकारी यह नहीं बता सके कि महामारी से पहले कक्षा 1-8 में सीखने का स्तर क्या था. 2018 में एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट (एएसईआर) (ग्रामीण) में पाया गया था कि कक्षा V के 33.1% छात्र 10 से 99 के बीच की संख्या को पहचान सकते हैं जबकि 24.5% छात्र घटाव कर सकते हैं.

    ध्यान देने की जरूरत

    ऑल ओडिशा सेकेंडरी स्कूल टीचर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बिनोद बिहारी पाणिग्रही ने कहा कि आधारभूत मूल्यांकन सरकारी स्तर पर इस तरह का पहला आकलन है, जो कोविड -19 महामारी के कारण हुई सीखने की हानि को मापने के लिए है. पाणिग्रही ने कहा, “हालांकि कुल आंकड़े बहुत निराशाजनक नहीं हैं, यह देखते हुए कि स्कूल करीब 2 साल से बंद थे, अगर हम कालाहांडी, नबरंगपुर और मलकानगिरी जैसे आदिवासी जिलों पर विचार करें, तो सीखने का नुकसान बहुत अधिक है. हमें शिक्षा के स्तर को कम से कम पूर्व-महामारी के स्तर पर वापस लाने के लिए लगातार प्रयास करने होंगे.’

    शिक्षाविद् प्रीतीश आचार्य ने कहा कि आधारभूत मूल्यांकन हालांकि कोविड -19 के दौरान सीखने के नुकसान का सबसे अच्छा बेंचमार्क नहीं है, लेकिन कम से कम यह दर्शाता है कि सरकारी स्कूलों में छात्रों को कैसे नुकसान हुआ है. आचार्य ने कहा, “सीखने के नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को अतिरिक्त प्रयास करने की जरूरत है. विशेष रूप से आदिवासी क्षेत्रों में अकादमिक नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए, जहां कई छात्रों ने स्कूल छोड़ दिया हो. ”

    Tags: Odisha news

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