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रूस-यूक्रेन युद्ध का असर! सुखोई 30 MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने की योजना ठंडे बस्ते में

रूस-यूक्रेन युद्ध का असर! सुखोई 30 MKI लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने की योजना ठंडे बस्ते में

भारत में 85 सुखोई 30 एमकेआई के वर्तमान जरूरतों के हिसाब से अपग्रेडेशन किया जाना था. ANI

भारत में 85 सुखोई 30 एमकेआई के वर्तमान जरूरतों के हिसाब से अपग्रेडेशन किया जाना था. ANI

Su 30 Mki upgradation plan backburner: भारत अपने लड़ाकू विमान सुखोई 30 एमकेआई का वर्तमान चुनौतियों के हिसाब से अपग्रेडेश की योजना बनाई थी लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण इस योजना को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. इसके अलावा भारत 30 सुखोई 30 एमकेआई विमान रूस से खरीदना भी चाहता था, इस योजना में भारत स्वदेशी निर्मित सामग्रियों का समावेशन ज्यादा करना चाहता है, इसलिए यह योजना भी फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है.

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नई दिल्ली. भारत वायु सेना में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत है. लेकिन चीन और पाकिस्तान की नापाक हरकतों के कारण भारत को अपनी वायु सेना की ताकत में और इजाफा करने की जरूरत है. इस कड़ी में भारत ने रूस को सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों को अपग्रेड करने का समझौता किया था लेकिन रूस-यूक्रेन के बीच जारी युद्ध और आत्मनिर्भर भारत के कारण इस समझौते को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. एएनआई के मुताबिक भारत अब अधिक से अधिक इस फाइटर जेट के कल पुर्जे को खुद स्वदेशी तकनीक से बनाना चाहता है. यही कारण है कि रूस से लगभग 35 हजार करोड़ रुपये का समझौता फिलहाल ठंडे वस्ते में चला गया है. रूसी से आयतित सुखोई 30 एमकेआई भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण ताकत है. एयर फोर्स के बेड़े में 272 सुखोई एमकेआई लड़ाकू विमान है. इसे समय-समय पर रूस से ही मंगवाया गया है.

विमानों के सौदे में भी देरी
एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने बताया कि सुखोई लड़ाकू विमानों के अपग्रेडेशन के अलावा 12 अत्याधुनिक सुखोई-30 एमकेआई विमानों के सौदे में भी कुछ देरी हो सकती है. रूस के साथ यह सौदा करीब 20,000 करोड़ रुपये का था. अब भारत मेक इन इंडिया अभियान के तहत इन विमानों में ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी सामग्री जोड़ना चाहता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना के तहत भारतीय रक्षा मंत्रालय ने कई विदेशी सौदे को रद्द कर दिया है. अब सभी रक्षा सामग्री भारत में ही बनाने का नियम बना दिया गया. अत्यधिक जरूरी होने पर ही विदेश से किसी रक्षा सामग्री का आयात किया जा सकता है. इसके लिए रक्षा मंत्री से अनुमति लेना अनिवार्य है. भारत ने हाल ही में 30 से 40 सुखोई 30 एमकेआई लड़ाकू विमानों का ऑर्डर रूस को दिया था. इस सौदे के तहत रूस भारत के हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के पास अलग-अलग तरह की किट्स भेजता जिसे नासिक सेंटर में असेंबल किया जाता है.

सुखोई की ताकत वर्तमान चुनौतियों के हिसाब से बढ़ानी थी
एएनआई के ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि भारत में 85 सुखोई 30 एमकेआई के वर्तमान जरूरतों के हिसाब से अपग्रेडेशन किया जाना था. इस योजना के तहत 35,000 करोड़ रुपये की लागत से विमानों को अधिक शक्तिशाली रडार और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताओं से लैस करना था. चूंकि ये विमान रूस से भारत को प्राप्त हुआ है, इसलिए इसका अपग्रेडेशन कर इसकी ताकत को बढ़ाना था. भारत को जब भी लड़ाकू विमानों की जरूरत हुई है तब-तब उसने रूस पर ही ज्यादा निर्भरता दिखाई है. इन विमानों की आपूर्ति रूसी निर्माता एचएएल को आधी या पूरी तरह से अलग किट के रूप में करते हैं. इसके बाद नासिक में स्थित एचएएल के केंद्र में इन्हें असेंबल किया जाता है. लेकिन वर्तमान यूक्रेन युद्ध को देखते हुए फिलहाल इस परियोजना पर काम बंद है. युद्ध के कारण भारत को स्पेयर मिलने में दिक्कत हो रही है. हालांकि स्थिति सामान्य होने पर भारत के स्पेयर मिलने लगेंगे.

Tags: Fighter jet, India Defence, India russia, Russia ukraine war

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