6 नवंबर को होगी भारत-चीन के बीच आठवें दौर की कोर कमांडर स्तर की वार्ता

भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की आठवें दौर की बातचीत 6 नवंबर को होगी (सांकेतिक तस्वीर)
भारत और चीन के बीच कोर कमांडर स्तर की आठवें दौर की बातचीत 6 नवंबर को होगी (सांकेतिक तस्वीर)

India-China Corps Commander Level Talks: भारत और चीन के बीच सातवें दौर की सैन्य वार्ता 12 अक्टूबर को हुई थी जिसमें पूर्वी लद्दाख में टकराव के बिंदुओं से सैनिकों के पीछे हटने को लेकर कोई नतीजा नहीं निकला था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2020, 9:45 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (Northern Ladakh) में सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया को लेकर भारत और चीन (India & China) के बीच कोर कमांडर स्तर (Corps Commander Level) की आठवें दौर की वार्ता इस हफ्ते शुक्रवार को होने जा रही है. आधिकारिक सूत्रों ने इस बारे में जानकारी दी. इससे पहले सातवें दौर की सैन्य वार्ता 12 अक्टूबर को हुई थी जिसमें पूर्वी लद्दाख में टकराव के बिंदुओं से सैनिकों के पीछे हटने को लेकर कोई नतीजा नहीं निकला था.

एक सूत्र के मुताबिक आठवें दौर की सैन्य वार्ता शुक्रवार को हो सकती है. प्राप्त जानकारी के मुताबिक ये वार्ता पूर्वी लद्दाख के चुशुल (Chushul) में होगी. दोनों पक्षों के बीच इस साल मई में गतिरोध के हालात बने थे. काफी ऊंचाई वाले क्षेत्र में सर्दियों के दौरान तापमान शून्य से 25 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला जाता है. आठवें दौर की सैन्य वार्ता में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई लेफ्टिनेंट जनरल पी जी के मेनन करेंगे जो हाल में लेह की 14वीं कोर के कमांडर नियुक्त किये गये हैं.

पिछले दौर की वार्ता में इस बात पर बनी थी सहमति
पिछले दौर की बातचीत के बाद दोनों देशों की सेनाओं की ओर से जारी किए गए संयुक्त प्रेस वक्तव्य में कहा गया था कि दोनों पक्ष सैन्य एवं राजनयिक माध्यमों से संवाद कायम रखने पर सहमत हुए हैं ताकि गतिरोध को खत्म करने के लिए जल्द से जल्द कोई साझा स्वीकार्य समाधान निकाला जा सके.
सैन्य वार्ता के छठे चरण की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने कुछ फैसलों की घोषणा की थी. इसके तहत अग्रिम मोर्चे पर और सैनिकों को नहीं भेजने, एकतरफा तरीके से जमीनी हालात बदलने से परहेज करने और हालात को जटिल बनाने वाली किसी भी कार्रवाई से परहेज की बात कही गयी थी.



विदेश मंत्री ने कहा बदलाव का एकतरफा प्रयास अस्वीकार्य
इससे पहले चीन-भारत सीमा गतिरोध के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा था कि भारत और चीन के बीच संबंध "गंभीर तनाव" में हैं और संबंधों में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच हुए समझौतों का पूरी "समग्रता" के साथ "निष्ठापूर्वक" सम्मान किया जाना चाहिए.



विदेश मंत्री ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर यथास्थिति में परिवर्तन का कोई भी एकतरफा प्रयास 'अस्वीकार्य' है.

जयशंकर ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांतिपूर्ण माहौल ने भारत और चीन के बीच अन्य क्षेत्रों में समन्वय के विस्तार के लिए आधार उपलब्ध कराया लेकिन महामारी सामने आने के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए हैं.
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