महाराष्ट्र बीजेपी को कितना नुकसान पहुंचाएंगे हैवीवेट OBC नेता एकनाथ खड़से

तस्वीर एकनाथ खड़से की फेसबुक वॉल से साभार
तस्वीर एकनाथ खड़से की फेसबुक वॉल से साभार

एकनाथ खड़से (Eknath Khadse उन नेताओं में रहे हैं जिन्होंने महाराष्ट्र (Maharashtra) में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जड़ें जमाने का काम किया. पंचायत चुनाव से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले खड़से 1980 के दशक से बीजेपी के कर्मठ कार्यकर्ता रहे. उत्तरी महाराष्ट्र के इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ रही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 21, 2020, 10:49 PM IST
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मुंबई. महाराष्ट्र बीजेपी (Maharashtra BJP) के कद्दावर नेता एकनाथ खड़से (Eknath Khadse) ने पार्टी छोड़ दी है. वो नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) का दामन थाम सकते हैं. बताया जा रहा है कि वो पार्टी से नाराज चल रहे थे. दरअसल एकनाथ खड़से उन नेताओं में रहे हैं जिन्होंने महाराष्ट्र में भारतीय जनता पार्टी की जड़ें जमाने का काम किया. पंचायत चुनाव से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले खड़से 1980 के दशक से बीजेपी के कर्मठ कार्यकर्ता रहे. उत्तरी महाराष्ट्र के इलाकों में उनकी मजबूत पकड़ रही है.

6 बार से लगातार विधायक
1989 में पहली बार मुक्तैननगर विधानसभा सीट से विधायक चुने गए खड़से लगातार 6 बार अपनी पताका इस सीट पर फहराते रहे. उत्तरी महाराष्ट्र के जलगांव जिले की इस सीट की आस-पास की सीटों पर भी उनका प्रभाव रहा है. एक वक्त में वो बीजेपी मुख्यमंत्री पद के प्रमुख दावेदार थे.

करप्शन के आरोपों पर दिया था इस्तीफा, मिली क्लीनचिट 
महाराष्ट्र में वो 9 प्रमुख मंत्री पद संभाल चुके हैं. लेकिन 2016 में उन्होंने करप्शन के आरोपों को लेकर अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. हालांकि बाद में एक न्यायिक जांच में उन्हें क्लीन चिट भी दे दी गई. लेकिन राज्य सरकार ने कभी उस जांच को सार्वजनिक नहीं किया. कभी खड़से को दोबारा राजनीतिक रूप से मजबूत करने के प्रयास भी नहीं हुए.



गोपीनाथ मुंडे के खासमखास रहे एकनाथ
द प्रिंट में प्रकाशित एक रिपोर्ट कहती है कि 2014 में बीजेपी नेतृत्व की तरफ से देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री के तौर पर चुने जाने के बाद से खड़से का राजनीतिक आकार पार्टी में छोटा हो गया था. 67 वर्षीय एकनाथ खड़से बीजेपी के सबसे मजबूत ओबीसी नेता माने जाते थे. दिवंगत केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे के खासमखास लोगों में एकनाथ खड़से शामिल थे. वो जलगांव के ओबीसी लेवा पटेल समुदाय से ताल्लुक रखते हैं.



क्या बीजेपी को पहुंचाएंगे नुकसान
अब माना जा रहा है कि एनसीपी में जाकर एकनाथ खड़से अपनी राजनीतिक वकत दिखाने की कोशिश करेंगे. उत्तरी महाराष्ट्र में ओबीसी वोटबैंक पर अपनी पकड़ को वो एनसीपी की तरफ पलटने की पूरी कोशिश करेंगे. महाराष्ट्र विधासनभा का चुनाव हुए अभी महज एक साल ही हुआ है. ऐसे में खड़से के पास अपने क्षेत्र में वोटरों को लुभाने के लिए अभी लंबा समय है.
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