मद्रास HC के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा EC, कोर्ट की टिप्पणी को बताया अपमानजनक

EC ने अपनी याचिका में कहा है कि मद्रास HC की टिप्पणी

EC ने अपनी याचिका में कहा है कि मद्रास HC की टिप्पणी "बिना सोचे समझे, अपमानजनक और मानहानि करने वाली" है. फाइल फोटो

EC approaches SC challenging the Madras HC order: चुनाव आयोग ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर कहा था कि कोविड-19 महामारी के बीच चुनाव कराने को लेकर उसकी भूमिका पर जजों की मौखिक टिप्पणी को मीडिया में रिपोर्टिंग करने से रोका जाए.

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नई दिल्ली. देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) की दूसरी लहर के बेकाबू होने और बंगाल में चुनाव कराए जाने को लेकर मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) की टिप्पणी के खिलाफ चुनाव आयोग (Election Commission) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) का दरवाजा खटखटाया है. दरअसल मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को आड़े हाथों लेते हुए कहा था कि संवैधानिक संस्थान चुनाव प्रचार के दौरान कोविड गाइडलाइंस का पालन करने में असफल रहा है, और देश में कोरोना संक्रमण फैलाने के लिए जिम्मेदार है. कोर्ट ने कहा कि एक ऐसे गैर जिम्मेदार संस्थान पर 'हत्या का मुकदमा चलाया' जाना चाहिए. चुनाव आयोग की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एमआर शाह की बेंच 3 मई को सुनवाई करेगी. आयोग ने अपनी याचिका में कहा है कि मद्रास हाईकोर्ट की टिप्पणी "बिना सोचे समझे, अपमानजनक और मानहानि करने वाली" है.

इससे पहले चुनाव आयोग ने शुक्रवार को मद्रास हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाकर कहा था कि कोविड-19 महामारी के बीच चुनाव कराने को लेकर उसकी भूमिका पर जजों की मौखिक टिप्पणी को मीडिया में रिपोर्टिंग करने से रोका जाए. कोर्ट ने आयोग की यह याचिका खारिज कर दी. आयोग के वकील ने कहा कि चुनाव आयोग के अधिकारियों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाने और कोविड-19 के मामलों में बढ़ोतरी के लिए केवल आयोग को जिम्मेदार ठहराने की टिप्पणी से इसे बहुत नुकसान हुआ है और आयोग की छवि खराब हुई है.

हाईकोर्ट प्रथम पीठ ने कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान चार राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में चुनाव कराने में चुनाव आयोग की भूमिका के संबंध में न्यायाधीशों की मौखिक टिप्पणी को इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया के प्रकाशित करने पर रोक लगाने से इंकार कर दिया.

कोविड-19 टीका की खरीद में खामियां, बिस्तर और वेंटिलेटर उपलब्ध कराने में परेशानियों और ऑक्सीजन सिलेंडर दूसरे राज्यों को भेजने के आरोपों की सुनवाई शुक्रवार को जब शुरू हुई तो मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति सेंथिल कुमार राममूर्ति ने कहा, ‘‘उसे (मामले को) वैसे ही छोड़ देते हैं.’’ कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की थी.
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