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कोरोना के खौफ को हराकर सुरक्षित चुनाव कराने तैयार है आयोग

 चुनाव आयोग चार राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है.

चुनाव आयोग चार राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है.

कोविड-19 के भय के बावजूद निर्वाचन आयोग ने देश के सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य बिहार में पिछले साल विधानसभा चुनाव कराए और अब वह चार राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है.

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नयी दिल्ली.  कोविड-19 के भय के बावजूद निर्वाचन आयोग ने देश के सर्वाधिक जनसंख्या वाले राज्य बिहार में पिछले साल विधानसभा चुनाव कराए और अब वह चार राज्यों तथा एक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कराने की तैयारी कर रहा है. देशव्यापी लॉकडाउन, पिछले साल 25 मार्च से शुरू हुआ था जिससे जनजीवन अचानक रुक गया था.

लॉकडाउन हटने के बाद भी संक्रमण के फैलने से यह डर बना रहा कि चुनाव कराना खतरनाक हो सकता है. पिछले साल निर्वाचन आयोग द्वारा कड़ाई से कोविड के नियमों का पालन कराते हुए अक्टूबर और नवंबर में कई चरणों में सुरक्षित तरीके से चुनाव संपन्न कराए गए.

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दस्ताने, मास्क, फेस शील्ड और सेनिटाइजर का प्रयोग करते हुए महामारी के बीच बिहार चुनाव का आयोजन कराया गया. मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने हाल ही में कहा था, “हम कोविड से सुरक्षा सहित चुनाव कराने में सफल रहे थे और 57.34 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया था जो 2015 के चुनाव में 56.8 प्रतिशत मतदान से अधिक था.”
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सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की संख्या 1500 से घटाकर 1000 कर दी थी जिसके कारण मतदान केंद्रों की संख्या बढ़ानी पड़ी थी. बिहार के अलावा आयोग ने कई राज्यसभा सीटों और लगभग 60 विधानसभा सीटों के लिए भी चुनाव आयोजित किए थे. इस बार पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में चुनाव प्रचार जारी है.

एक बार फिर, मतदाताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने लाखों की संख्या में फेस शील्ड, मास्क, मतदान कर्मियों और सुरक्षाकर्मियों के लिए एक बार प्रयोग किए जाने वाले रबर के दस्ताने और मतदाताओं द्वारा ईवीएम बटन दबाने और मतदान केंद्र पर हस्ताक्षर करने के लिए पॉलीथिन के दस्ताने खरीदे गए हैं. निर्वाचन आयोग और बिहार के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कोविड-19 के नियमों का उल्लंघन कर नेताओं और प्रत्याशियों के लिए रैली आयोजित करने वालों के विरुद्ध 156 मामले दर्ज किए जा चुके हैं.
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