पिछले चुनावों में कहां हुई गलती? कमियों की पहचान करेगी EC की कोर कमेटी

निर्वाचन आयोग को आरोपों का सामना करना पड़ा कि वह चुनाव प्रचार के दौरान कोविड-19 के नियमों का पालन करवाने में नाकाम रही है.

‘कोर कमेटी’ को निर्वाचन आयोग के नियामकीय शासन में कमियों और राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों तथा जिला अधिकारियों के स्तर पर क्रियान्वयन में अंतराल की पहचान करने का काम सौंपा गया है.

  • Share this:
    नई दिल्ली. निर्वाचन आयोग (Election Commission) ने हाल में संपन्न पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों (5 State Assembly Elections) के दौरान मिले अनुभवों और कमियों को चिह्नित करने के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला किया है. पिछले दिनों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव संपन्न हुआ था.

    ‘कोर कमेटी’ को निर्वाचन आयोग के नियामकीय शासन में कमियों और राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारियों तथा जिला अधिकारियों के स्तर पर क्रियान्वयन में अंतराल की पहचान करने का काम सौंपा गया है. गुरुवार को जारी एक बयान के मुताबिक, कमेटी कानूनी और नियामकीय ढांचे को मजबूत करने की जरूरत पर भी गौर करेगी ताकि आयोग कोविड-19 संबंधी नियमों समेत सभी दिशा-निर्देशों का प्रभावी तरीके से पालन सुनिश्चित करा सके.

    कोविड नियमों का पालन करवाने में नाकाम रहा EC
    निर्वाचन आयोग को आरोपों का सामना करना पड़ा कि वह चुनाव प्रचार के दौरान कोविड-19 के नियमों का पालन करवाने में नाकाम रहा. आरोपों को खारिज करते हुए आयोग ने कहा था कि उसने प्रचार की अवधि घटाकर कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए अपनी संवैधानिक शक्तियों का इस्तेमाल किया और उल्लेख किया कि आपदा प्रबंधन कानून के प्रावधानों को लागू करना राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) की जिम्मेदारी है.

    ‘कोर कमेटी’ निष्पक्ष चुनाव के लिए व्यय प्रबंधन नियमन को मजबूत करने के लिए उपायों पर भी गौर करेगी. बयान में कहा गया कि कोर कमेटी की सिफारिशों से निर्वाचन आयोग को आगामी चुनावों के लिए आगे बढ़ने में मदद मिलेगी. निर्वाचन आयोग के महासचिव उमेश सिन्हा की अध्यक्षता वाली ‘कोर कमेटी’ को एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.

    ये भी पढ़ेंः- वैक्सीनेशन स्पीड बढ़ाने को देश के बड़े डॉक्टर ने दिया 3 प्वाइंट फॉर्मूला, जानें क्या

    आयोग ने कहा था कि कोविड-19 से संबंधित सुरक्षा उपायों को लागू कराने की जिम्मेदारी राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की है. इन उपायों में लॉकडाउन, भीड़ को प्रतिबंधित करना या नियंत्रित करना और प्राधिकरण के अधिकारियों को आपदा प्रबंधन कानून-2005 का पालन करना शामिल है. उसके मुताबिक, चुनाव प्रचार के दौरान भीड़ जमा होने को कानून के तहत राज्य प्रशासन द्वारा नहीं रोका गया.