ऑफिस ऑफ प्रॉफिट: EC में आज अंतिम सुनवाई, हाईकोर्ट की शरण में गए AAP विधायक

पिछली सुनवाई में आयोग ने आप के 20 विधायकों की जिरह करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी. चुनाव आयोग के इस आदेश के खिलाफ आप विधायक फिर दिल्ली हाईकोर्ट चल गए हैं.

Rachna Upadhyay | News18Hindi
Updated: July 23, 2018, 8:09 AM IST
ऑफिस ऑफ प्रॉफिट: EC में आज अंतिम सुनवाई, हाईकोर्ट की शरण में गए AAP विधायक
आप के 20 विधायकों की सदस्यता पर चुनाव आयोग में आज आखिरी सुनवाई होगी. (फाइल)
Rachna Upadhyay | News18Hindi
Updated: July 23, 2018, 8:09 AM IST
दिल्ली की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी (आप) के 20 विधायकों के खिलाफ ‘ऑफिस ऑफ प्रॉफिट’ मामले में दायर याचिका पर चुनाव आयोग में सोमवार को अंतिम सुनवाई होगी. दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक ऑफिस ऑफ प्रॉफिट की परिभाषा तय करने पर चुनाव आयोग को अंतिम सुनवाई करनी है.

दरअसल, पिछली सुनवाई में आयोग ने आप के 20 विधायकों की जिरह करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी थी. चुनाव आयोग के इस आदेश के खिलाफ आप विधायक फिर दिल्ली हाईकोर्ट चल गए हैं.

बता दें कि इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग की सिफारिश और राष्ट्रपति के नोटिफिकेशन को रद्द कर दिया था, जिसमें 20 आप विधायकों को विधायक रहते हुए ऑफिस ऑफ प्रॉफिट लेने का दोषी पाते हुए अयोग्य घोषित कर दिया गया था. दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि आप विधायकों की सुनवाई ठीक से नहीं हुई है, इसलिए इस मामले में आयोग फिर से सुनवाई करे. इसके बाद चुनाव आयोग ने विधायकों को फिर से सुनवाई के लिए बुलाया था.

केजरीवाल सरकार द्वारा संसदीय सचिव नियुक्त किए गए आप के 20 विधायकों के खिलाफ प्रशांत पटेल नामक कार्यकर्ता ने याचिका दायर कर ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का आरोप लगाया था. हाईकोर्ट से विधायकों की सदस्यता बहाल किए जाने के बाद चुनाव आयोग ने 17 मई से मामले की सुनवाई दोबारा शुरू कर दी थी.

बता दें कि आप विधायकों ने पटेल के अलावा दिल्ली विधानसभा और दिल्ली सरकार के उन अधिकारियों से अलग-अलग जिरह करने की अनुमति मांगी थी, जिन्होंने विभिन्न दस्तावेजी सबूतों के आधार पर विधायकों द्वारा बतौर संसदीय सचिव सरकारी खर्च पर काम करने और वित्तीय लाभ लेने की बात कही थी. हालांकि आयोग ने उनकी ये अर्जी को गैरजरूरी बताते हुए खारिज कर दिया था.

मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत, चुनाव आयुक्तों सुनील अरोड़ा तथा अशोक लवासा ने 70 पेज के आदेश में कहा था, 'इस मामले में याचिकाकर्ता से जिरह की कोई जरूरत नहीं है, क्योंकि वह इस मामले में जारी कार्यवाही का गवाह नहीं है. साथ ही प्रतिवादी अपनी अर्जी में दी गयी दलील के मुताबिक इस मामले में किसी गवाह को पेश किये जाने की जरूरत साबित करने में भी नाकाम रहे हैं.' (एजेंसी इनपुट के साथ)
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