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जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग में चुनाव आयोग की तरफ से सदस्य होंगे चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा

News18Hindi
Updated: February 17, 2020, 11:40 PM IST
जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग में चुनाव आयोग की तरफ से सदस्य होंगे चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा
मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के साथ चुनाव आयुक्त अशोक लवासा (बायें) और चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा (दायें)

सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज या रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के नए परिसीमन के लिये परिसीमन आयोग Delimitation Commission) बनेगा.

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  • Last Updated: February 17, 2020, 11:40 PM IST
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जम्मू-कश्मीर. जम्मू-कश्मीर परिसीमन आयोग (Jammu-Kashmir Delimitation Commission) में चुनाव आयोग (Election Commission) की तरफ से चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा (Sushil Chandra) सदस्य होंगे.

सूत्रों के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के जज या रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जम्मू कश्मीर के नए परिसीमन के लिये परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) बनेगा. जम्मू-कश्मीर के लिये परिसीमन आयोग के गठन की अधिसूचना सरकार की तरफ से जारी होगी. जम्मू कश्मीर राज्य के एक प्रतिनिधि परिसीमन आयोग के तीसरे सदस्य/ तीसरे होंगे.

9 से 10 चरणों में पूरी हो सकती है परिसीमन की प्रक्रिया
परिसीमन आयोग के विषय में विधायी मामलों के अनुरोध के परिणामस्वरूप, CEC ने जम्मू-कश्मीर के लिए प्रस्तावित परिसीमन आयोग के रूप में श्री सुशील चंद्रा को नामित किया है.



इससे पहले अगस्त में सूत्रों के हवाले से आई एक रिपोर्ट में सूत्रों ने कहा कि चुनाव आयोग की योजना के अनुसार, पूरी प्रक्रिया नौ से 10 चरणों में पूरी होगी और यह प्रक्रिया गृह मंत्रालय (Home Ministry) से आधिकारिक अधिसूचना प्राप्त होते ही शुरू हो जाएगी. कहा गया है कि चुनाव आयोग ने वर्ष 2000-2001 में उत्तराखंड में अपने अनुभव के आधार पर रिपोर्ट तैयार की थी.

उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से अलग किए जाने के बाद किए परिसीमन जैसा होगा यह परिसीमन
इसने पहले आयोग ने अपने अधिकारियों को परिसीमन के हालिया उदाहरणों का अध्ययन करने के लिए कहा था- जैसे कि उत्तराखंड को उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) से अलग करने के बाद किया गया था.

परिसीमन प्रक्रिया को अंजाम देते समय, जनसंख्या को सीमाओं के पुनर्वितरण और आवंटन के आधार बनाया जाता है. यह कार्य चार सदस्यीय परिसीमन आयोग को सौंपा गया है, जिसमें से एक सदस्य चुनाव आयोग का प्रतिनिधित्व करता है.

परिसीमन के बाद क्या होगी सूरत?
जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश में उपराज्यपाल होंगे और इसकी विधानसभा की अधिकतम शक्ति 107 होगी जो परिसीमन के बाद 114 तक बढ़ जाएगी. विधानसभा की चौबीस सीटें खाली रह जाएंगी क्योंकि वे पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के अंतर्गत आते हैं.

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First published: February 17, 2020, 11:40 PM IST
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