गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव की कोई कानूनी वैधता नहीं: विदेश मंत्रालय

विदेश मंत्रालय के प्रवक्त अनुराग श्रीवास्तव. (तस्वीर ani)
विदेश मंत्रालय के प्रवक्त अनुराग श्रीवास्तव. (तस्वीर ani)

भारत का कहना है कि ये क्षेत्र पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) द्वारा कब्जाया गया है इसलिए पाकिस्तान द्वारा चुनाव कराए जाने की सभी कोशिश अवैध हैं. गौरतलब है कि पाकिस्तान की तरफ से गिलिगत-बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) में चुनाव की तारीख तय कर दी गई है. आगामी 15 नवंबर को चुनाव का ऐलान किया जा चुका है.

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  • Last Updated: September 24, 2020, 10:03 PM IST
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नई दिल्ली. भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तान अधिकृत गिलगित बाल्टिस्तान (Gilgit-Baltistan) में चुनाव को कानूनी रूप से अवैध बताया है. भारत का कहना है कि ये क्षेत्र पाकिस्तानी सेना द्वारा कब्जाया गया है इसलिए पाकिस्तान द्वारा चुनाव कराए जाने की सभी कोशिश अवैध हैं. गौरतलब है कि पाकिस्तान की तरफ से गिलिगत-बाल्टिस्तान में चुनाव की तारीख तय कर दी गई है. आगामी 15 नवंबर को चुनाव का ऐलान किया जा चुका है.

गौरतलब है कि बुधवार को ही भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर के इलाकों में मानवाधिकार हनन का मामला उठाया है. भारत ने कहा है कि मानवाधिकार को लेकर पाकिस्तान ने अलग तरह का मास्क पहन रखा है जिसके पीछे वो अपनी हरकतें छिपा रहा है.


पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति आरिफ अल्‍वी ने बुधवार को गिलगित और बाल्टिस्‍तान में विधानसभा चुनाव कराने के बिल को अपनी मंजूरी दे दी. पाकिस्‍तानी अखबार एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून के मुताबिक गिलगित-बाल्टिस्‍तान में होने वाले इस विधानसभा चुनाव में तीन प्रमुख राजनीतिक दल इमरान की पीटीआई, नवाज शरीफ की पीएमल एन और बिलावल की पार्टी पाकिस्‍तानी पीपुल्‍स पार्टी हिस्‍सा लेगी. गिलगित-बाल्टिस्‍तान विधानसभा में 33 सीटें होंगी और इसमें से तीन टेक्‍नोक्रेट और 6 महिलाओं के लिए सुरक्षित होंगी. चुनाव केवल बची हुई 24 सीटों पर ही होंगे.



भले ही चुनाव में नवाज शरीफ की पार्टी भी हिस्सा ले रही हो लेकिन मरियम नवाज इसकी आलोचना कर चुकी हैं. उन्होंने इमरान सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि राजनीतिक फैसले संसद में होने चाहिए न कि सेना के हेडक्वार्टर में. मरियम ने ये प्रतक्रिया ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान दी. वो संपत्ति से जुड़े एक विवाद के मसले में इस्लामाबाद की अदालत पहुंची थीं.
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