Lok Sabha Election 2019: शुरू हो गई मतगणना, थोड़ी ही देर में आने लगेंगे परिणाम

लोकसभा चुनाव 2019 का आज फाइनल मैच है. सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो गई है. सबसे पहले पोस्टल बैलट गिने जा रहे हैं. सुबह 8.30 बजे से ईवीएम में पड़े वोटों की गिनती होगी.

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Updated: May 23, 2019, 8:25 AM IST
Lok Sabha Election 2019: शुरू हो गई मतगणना, थोड़ी ही देर में आने लगेंगे परिणाम
Lok Sabha Election 2019: शुरू हो गई मतगणना, थोड़ी ही देर में आने लगेंगे परिणाम (image credit: ANI)
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Updated: May 23, 2019, 8:25 AM IST
लोकसभा चुनाव 2019 का आज फाइनल मैच है. सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो गई है. सबसे पहले पोस्टल बैलट गिने जा रहे हैं. सुबह 8.30 बजे से ईवीएम में पड़े वोटों की गिनती होगी. 9 बजे से परिणाम आने शुरू हो जाएंगे. इस बार वीवीपैट पर्चियों से मिलान के चलते औपचारिक रिजल्ट में कुछ देरी हो सकती है. हालांकि ट्रेंड समय पर मिलेंगे. दोपहर तक साफ हो जाएगा कि रुझान किस ओर है.

काउंटिंग के बाद हर विधानसभा क्षेत्र में 5 ईवीएम के वोटों और वीवीपैट से निकली पर्ची का मिलान होगा. इसके बाद ही औपचारिक रूप से परिणाम घोषित किए जाएंगे जिससे कुछ अधिक समय लगने की अपेक्षा है. विपक्षी दलों की मांग थी कि काउंटिंग से पहले वोट और पर्ची का मिलान हो, जिसे आयोग ने खारिज़ कर दिया था.



मंगलवार को 22 विपक्षी पार्टियों ने चुनाव आयोग से संपर्क कर ईवीएम को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज़ कराई थी. हालांकि चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों की ओर से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की विश्वसनीयता और उसी सुरक्षा पर जो सवाल उठाए गए थे उसे तथ्यहीन बताया है. आयोग का कहना है कि वोटिंग से लेकर मतगणना तक किसी भी प्रक्रिया के दौरान ईवीएम में किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है.

ऐसे होती है ईवीएम की निगरानी

मतदान के बाद ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम में रखी जाती है और इसकी आयोग तीन स्तरों पर करता है. इसकी सुरक्षा के लिए केंद्रीय अर्द्ध सैनिक बलों की तैनाती की जाती है. केंद्रीय बल स्ट्रॉन्ग रूम के भीतर की सुरक्षा देखते हैं जबकि बाहर की सुरक्षा राज्य पुलिस बलों के हाथों में होती है.

चुनाव शुरू होने से एक घंटे पहले हर बूथ पर सभी दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में ईवीएम से मॉक वोटिंग होती है जिसके तहत एक हज़ार वोट डाले जाते हैं. इस मॉक वोटिंग की रिकॉर्डिंग होती है.

ईवीएम में किसी तरह की गड़बड़ी की शिकायत मिलने पर जांच पूरी होने तक डेटा को मिटाया नहीं जाता है.
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चुनाव के बाद भी कम से कम 6 महीने तक ईवीएम उसी निर्वाचन अधिकारी की देखरेख में रहती है, जहां उसका उपयोग चुनाव के दौरान हुआ था. अगर इस दौरान कोई शिकायत नहीं मिली तो फिर उसका इस्तेमाल दूसरी जगह किया जाता है.

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