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देश के इस राज्य में डूब गए 500 हाथी, गैंडे और हिरन, यह थी वजह

देश के इस राज्य में डूब गए 500 हाथी, गैंडे और हिरन, यह थी वजह

काजीरंगा नेशनल पार्क का 80 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ में डूब गया है.

काजीरंगा नेशनल पार्क का 80 प्रतिशत हिस्सा बाढ़ में डूब गया है.

अच्छी बात यह है कि बीते अनुभव को देखते हुए इस साल इंतज़ाम अच्छे हो जाने के चलते 2020 में जानवरों (Animals) के डूबने का आंकड़ा खासा कम हुआ है.

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नई दिल्ली. पर्यावरण (Environment) और पशु प्रेमियों के लिए अफसोसजनक खबर है. 500 हाथी, गैंडा (Rhinoceros) और हिरन पानी में डूब गए हैं. वैसे कुल पशुओं की संख्या करीब 550 है. लेकिन अकेले हाथी, गैंडा और हिरन की संख्या ही 500 के आसपास है. यह घटना असम (Assam) के काजीरंगा पार्क (Kaziranga Park) की है. बाढ़ आने से यह घटना हुई है.

बाढ़ (Flood) के पानी में डूबने वाले जानवरों की यह संख्या बीते तीन साल समेत इस वर्ष की भी है. हालांकि अच्छी बात यह है कि बीते अनुभव को देखते हुए इस साल इंतज़ाम अच्छे हो जाने के चलते 2020 में जानवरों (Animals) के डूबने का आंकड़ा खासा कम हुआ है. पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Environment and Forest Ministry) ने यह आंकड़े जारी किए हैं.

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किस साल कितने जानवर बाढ़ के पानी में डूब गए

हर साल असम में बाढ़ आती है. बाढ़ का पानी काजीरंगा पार्क में भी घुस जाता है. जहां हर साल सैकड़ों जानवर पानी के तेज बहाव में बह जाते हैं. 2017 में तो एक गैंडे ने मिट्टी के एक टीले पर कई दिन तक खड़े रहकर अपनी जान बचाई थी. बाद में रेस्कयू टीम ने उसे बचाया था. पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने बाढ़ के पानी में बहने वाले काजीरंग पार्क के जानवरों का आंकड़ा 2017 से 2020 तक का जारी किया है.

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हर साल बड़ी संख्या में हिरन की अलग-अलग जातियां बाढ़ के पानी में डूब जाती हैं.


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2017 में 284 जानवर बाढ़ के पानी में बह गए थे. लेकिन 2018 के आंकड़े मंत्रालय ने जारी नहीं किए हैं. 2019 में 223 जानवर डूबे थे. वहीं इस साल यह आंकड़ा 82 जानवरों तक ही सीमित रहा है. डूबने वाले जानवरों में गैंडा, हाथी, हिरन की कई तरह की प्रजाति, बाघ, जंगली भैंस समेत कुछ दूसरे जानवर हैं.

4 साल में सिर्फ 5 जानवरों की प्राकृतिक मौत हुई

पर्यावरण, वन एंव जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से जारी आंकड़ों पर निगाह डालें तो 2017 से 2020 तक सिर्फ 5 जानवर ऐसे थे जिनकी मौत प्राकृतिक रूप से हुई है. 5 जानवरों की मौत का यह आंकड़ा भी सिर्फ साल 2020 का है. वहीं 31 जानवर ऐसे भी थे जो दलदल की कीचड़ में फंसकर मर गए. 30 जानवरों को सांप ने काट लिया था तो उनकी मौत ज़हर से हो गई. 43 जानवर जिसमे सबसे ज़्यादा संख्या हिरन की है कि मौत जंगल में वाहनों के टकराने से हो गई.

इस बारे में पर्यावरण, पशु-पक्षी प्रेमी और वर्ड वॉचर एन. शिव कुमार बताते हैं, काजीरंगा में बाढ़ से बचाव के लिए कोई बहुत ज़्यादे उपाय नहीं कर सकते. यह प्राकृतिक है और हर साल भीषण रूप में आती है. बावजूद इसके वहां विभाग ने पार्क के अंदर ऊंचे-ऊंचे मिट्टी के टीले तैयार किए हैं. बाघ और हाथी तो पानी में तैर सकते है, लेकिन कितनी दिन तक वो बचाव करें, और फिर उन्हें खाने के लिए भी चाहिए. हिरण कमजोर होता है और बहुत देर तक पानी से लड़ाई नहीं लड़ सकता है.undefined

Tags: Assam, Flood, Forest department, Lok sabha, Tiger reserve in india

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