भीमा कोरेगांव केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोन्जाल्विस से पूछा, आपने घर पर 'वार एंड पीस' किताब को क्यों रखा था?

एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव (Bhima koregaon violence) मामले की सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) में की गई . सुनवाई के दौरान मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने अदालत के सामने जो साक्ष्य पेश किए हैं, उसमें 'वार एंड पीस' (War and peace) किताब भी शामिल है.

News18Hindi
Updated: August 29, 2019, 8:49 AM IST
भीमा कोरेगांव केस: बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोन्जाल्विस से पूछा, आपने घर पर 'वार एंड पीस' किताब को क्यों रखा था?
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोन्जाल्विस पूछा है कि उन्होंने अपने घर पर लियो टॉल्सटाय की किताब 'वार एंड पीस' क्यों रखी थी.
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Updated: August 29, 2019, 8:49 AM IST
एल्गार परिषद-भीमा कोरेगांव (Bhima koregaon violence) मामले के आरोपी वी. गोन्जाल्विस (Vernon Gonsalves) की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने पूछा है कि उन्होंने अपने घर पर लियो टॉल्सटाय की किताब 'वार एंड पीस' (War and peace) और कुछ 'आपत्तिजनक सामग्री' जिसमें कुछ सीडी भी शामिल है उसे क्यों रखा हुआ है.

जस्टिस सारंग कोतवाल की पीठ ने गोन्जाल्विस और अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि 'वार एंड पीस' जैसी किताबें और सीडी पहली नजर में संकेत देते हैं कि वे राज्य के खिलाफ कुछ सामग्री रखते थे. 'वार एंड पीस' रूस के प्रसिद्ध लेखक लियो टॉल्सटाय द्वारा रचित उपन्यास है. सुनवाई के दौरान यह उपन्यास बहस का विषय बन गया. मामले की जांच कर रही पुणे पुलिस ने दावा किया कि यह एक साल पहले मुंबई में गोन्जाल्विस के घर पर छापे के दौरान जब्त बेहद भड़काऊ साक्ष्यों में से एक है.

हाईकोर्ट ने गोन्जाल्विस के घर से जब्त जिन पुस्तकों और सीडी का जिक्र किया है, उनमें कबीर कला मंच द्वारा जारी सीडी राज्य दमन विरोधी, मार्क्सिस्ट आर्काइव्स, जय भीमा कामरेड और लियो टॉलस्टाय की साहित्यिक कृति, वार एंड पीस, अंडरस्टैंडिंग माओइस्ट, आरसीपी रीव्यू और नेशनल स्टडी सर्किल द्वारा जारी परिपत्र की प्रतियां भी शामिल हैं. जस्टिस कोतवाल ने कहा, सीडी 'राज्य दमन विरोधी' का नाम ही अपने आप में कहता है कि इसमें राज्य के खिलाफ कुछ है, वहीं 'वार एंड पीस' दूसरे देश में युद्ध के बारे में है. आपके (गोन्जाल्विस) पास घर पर ये किताबें और सीडी क्यों हैं? आपको अदालत को यह स्पष्ट करना होगा.

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भीमा कोरेगांव की लड़ाई के 200 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोह में हिंसा भड़की.


क्या था मामला?
पुणे पुलिस ने एल्गार परिषद मामले में कई कार्यकर्ताओं के आवासों और दफ्तरों पर छापे मारे थे और गोन्जाल्विस को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया. पुलिस ने दावा किया था कि परिषद में 31 दिसंबर 2017 को दिए गए भड़काऊ भाषणों की वजह से अगले दिन पुणे जिले के भीमा-कोरेगांव गांव के आसपास जातीय हिंसा भड़की थी. भीमा कोरेगांव की लड़ाई के 200 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोह में हिंसा भड़की. हिंसा में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी तथा कुछ अन्य घायल हो गए थे.

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First published: August 29, 2019, 7:47 AM IST
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