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लोगों को पसंद आया वर्क फ्रॉम होम, ऑफिस बुलाने पर चाहते हैं नौकरी छोड़ना

लोग ऑफिस जाने के बजाय घर से ही काम करना पसंद कर रहे हैं.. Image-shutterstock.com

एक सर्वे के मुताबिक 39 फीसद लोगों का कहना है कि अगर कंपनी ने उन्हें दूर बैठ कर काम करने की इजाज़त नहीं दी तो वो नौकरी छोड़ देंगें.

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    नई दिल्ली. लोगों को वैक्सीन लगने के साथ ही कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) पर भी काबू होता दिख रहा है. ऐसे में कंपनी का लोगों को काम पर लौटने का आदेश कंपनी और कर्मचारी के बीच विवाद की वजह बनता जा रहा है दरअसल कर्मचारियों ने दफ्तर से दूर बैठ कर काम करने की व्यवस्था को अपना लिया है. वहीं गूगल से लेकर फोर्ड मोटर और सिटीग्रुप जैसी कंपनी ने काम में लचीलेपन का वादा किया है, जहां कई प्रमुख अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर दफ्तर में रहने को बेहद ज़रूरी बताया, वहीं कुछ का मानना है कि दफ्तर से दूर रहकर काम करने से कंपनी कल्चर खत्म हो जाएगा.

    इधर कर्मचारियों का एक बड़ा तबका इस बात से सहमत नहीं दिखता हैं. पिछले साल कुछ नहीं तो ये तो साबित कर ही दिया कि बगैर दफ्तर जाए, बगैर ट्रेन में धक्का खाए, कहीं से भी बैठ कर काम किया जा सकता है. हालांकि कुछ लोगों ने दफ्तर आना शुरू कर दिया है, लेकिन अभी भी काफी लोग हैं जिन्हें वैक्सीन और अपने साथियों से वायरस के खतरे को लेकर हिचक बनी हुई है.

    वहीं कुछ कर्मचारियों का कहना है कि कुछ बॉस का खासकर जो दूरदराज बैठ कर काम करने वाले माहौल से परिचित नहीं हैं. वो अपने कर्मचारियों को दफ्तर बुलाने को लेकर बेसब्र हैं. उन्हें ऐसा लगता है कि कर्मचारी अगर उनकी नज़र के सामने नहीं है तो वो काम नहीं कर रहा होगा.

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    महज 28 फीसदी ने वापस दफ्तर जाकर शुरू किया काम
    महामारी के बाद काम करने का माहौल कैसा होगा इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी. अमेरिका की एक रिपोर्ट के मुताबिक 10 मेट्रो इलाकों की सूची से पता चलता है कि महज़ 28 फीसद लोगों ने वापस अपने दफ्तर जाकर काम करना शुरू किया है. कुछ कंपनी तो वायरस के टिके रहने और टीकाकरण चलने और बच्चों को झूलाघर की अनियमित हालत को देखकर नर्म रवैया अपनाए हुए हैं.

    लेकिन जैसे जैसे दफ्तरों के खुलने की संख्या बढ़ रही है, ऐसे में हो सकता है कुछ कर्मचारी दूसरा विकल्प मांगें. मई में अमेरिका में हुए एक सर्वे के मुताबिक 39 फीसद लोगों का कहना है कि अगर कंपनी ने उन्हें दूर बैठ कर काम करने की इजाज़त नहीं दी तो वो नौकरी छोड़ देंगे. काम को लेकर दो पीढ़ियों का फासला साफ झलक रहा है. नई पीढ़ी खास कर जेनरेशन ज़ेड के बीच ये आंकड़ा 49 फीसद था.
    अप्रैल में फ्लेक्स जॉब के सर्वे के मुताबिक कम आना जाना और पैसों की बचत दूर दराज से काम करने की सबसे बड़ी वजह रही हैं. हर तीसरे इंसान का मानना था कि दूर बैठ कर काम करते हुए उनकी अच्छी खासी बचत हुई है.

    घर से काम करने ने कई फायदे बताते हैं लोग
    कुछ लोग दूर बैठ कर काम करने का एक फायदा ये भी बताते हैं कि वो अपने वक्त को नियंत्रित कर सकते हैं, वो घर में जब चाहे, जैसे चाहें वैसे काम कर सकते हैं. घर में ऐसा नहीं है कि उन्हें हमेशा एक ही जगह बैठना है, वो चाहें तो टहल कर भी आ सकते हैं.

    ऐसा नहीं है कि सभी के पास ये लचीलापन चुनने का मौका है, लाखों फ्रंटलाइन कर्मचारी हैं, जो दुकानों में काम करते हैं, अस्पताल में काम कर रहे हैं. घरों में लोगों की देख रेख का काम करते हैं, या लोगों के घरों में सामान पहुंचाने का काम कर रहे हैं. उन लोगों के पास ऐसे विकल्पों की कमी है.

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    वहीं एंथोनी क्लोट्ज, टेक्सास यूनिवर्सिटी में प्रबंधन के एसोसिएट प्रोफेसर जिन्होंने लोग नौकरी क्यों छोड़ते है, इस बात की शोध की है उनका कहना है कि जिनके पास विकल्प हैं वो उस पर विचार कर रहे हैं. अगर कंपनी को लगता है कि सब कुछ पहले की तरह सामान्य हो जाएगा, तो वर्तमान के हालात को देखते हुए यही कहा जा सकता है कि ऐसा हो सकता है लेकिन इसमें खतरा बना हुआ है.

    उच्च पदों पर बैठे लोग भी इस बात पर ध्यान दे रहे हैं. जनवरी में हुए एक सर्वे में पाया गया कि पांच में से एक महामारी से पहले वाली दिनचर्या पर लौटना चाहता है, महज़ 13 फीसद लोगों ने ही दफ्तर जाने को लेकर सहमति जताई.

    कुछ लोगों का मानना है कि वो ऐसे लोगों के साथ काम नहीं कर सकते हैं जिन्हें वैक्सीन नहीं लगी है, वहीं कुछ लोग मानते हैं कि वो ऐसी जगह काम तलाश रहे हैं जहां वायरस को गंभीरता से लिया जाए या फिर वो कहीं भी काम नहीं करेंगे. वहीं कुछ लोगों का ये भी मानना है कि महामारी के दौरान घर से काम करने पर उन्होंने खुद को करीब से जाना और अपने लिए भी वक्त निकाला. यहां तक कि कुछ लोगों का ये तक मानना है उनका दुनिया और जिंदगी को देखने का नज़रिया बदल गया है. खास बात ये है कि जो लोग अपनी नौकरी छोड़ रहे हैं उनके हाथ में कुछ नहीं है, ना ही उनकी आगे की कोई योजना है फिर भी वह नौकरी छोड़ रहे हैं. लोगों को दफ्तर जाने पर ऐसा लगने लगा है जैसे वो सिर्फ काम, काम और काम करेंगे फिर एक दिन मर जाएंगे.