हिजबुल में चाहिए एंट्री तो पहले सुरक्षाबलों पर आतंकी हमले को देना होगा अंजाम

इंटेलीजेंस रिपोर्ट में ये साफ हुआ है कि घाटी में हिज़बुल ने शर्त रखी है की जो युवा उनके साथ जुड़ना चाहता है उसे सबसे पहले किसी आतंकी घटना को अंजाम देना होगा.

Sandeep Bol | News18Hindi
Updated: June 19, 2019, 5:47 PM IST
हिजबुल में चाहिए एंट्री तो पहले सुरक्षाबलों पर आतंकी हमले को देना होगा अंजाम
हिजबुल में एंट्री चाहिए तो सुरक्षाबलों पर हमला कर दिखाना होगा अपना काम
Sandeep Bol
Sandeep Bol | News18Hindi
Updated: June 19, 2019, 5:47 PM IST
पुलवामा हमले के बाद से भारतीय सेना की ओर से लगातार की जा रही कार्रवाई से परेशान आतंकी भारत में घुसपैठ की हिम्मत तक नहीं कर पा रहे हैं. भारतीय सुरक्षाबलों की ओर से शुरू किए गए ऑपरेशन ऑल आउट ने घाटी में आतंकियों की कमर तोड़ दी है. खुफिया जानकारी के मुताबिक हिजबुल मुजाहिदीन ने युवाओं को अपने आतंकी संगठन में जोड़ने के लिए नई शर्त रखी है.

इंटेलीजेंस रिपोर्ट में ये साफ हुआ है कि घाटी में हिज़बुल ने शर्त रखी है की जो कोई भी युवा हिज़बुल से जुड़ना चाहता है उसे सबसे पहले किसी आतंकी घटना को अंजाम देना होगा. बाकायदा पुलवामा में सुरक्षाबलों पर आतंकी हमला करने का फ़रमान जारी किया गया है.

आखिर क्या है इस फरमान की वजह
जानकारों की मानें तो इस फ़रमान के पीछे दो वजह देखी जा रही हैं. पहला कि आतंकी ये तस्दीक कर लेना चाहते हैं की जो भी उनके संगठन में शामिल हो रहा है कहीं वो उनसे जुड़ी जानकारी सुरक्षाबलों से साझा तो नहीं कर रहा है. क्योंकि पिछले कुछ समय से ये देखा जा रहा है कि स्थानीय निवासियों की सटीक जानकारी साझा करने के चलते सुरक्षाबल बड़े ऑपरेशन को अंजाम दे रहे हैं और आतंकियों को मौत के घाट उतारा जा रहा है.

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खत्म हो जाएगी मुख्यधारा में लौटने की संभावना
दूसरी वजह ये है की संगठन में शामिल होने से पहले अगर कोई युवा आतंकी घटना को अंजाम दे रहा है तो पुलिस और सुरक्षाबलों के रडार पर आ जाएगा और फिर उसकी मुख्यधारा में लौटने की संभावना कम या लगभग खत्म हो जाएगी. अगर आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल अब तक कुल 50 कश्मीरी युवाओं ने आतंकी संगठनों को ज्वाइन किया है. इसमें हिज़बुल मुजाहिदीन में 30, लश्कर में 5, जैश में 14 और एक अन्य संगठन में आतंकी तंजीम में शामिल हुए हैं.
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पिछले साल के मुक़ाबले कम है संख्या
ये संख्या पिछले साल के मुक़ाबले काफी कम है. अगर हम पिछले पांच साल के आंकड़ों पर नज़र डालें तो सबसे ज़्यादा 209 युवा 2018 में आतंकी संगठनों में शामिल हुए थे तो 2017 में 128 , 2016 में 84, 2015 में 83 और 2014 में सिर्फ 63 लोग आतंकी संगठन से जुड़े थे.

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First published: June 19, 2019, 3:33 PM IST
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