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सबरीमाला में फिलहाल जारी रहेगी महिलाओं की एंट्री, सुप्रीम कोर्ट ने 7 जजों की बेंच को रेफर किया केस

News18Hindi
Updated: November 14, 2019, 3:17 PM IST
सबरीमाला में फिलहाल जारी रहेगी महिलाओं की एंट्री, सुप्रीम कोर्ट ने 7 जजों की बेंच को रेफर किया केस
केरल के सबरीमाला मंदिर में फिलहाल जारी रहेगी महिलाओं की एंट्री

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इससे पहले 28 सितंबर 2018 को सबरीमाला (Sabarimala) के भगवान अयप्पा मंदिर (Lord Ayyappa Mandir) में सभी महिलाओं को प्रवेश की इजाजत दी थी.

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  • Last Updated: November 14, 2019, 3:17 PM IST
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केरल. सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर (Sabarimala) पर बड़ा फैसला सुनाते हुए महिलाओं के प्रवेश पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है. इसके साथ ही शीर्ष अदालत (Supreme Court) ने इस मामले को बड़ी बेंच में रेफर को भेज दिया है. अब सात जजों की बेंच इस मामले में अपना फैसला सुनाएगी. दो जजों की असहमति के बाद यह केस बड़ी बेंच को सौपा गया है.

सबरीमाला केस की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस केस का असर सिर्फ इस मंदिर नहीं बल्कि मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश, अग्यारी में पारसी महिलाओं के प्रवेश पर भी पड़ेगा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि परंपराएं धर्म के सर्वोच्च सर्वमान्य नियमों के मुताबिक होनी चाहिए.

संविधान पीठ ने बहुमत के निर्णय में शीर्ष अदालत के 28 सितंबर, 2018 के फैसले पर कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की और न ही पहले के फैसले पर रोक लगाई है. इसी निर्णय में कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में सभी आयु वर्ग की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी थी. इस मामले में जस्टिस आर एफ नरिमन और जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ ने अल्पमत का फैसला सुनाते हुए सभी पुनर्विचार याचिकायें खारिज कर दीं. साथ ही उन्होंने 28 सितंबर, 2018 के निर्णय पर अमल का निर्देश दिया.


सबरीमाला मंदिर प्रकरण में संविधान पीठ ने बहुमत का निर्णय 56 पुनर्विचार याचिकाओं सहित 65 याचिकाओं पर सुनाया है. अदालत के 28 सितंबर के फैसले का केरल में हिंसक विरोध होने के बाद ये याचिकायें दायर की गई थीं.




शीर्ष अदालत ने 28 सितंबर, 2018 को 4:1 के बहुमत से फैसला देते हुए सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर रोक की व्यवस्था को गैरकानूनी और असंवैधानिक करार दिया था. न्यायालय ने इस व्यवस्था को पक्षपातपूर्ण और महिलाओं के साथ लैंगिक आधार पर अन्याय करार दिया था.28 सितंबर 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था फैसला
बता दें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर 2018 को सभी महिलाओं को मंदिर में प्रवेश करने की इजाजत देने वाला फैसला दिया था. कोर्ट ने कहा था कि लिंग के आधार पर मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को रोकना एक भेदभाव वाली प्रथा है, जिससे महिलाओं के मौलिक अधिकार का हनन होता है. दरअसल पिछले कुछ समय से केरल की राजनीति इसी मुद्दे के इर्द-गिर्द घूम रही है. (PTI इनपुट के साथ)

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First published: November 14, 2019, 10:48 AM IST
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