पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अनूठे अर्बन फॉरेस्ट का किया उद्घाटन

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अर्बन फॉरेस्ट यानि नगर वन बनाने की शुरूआत की (फाइल फोटो)

पर्यावरण मंत्रालय (Ministry of Environment) का दावा है कि एक एकड़ से थोड़ी ज्यादा जमीन पर अगले ढाई साल में यह नगर वन पूरी तरह से विकसित हो जाएगा और इस नगर वन से सीएजी के दफ्तर और सटे भाग में तापमान में कम से कम 14 डिग्री का अंतर आ जाएगा.

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अर्बन फॉरेस्ट (Urban forest) एक अनूठा जंगल जो बढ़ते प्रदूषण के बीच बड़े शहरों का फेफड़ा माना जाता है और जिसका काम कार्बन का खात्मा कर लगातार ऑक्सीजन बैंक बनाते रहना है. एक ऐसे ही अर्बन फॉरेस्ट यानी नगर वन बनाने की शुरुआत की पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (Prakash Javadekar) ने. दिल्ली के सीएजी के मुख्यालय में जावड़ेकर ने 59 विभिन्न प्रजातियों के लगभग 12 हजार पौधे लगाए. पर्यावरण मंत्रालय का दावा है कि एक एकड़ से थोड़ी ज्यादा जमीन पर अगले ढाई साल में यह नगर वन पूरी तरह से विकसित हो जाएगा और इस नगर वन से सीएजी के दफ्तर और सटे भाग में तापमान में कम से कम 14 डिग्री का अंतर आ जाएगा, क्योंकि ये नगर वन कम से कम 40 फीसदी आर्द्रता यानी मॉइस्चर बढ़ा देते हैं. पिछले महीने ही पर्यावरण दिवस के मौके पर प्रकाश जावड़ेकर ने देशभर में अगले पांच साल में ऐसे 200 से अधिक नगर वन बनाने का ऐलान किया था.

पिछले कुछ सालों में दिल्ली का एक्यूआई यानी एयर क्वालिटी इंडेक्स सरकार और दिल्लीवासियों के लिए लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है. दिल्ली के आईटीओ के पास तो पिछले कुछ सालों में प्रदूषण का स्तर तो खतरनाक से भी अधिक पाया जाने लगा है. इसलिए ITO के पास ही बने सीएजी मुख्यालय के पार्क में ही एक अर्बन फॉरेस्ट विकसित करने का फैसला लिया गया. जगह कम होने के कारण स्थानीय बीज और यहां कि मिट्टी में फलने फूलने वाले पौधे ही इस्तेमाल में लाए जाएंगे.

ये नगर वन मियावकी विधि से विकसित हो रहे हैं. अर्बन फॉरेस्ट विकसित करने की ये विधि तापमान कम करने में खासा योगदान देता है. जिन पौधों को रोपा जाता है वो सभी स्थानीय होते हैं. पर्यावरण मंत्रालय का मानना है कि यह जंगल प्राकृतिक आपदा से निपटने और पर्यावरण को बचाने में 30 गुनी ज्यादा क्षमता रखता है. इनके रख रखाव पर, पानी का इस्तेमाल से लेकर विकासित करने में कम से कम खर्च आता है. अर्बन फॉरेस्ट का अपना एक इको सिस्टम होता है जिसकी अपनी एक क्षमता होती है पक्षियों, मधुमक्खियों, गायब हो रही तितलियों और सूक्ष्म जीवों को भी नया जीवन देने की. मियावकी विधि से विकसित हुए वनों की खासियत ये है कि तीन साल मे ये आत्मनिर्भर हो जाने की क्षमता रखते हैं.

दिल्ली और महानगरों के तेजी से गायब होते वनों और पेड़ों की कमी को पूरा करने के लिए ये अर्बन फॉरेस्ट एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं. अगर ये मुहिम सफलता की ओरर बढ़ती है तो साफ है कि खत्म होते जंगलों और प्रदूषित होते पर्यावरण को संभालने का एक बड़ा काम हो सकता है.

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