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लोकसभा में प्रदूषण पर हुई चर्चा, पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर गुरुवार को दे सकते हैं जवाब

News18Hindi
Updated: November 19, 2019, 11:06 PM IST
लोकसभा में प्रदूषण पर हुई चर्चा, पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर गुरुवार को दे सकते हैं जवाब
संसद में प्रदूषण को लेकर चर्चा जारी है.

दिल्ली-NCR में और देश के अन्य शहरों में इस समय फैले वायु प्रदूषण (Air Pollution) के पीछे किसानों द्वारा पराली जलाए जाने को जिम्मेदार ठहराने के दावों को सत्ता पक्ष और विपक्ष के विभिन्न दलों के सदस्यों ने गलत बताया.

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  • Last Updated: November 19, 2019, 11:06 PM IST
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नई दिल्ली. संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) का मंगलवार को दूसरा दिन रहा. मंगलवार को सदन के पटल पर प्रदूषण, जेएनयू जैसे कई मुद्दे रखे गए. दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में और देश के अन्य शहरों में इस समय व्याप्त वायु प्रदूषण के पीछे किसानों द्वारा पराली जलाए जाने को जिम्मेदार ठहराने के दावों को सत्ता पक्ष और विपक्ष के विभिन्न दलों के सदस्यों ने गलत बताया. उन्होंने लोकसभा में प्रदूषण के लिए वाहनों और उद्योगों से निकलने वाले धुएं को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने दुनिया के कुछ अन्य शहरों का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में भी आबोहवा को पूरी तरह साफ किया जा सकता है और इसके लिए केंद्र तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कमान संभालनी चाहिए.

प्रदूषण पर चर्चा में कांग्रेस के मनीष तिवारी, टीएमसी की काकोली घोष, बीजेपी के मनोज तिवारी और गौतम गंभीर समेत कई सांसदों ने हिस्सा लिया और प्रदूषण पर अपने विचार रखे. इस चर्चा के बाद सभा की कार्यवाही बुधवार तक के लिए स्थगित कर दी गई. वहीं खबर है कि इस चर्चा के बाद पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर प्रदूषण पर दोनों सदनों में गुरुवार को जवाब दे सकते हैं.

पेरियार पर रामदेव की टिप्पणी पर भी हुई चर्चा
वहीं योग गुरु रामदेव की तमिलनाडु के प्रसिद्ध समाज सुधारक ई वी रामास्वामी (पेरियार) पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी और पश्चिम बंगाल में भाजपा सांसदों पर कथित हमले सहित कई मुद्दे मंगलवार को लोकसभा में विभिन्न दलों के सदस्यों ने उठाये. शून्यकाल के दौरान द्रमुक के सेंथिल कुमार ने रामदेव की कथित टिप्पणी का मुद्दा उठाते हुए कहा, 'योगगुरु ने पेरियार को 'दलित आतंकवादी' कहा है. यह बहुत ही आपत्तिजनक है. इसे लेकर लोगों में आक्रोश है.' उन्होंने कहा कि सदन से यह संदेश जाना चाहिए कि पेरियार के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी स्वीकार नहीं की जाएगी.

बंगाल में सांसदों पर हमले पर भी हुई बात
भाजपा के अर्जुन सिंह ने कहा कि पश्चिम बंगाल से भाजपा के 18 सांसद चुनकर आए हैं लेकिन उनकी सांसद निधि का उपयोग नहीं हो पा रहा है क्योंकि जिला अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’ की तरह काम कर रही है.

भाजपा के ही सौमित्र खान ने कहा कि पश्चिम बंगाल में सांसदों और केंद्र सरकार के मंत्रियों पर हमले हो रहे हैं. खान ने कहा कि कभी-कभी ऐसा लगता है कि पश्चिम बंगाल भारत में ही है या किसी दूसरे देश में है. किसान सम्मान निधि योजना और आयुष्मान योजना का लाभ राज्य के लोगों को नहीं मिल पा रहा है.
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सेरोगेसी पर लेकर राज्यसभा में हुई चर्चा
वहीं किराए की कोख (सरोगेसी) की समूची प्रक्रिया के नियमन के मकसद से लाये गये एक महत्वपूर्ण विधेयक पर राज्यसभा में मंगलवार को सरकार के लिए उस समय असहज स्थिति बन गयी जब विभिन्न दलों के साथ स्वयं सत्तारूढ़ दल के एक वरिष्ठ सदस्य ने इसके कई प्रावधानों की खामियों की खुलकर चर्चा की.

विभिन्न दलों के सदस्यों ने प्रस्तावित कानून को मजबूती देने के मकसद से सरोगेसी के लिए इच्छुक दंपती की पांच साल के वैवाहिक जीवन की शर्त की अवधि को कम करने और ‘‘निकट रिश्तेदार’’ वाले प्रावधान को स्पष्ट रूप से परिभाषित करने का सुझाव दिया. उच्च सदन में सरोगेसी (विनियमन) विधेयक पर चर्चा के दौरान अधिकतर दलों के सदस्यों का मानना था कि इस विधेयक में सरकार को संसद की संबंधित स्थायी समिति की महत्वपूर्ण सिफारिशों को शामिल करना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार ने इस विधेयक में समिति की महत्वपूर्ण सिफारिशों को लगभग छोड़ दिया.

खामियों पर भी हुई चर्चा
विधेयक पर चर्चा के दौरान भाजपा के सुरेश प्रभु ने भले ही विधेयक का समर्थन किया किंतु इसकी कई खामियों की भी खुलकर चर्चा की. बाद में अधिकतर दलों के सदस्यों ने सुरेश प्रभु द्वारा उठाये गये मुद्दों का हवाला देते हुए सरकार से इस विधेयक में समुचित संशोधन करने को कहा.

प्रभु ने कहा कि इस विधेयक में प्रावधान रखा गया है कि केवल भारतीय नागरिक या अनिवासी भारतीय दंपती ही सरोगेसी के जरिये बच्चे हासिल कर सकेंगे. उन्होंने कहा कि भारत में यदि कोई विदेशी दंपती रहता है तो उसे भी किसी कारण से इसकी आवश्यकता पड़ सकती है. ऐसे लोगों को इससे वंचित नहीं करना चाहिए.

पूर्व केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि इस विधेयक में केवल नजदीकी रिश्तेदार को सरोगेट माता बनाने का प्रावधान रखा गया है. उन्होंने कहा कि नजदीकी रिश्तेदार की परिभाषा को स्पष्ट किया जाना चाहिए क्योंकि इसमें भ्रम रहने से कई कठिनाइयां आएंगी.

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First published: November 19, 2019, 7:55 PM IST
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