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पर्यावरणविदों की सुप्रीम कोर्ट को सलाह- एयरप्यूरीफायर एकदम बेकार, उन्‍हें खरीदा की कोई जरूरत नहीं

भाषा
Updated: November 29, 2019, 11:39 PM IST
पर्यावरणविदों की सुप्रीम कोर्ट को सलाह- एयरप्यूरीफायर एकदम बेकार, उन्‍हें खरीदा की कोई जरूरत नहीं
सरकार को महंगे, अक्षम स्मॉग टावर खरीदने को नहीं कहा जाए: पर्यावरणविदों की शीर्ष न्यायालय को राय

देश के कई पर्यावरणविदों (Environmentalist) ने सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को सलाह दी है कि सरकार (Government) को महंगे, अक्षम स्मॉग टावर (Smog Towers) खरीदने को नहीं कहा जाए.

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  • Last Updated: November 29, 2019, 11:39 PM IST
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नई दिल्‍ली. पर्यावरणविदों के एक समूह ने 'स्मॉग टावरों' (Smog Towers) पर सरकारी धन खर्च किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को एक खुला पत्र लिखा है. उन्होंने शीर्ष न्यायालय से अनुरोध किया है कि महंगे और अप्रभावी 'स्मॉग टावरों' पर सार्वजनिक धन व्यय करने का केंद्र या राज्यों को निर्देश नहीं दिया जाए. क्योंकि इससे सिर्फ इसके विनिर्माताओं और विक्रेताओं को ही फायदा होगा.

इस हफ्ते की शुरूआत में शीर्ष न्यायालय ने केंद्र को प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में स्मॉग टावर लगाने पर 10 दिनों के अंदर कोई ठोस फैसला करने को कहा था. दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर तीन साल में सर्वाधिक स्तर पर पहुंचने के बाद यह निर्देश दिया गया.

भारतीय वैज्ञानिकों की आमराय- एयरप्यूरीफायर एकदम बेकार
गैर लाभकारी संस्था 'केयर फॉर एयर इंडिया' की सह संस्थापक ज्योति पांडे लवकारे ने पत्र में लिखा है, 'वायु प्रदूषण मामलों से जुड़े भारतीय वैज्ञानिकों एवं शोधार्थियों की आमराय है कि बाहर लगाए जाने वाले (आऊटडोर) एयरप्यूरीफायर एकदम बेकार हैं.'

इसमें कहा गया है, 'हम आपसे अनुरोध करते हैं कि कृपया किसी स्थानीय, राज्य या केंद्र सरकार को महंगे स्मॉग टावरों की खरीद के लिये सार्वजनिक धन खर्च करने का निर्देश नहीं दिया जाए. ये पीएम 2.5 (हवा में तैरते 2.5 माइक्रोमीटर से कम व्यास के कण) में कमी लाने में निष्प्रभावी हैं और यहां तक कि जब गंदे फिल्टरों का हमारे लैंडफिल स्थलों (जहां पूरे इलाके का कूड़ा करकट जमा किया जाता है) पर निस्तारण किया जाएगा, तब वे प्रदूषण बढ़ा सकते हैं.'

चीन ने लगाया था टावर
चीन ने पिछले साल अपने शहर शिआन में दुनिया का सबसे बड़ा वायु शुद्धिकरण टावर लगाया था. अर्बनइमिशंस डॉट इंफो के सह निदेशक एवं केयर फॉर एयर इंडिया के विशेषज्ञ डॉ सरत गुत्तीकुंडा ने कहा कि 100 फीसदी क्षमता के साथ शिआन का एक स्मॉग टावर दिल्ली की वायु का महज 0.00007 फीसदी शुद्धिकरण कर सकता है.
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पत्र में कहा गया है कि वाहनों की 'सम-विषम' योजना की तरह ही स्मॉग टावरों से सिर्फ लोगों का ध्यान इस समस्या की ओर आकृष्ट किया जा सकता है और राजनीतिक फायदा हासिल किया जा सकता है. स्मॉग टावरों के मामले में बदतर चीज यह है कि इससे सिर्फ इसके विनिर्माताओं एवं विक्रेताओं को फायदा होगा.

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First published: November 29, 2019, 11:37 PM IST
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