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एबीवीपी के अधिवेशन में बोले कठेरिया- इटावा के भीमराव अंबेडकर कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज को दिलाएंगे यूनिवर्सिटी का दर्जा

एबीवीपी के अधिवेशन में बोले कठेरिया- इटावा के भीमराव अंबेडकर कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज को दिलाएंगे यूनिवर्सिटी का दर्जा
एबीवीपी के अधिवेशन में बोले कठेरिया- इटावा के भीमराव अंबेडकर कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज को दिलाएंगे यूनिवर्सिटी का दर्जा

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साठवें प्रांतीय अधिवेशन में शामिल होने आए प्रो. कठेरिया ने कहा कि कॉलेज परिसर 147 एकड़ में फैला है. यहां छात्रों की संख्या कम है, इसलिए इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने की पूरी कोशिश की जाएगी.

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इटावा. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के इटावा (Etawah) स्थित बाबा साहब भीमराव अंबेडकर कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज (Baba Saheb Bhimrao Ambedkar Agricultural Engineering College) को यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने की पहल की जायेगी. यह बात पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री और इटावा के सांसद प्रो. रामशंकर कठेरिया ने कही है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के साठवें प्रांतीय अधिवेशन में शामिल होने आए कठेरिया ने कहा कि कॉलेज परिसर 147 एकड़ में फैला है. यहां छात्रों की संख्या कम है, इसलिए इसे यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने की पूरी कोशिश की जाएगी.

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अधिवेशन में पहुंचे रामशंकर कठेरिया ने कहा कि 147 एकड़ भूमि वाले विशाल कॉलेज में इंजीनियरिंग के 600 छात्र ही अध्ययनरत हैं. इसलिए इसके महत्व को कम नहीं आंका जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि ऐसे कॉलेज को निश्चित ही यूनिवर्सिटी का दर्जा मिलना चाहिए. इसके लिए वह खुद ही व्यक्तिगत तौर पर पहल करेंगे.

उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में कार्यकर्ताओं को सालिगराम की बटिया बनाने की कला है. उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में कई बड़े राजनेता इसी संगठन से बन कर उभरे हुए हैं. अपनी प्रगति का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय वो भी अखिल भारतीय विधार्थी परिषद के सदस्य रहे हैं. अजीतमल मे हुए एक सम्मेलन मे भाग भी वो ले चुके हैं. उन्होने कहा कि वो भी खुद कभी अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का ही हिस्सा हुआ करते थे, लेकिन उसके बाद आपके सामने इस मुकाम पर हैं. भारतीय जनता पार्टी नहीं थी तब से पहले का संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद है. उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की तुलना समाजवादी युवजन सभा और छात्र सभा से की जाती है, लेकिन ऐसा कदापि नहीं है. अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद देशप्रेम और राष्ट्र के लिए अपने आप को खपाती है. विद्यार्थी परिषद फीस माफ करने वाला संगठन नहीं है. विद्यार्थी परिषद किसी प्रधानाचार्य के खिलाफ प्रदर्शन करने वाला संघठन नहीं है.



किसान आंदोलन वामदलों का प्रायोजित
किसान आंदोलन की चर्चा करते हुए प्रोफेसर कठेरिया ने कहा कि तीन कृषि बिल पेश किए गए हैं लेकिन कोई भी विरोध करने वाला किसान इसकी खामी बताने के लिए सामने नहीं आता है. उनका कहना है कि किसान आंदोलन पूरी तरीके से प्रायोजित है. किसान आंदोलन वाम दलों समेत कई दलों की ओर से प्रायोजित है. हर कोई किसान आंदोलन को लेकर समझ गया है. देश का किसान जितना मजबूत होगा उतना देश ही मजबूत होगा.

कृषि बिल आने से पहले देश के न जाने कितने किसानों ने अपने गले में फंदा डालकर के मौत को गले लगाया है, लेकिन अब ऐसा नहीं है.  केंद्र सरकार ने किसानों के पक्ष में 3 कानून बनाकर के किसानों का आत्मनिर्भर बनाने का काम किया. किसान का बेटा ही है जो पाकिस्तान और चीन की सीमा पर देश की रक्षा कर रहा है. अगर किसान नहीं होंगे तो फिर देश का क्या होगा.

कांग्रेस का सूरज अस्त हो गया
उन्होंने कहा ऐसा कहा जाता है कि बिना खडग आजादी मिलने की बात भले ही कही जाती हो, लेकिन हकीकत इससे इतर है. चबंल घाटी के बंसरी गांव के 22 लोग शहीद हुए. इतिहास के पन्नों में कही भी उनके नाम नहीं हैं.  कश्मीर और पूर्वोत्तर हमेशा बड़े मुद्दे देश में रहे हैं. उन्होंने कहा कि काग्रेंस का सूरज अस्त हो चुका है और भारत मां का लाल सारे देश से राज कर रहा है.
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