एयर इंडिया प्लेन हादसा बेहद भयानक, फिर भी मौत के चंगुल से कैसे बचे सैकड़ों यात्री

कोझिकोड में प्लेन क्रैश के बाद बचाव कार्य में जुटे कार्यकर्ता (फोटो- PTI)

शुक्रवार रात उतरने के अपने दूसरे प्रयास में, पायलट (pilot) ने रनवे 10 (runway 10) को बहुत देर से छुआ- जब 1.6 मील की पट्टी में आधे मील से अधिक की दूरी ही बची थी- और हवा (air) भी उनके प्लेन (plane) को पीछे से धक्का दे रही थी.

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    नई दिल्ली. आसमान काला पड़ गया था. बारिश ने खिड़कियों को तोड़ दिया. केरल हादसे में बचे लोग ऐसी बातें बता रहे हैं. क्रैश से पहले एअर इंडिया एक्सप्रेस फ़्लाइट 1344 (Air India Express Flight 1344) जब बीच हवा में थी, जो कि कोझिकोड शहर के टेबलटॉप रनवे की ओर गरजते आसमान (thunderstorm) के बीच बढ़ रही थी, और अंत में पहुंचकर वह अचानक नीचे लुढ़क गई. बता दें इस एयरपोर्ट को खतरनाक माना जाता है. इसे उड़ाने वाले पायलट, जो एक प्रतिष्ठित सैन्य पायलट थे उन्होंने एक बार हवाई अड्डे की परिक्रमा की. फिर दूसरी बार ऐसा किया. दृश्यता इतनी खराब होने के कारण, उन्होंने रनवे (runway) को बदलने के लिए कंट्रोल टॉवर (control tower) को रेडियो किया.

    शुक्रवार रात उतरने के अपने दूसरे प्रयास में, उन्होंने रनवे 10 (runway 10) को बहुत देर से छुआ- जब 1.6 मील की पट्टी में आधे मील से अधिक की दूरी ही बची थी- और हवा (air) भी उनके प्लेन (plane) को पीछे से धक्का दे रही थी. जो एक ऐसा परिदृश्य था, जिसके बारे में भारतीय विमानन विशेषज्ञों (Indian aviation experts) पहले ही चेतावनी दे चुके थे.

    इस प्लेन हादसे में 18 लोगों की मौत और 150 से अधिक यात्री घायल
    2011 में भारत के नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों को सौंपी गई एक रिपोर्ट में कहा गया था, "बारिश में पीछे से आने वाली हवा की स्थिति में रनवे 10 पर उतरने वाली सभी उड़ानें जीवन को खतरे में डालने वाली हैं."

    विमान जो कि एक बोइंग 737 था; दुबई, संयुक्त अरब अमीरात से दक्षिण भारत की ओर लौट रहा था, जो बारिश से चलने वाले रनवे से नीचे फिसला और पहाड़ी के नीचे गिरकर और आधे-आधे दो भागों में टूट गया. भारतीय अधिकारियों का कहना है कि दोनों पायलटों सहित 18 लोग मारे गए और 150 से अधिक घायल हो गए.

    इन कारणों के चलते बचाये जा सके ज्यादातर यात्री
    शनिवार को ली गई मलबे की तस्वीरों को देखते हुए पता चलता है कि विमान का कवच फट गया और केबिन के विशाल टुकड़े कीचड़ में फैल गये. फिर भी यह उल्लेखनीय है कि जितने अधिक यात्रियों की मौत हो सकती थी, नहीं हुई.

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    विमान में 190 लोग सवार थे. कई ग्रामीणों सहित बचाव दल ने दुर्घटनाग्रस्त स्थल पर मिनटों में पहुंचकर लोगों को विमान से बाहर निकाला. विमान ने कभी पूरी तरह से आग नहीं पकड़ी. लगातार हो रही बारिश ने किसी चिंगारी को भड़कने नहीं दिया होगा. बचे हुए लोगों ने कहा कि उन्हें पहियों के जमीन पर टक्कर मारते ही पता चल गया था कि कुछ गलत हो गया है.

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