नंदीग्राम की हार के बाद भी क्‍या CM बनी रहेंगी ममता? जानें क्‍या कहता है संविधान

मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम से बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा है.  (फाइल फोटो)

मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी को नंदीग्राम से बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी से हार का सामना करना पड़ा है. (फाइल फोटो)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) में भले ही तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) ने बीजेपी (BJP) को पटखनी दी हो लेकिन सूबे की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को नंदीग्राम (Nandigram) से बीजेपी नेता शुवेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) से हार का सामना करना पड़ा है.

  • Share this:
नई दिल्‍ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव (West Bengal Assembly Elections) के नतीजों में तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) ने बड़ी जीत हासिल की है. विधानसभा चुनाव में भले ही तृणमूल कांग्रेस ने बीजेपी (BJP) को पटखनी दी हो लेकिन सूबे की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को नंदीग्राम (Nandigram) से हार का सामना करना पड़ा है. पश्चिम बंगाल की सबसे हॉट सीट मानी जा रही नंदीग्राम के बारे में जैसा अनुमान लगाया जा रहा था, परिणाम भी वैसा ही दिखाई दिया. शुरुआत में ये स्‍पष्‍ट ही नहीं हो सका कि नंदीग्राम से शुवेंदु अधिकारी की जीत हुई है या फिर ममता बनर्जी ने बाजी मारी है. बता दें कि न्‍यूज एजेंसी एएनआई ने पहले ममता बनर्जी ने जीत का दावा किया था, लेकिन रविवार शाम को ममता बनर्जी ने खुद प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में अपनी हार स्‍वीकार कर ली.

इन सबके बीच तृणमूल कांग्रेस के एक ट्वीट ने नंदीग्राम में जीत-हार को और भी ज्‍यादा भ्रामक बना दिया जब पार्टी की ओर से कहा गया कि अभी मतगणना जारी है. अगर ममता बनर्जी नंदीग्राम से हार चुकी हैं तो ये सवाल उठता है कि क्या ममता बनर्जी मुख्यमंत्री बनी रहेंगी? हालांकि चुनावी विश्‍लेषकों का कहना है कि वह निश्चित रूप से एक बार फिर पश्चिम बंगाल की बागडोर अपने हाथ में लेंगी. अगर बात करें तो भारत के तीन सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, योगी आदित्यनाथ और उद्धव ठाकरे, सभी अपने-अपने राज्यों की विधानसभा की जगह विधान परिषदों के सदस्य हैं. सीधे शब्दों में कहें तो वे मुख्यमंत्री बनने के लिए विधानसभा चुनाव नहीं जीते हैं. इनमें से बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ही एक ऐसे मुख्‍यमंत्री है, जिन्‍होंने 36 साल पहले विधानसभा चुनाव लड़ा था.



इसे भी पढ़ें :- ममता को शुभकामनाएं दे बोले पीएम मोदी, कोरोना में करेंगे पूरी मदद
बता दें कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कभी आम चुनाव नहीं लड़ा है. हालांकि ममता बनर्जी के साथ ऐसा नहीं है क्‍योंकि पश्चिम बंगाल में विधान परिषद नहीं है. वैसे तृणमूल कांग्रेस ने इस तरह के ढांचे को बनाने की बात कही है.

इसे भी पढ़ें :- ममता का करिश्मा, मां-माटी-मानुष का नारा, समझिए TMC की हैट्रिक और BJP की हार के कारण





अनुच्छेद 164 कहता है, 'एक मंत्री जो लगातार छह महीने तक किसी राज्‍य के विधानमंडल का सदस्य नहीं होता है, वह इस समयसीमा के खत्‍म होने के बाद मंत्री नहीं बन सकता. इसका मतलब है कि ममता बनर्जी के पास विधायक बनने के लिए 6 महीने का समय है. पश्चिम बंगाल में चूंकि विधान परिषद नहीं है ऐसे में ममता बनर्जी को 6 महीने के अंदर किसी खाली सीट से नामांकन दाखिल करना होगा और उपचुनाव जीतकर विधायक बनना होगा.

इसे भी पढ़ें :- दीदी हैं बंगाल की 'दादा' लेकिन नंदीग्राम की लड़ाई में शुवेंदु अधिकारी ने ममता को दी मात

इस बीच, रविवार को अपनी हार स्‍वीकार करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, 'मैं नंदीग्राम के फैसले को स्वीकार करती हूं. मैं (कोर्ट की) संवैधानिक पीठ के पास जाऊंगी.' उन्‍होंने कहा कि इस बार के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने एक शानदार जीत हासिल की है और बीजेपी चुनाव हार गई है. ममता ने कहा, 'बीजेपी ने गंदी राजनीति की, चुनाव आयोग को लक्ष्मण रेखा की जरूरत है.'
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज