खतरनाक हो रहा कोरोना! अस्‍पताल में भर्ती हर 5 में से 4 मरीजों में दिख रही मानसिक बीमारी के लक्षण

कोरोना मरीजों को लेकर एक और शोध आया सामने.
कोरोना मरीजों को लेकर एक और शोध आया सामने.

Coronavirus: शिकागो के नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन में न्यूरो-संक्रामक रोग के प्रमुख इगोर कोरलनिक के अनुसार इसमें हल्के मानसिक भ्रम से लेकर कोमा तक की स्थिति शामिल हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 7, 2020, 2:02 PM IST
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नई दिल्‍ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) को लेकर एक और शोध सामने आया है. इसमें दावा किया गया है कि कोरोना वायरस (Covid 19) से संक्रमित मरीजों में से अस्‍पताल में भर्ती हर 5 में से 4 मरीज के अंदर न्‍यूरोलॉजी से संबंधी लक्षण पाए गए हैं. इसका मतलब यह है कि कोरोना वायरस अब इंसानों के तंत्रिका तंत्र को भी नुकसान पहुंचा रहा है. इन लक्षणों में मांसपेशियों में दर्द, सिर दर्द, भ्रम, चक्‍कर आना स्‍वाद का ना रहना शामिल हैं.

इन लक्षणों में सबसे गंभीर स्थिति एन्सेफैलोपैथी थी. इस शोध में शामिल शोधकर्ता और शिकागो के नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन में न्यूरो-संक्रामक रोग के प्रमुख इगोर कोरलनिक के अनुसार इसमें हल्के मानसिक भ्रम से लेकर कोमा तक की स्थिति शामिल हैं. इस अध्ययन ने कोविड 19 महामारी की शुरुआत में शिकागो की स्वास्थ्य प्रणाली में अस्पताल में भर्ती 509 कोरोना मरीजों में न्यूरोलॉजिक लक्षणों की गंभीरता को दर्शाया है.





हाल ही में कोरोना पॉजिटिव पाए गए अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की स्थिति को लेकर कोरलनिक ने शोध की प्रासंगिकता पर चर्चा करने से इनकार कर दिया.उन्होंने कहा कि डॉक्टरों को आमतौर पर कोविड-19 रोगियों में न्यूरोलॉजिक संकट के किसी भी लक्षण की तलाश करनी चाहिए.
उन्‍होंने कहा कि यहां तक ​​कि जिन लोगों को सांस संबंधी हल्‍की समस्याएं या लक्षण हैं, जो लंबे समय तक नहीं रहती है, वे अभी भी लंबे समय से लक्षणों के खतरे में हैं. ये कुछ कोविड 19 मरीजों कोमहीनों तक प्रभावित कर सकते हैं. यह अध्ययन एनल्स ऑफ क्‍लीनिकल एंड ट्रांसलेशनल न्यूरोलॉजी में प्रकाशित किया गया है. कोरलनिक ने कहा कि कोविड 19 मरीजों की एक बड़ी आबादी पर किया गया पहला न्‍यूरोलॉजिकल शोध है. चीन में प्रकाशित एक अध्ययन में 36 फीसदी रोगियों में न्यूरोलॉजिकल लक्षण पाए गए, जबकि स्पेन में यह संख्‍या 57 फीसदी रही.

शोध में शामिल किए गए 509 मरीजों में से 42% को न्यूरोलॉजिकल समस्याएं थीं. इनमें अस्पताल में भर्ती होने के समय 63 फीसदी मरीजों और बीमारी के दौरान किसी भी समय 82 फीसदी मरीज शामिल थे.
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