हर डैम और तटबंध है डिजास्टर का सोर्स, विशेषज्ञ ने बताई विकराल होती जा रही बाढ़ की वजह

हर डैम और तटबंध है डिजास्टर का सोर्स, विशेषज्ञ ने बताई विकराल होती जा रही बाढ़ की वजह
असम, बिहार में बाढ़ से स्थिति भयावह, अब तक 36 लाख लोग प्रभावित

SANDRP के कोर्डिनेटर हिमांशु ठक्कर ने कहा तटबंध और डैम के कुप्रबंधन से बढ़ रही है बाढ़ की विनाशलीला, तय होनी चाहिए जवाबदेही वरना इसे कंट्रोल करना होगा मुश्किल

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नई दिल्ली. साउथ एशिया नेटवर्क ऑन डैम्स रीवर्स एंड पीपल (SANDRP) के कोर्डिनेटर हिमांशु ठक्कर ने कहा कि तटबंध (Embankment) और डैम (Dam) के मिस मैनेजमेंट से साल दर साल बाढ़ (Flood) की विनाशलीला बढ़ रही है. इसलिए तटबंध बनाने वालों और बांध से पानी छोड़े जाने पर होने वाले नुकसान को लेकर इसके ऑपरेटर की जवाबदेही तय होनी चाहिए. उनका कहना है कि पहली ही बारिश में डैम में पानी भर लिया जाता है और फिर जब तेज बारिश होती है तो उसे छोड़ दिया जाता है, जिससे बाढ़ आती है.

न्यूज18 हिंदी से बातचीत में ठक्कर ने कहा कि मैं 20 साल में 20 ऐसे उदाहरण दे सकता हूं जब बांधों के कुप्रबंधन से बाढ़ आई है. पिछले कुछ वर्षों के दौरान केरल, सूरत, बिहार और महाराष्ट्र में बाढ़ की वजह ऐसी ही रही है. उनका कहना है कि बांधों का सही प्रबंधन हो और तटबंध बनाने वालों की जवाबदेही तय कर दी जाए तो बाढ़ कम हो सकती है.

अधिकारियों की जगह चूहों पर डाल दी जाती है जिम्मेदारी 



इसी तरह हमारे सिस्टम की लापरवाही तटबंधों को अपने हालात पर छोड़ देती है. जब ये टूट जाते हैं तो अक्सर चूहों को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है. जिस दिन टूटने पर जवाबदेही तय हो जाएगी उस दिन इनका टूटना कम हो जाएगा. बिहार में आए दिन यही खबर आ रही है कि तटबंध टूट रहे हैं. दर्जनों तटबंध टूट चुके हैं. लाखों जिंदगियां संघर्ष कर रही हैं. सीएम नीतीश कुमार लाचार दिख रहे हैं. ऐसा क्यों होता है. क्या इसका कोई जवाबदेह नहीं है?
ठक्कर कहते हैं कि हर डैम और तटबंध एक डिजास्टर का सोर्स है. सेंट्रल वाटर कमीशन एक लॉबी की तरह काम करता है. उसकी कोशिश बाढ़ के मामले में हमेशा डैम ऑपरेटर को बचाने की रहती है. वो जिम्मेदार ठहराएगा तो अंगुली उसी की तरफ आएगी.

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डैम का कुप्रबंधन भी है बाढ़ के लिए जिम्मेदार


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क्या काम करता है तटबंध

दरअसल, तटबंध फ्लड प्‍लेन को नदी से काटता है. दूसरा पानी को फैलने से रोकता है. फ्लड को ट्रांसफर करता है. हर तटबंध टूटना तय है. ज्‍यादातर तटबंध की क्षमता 25 साल में आने वाली सबसे खराब बाढ़ को रोकने की होती है. लेकिन यदि उसके बाद बाढ़ आई तो तटबंध टूटेगा ही.

बांध की वजह से बढ़ा नुकसान

जब तटबंध बनने से पहले बाढ़ आती थी तब लोगों को दिखता था कि बाढ़ आ रही है. पता था कि कहां, कब, कितना पानी आने वाला है. लेकिन अब तटबंध बनने से लोग निश्‍चिंत होकर बैठे हैं कि बाढ़ नहीं आएगी. पर वह आती है. और जब आती है तो उसकी तबाह करने की क्षमता बहुत होती है. ज्यादा तेजी से पानी आता है. क्‍योंकि जहां से बांध टूटता है वहां से पूरी नदी का पानी निकलने लगता है. इससे नुकसान ज्‍यादा होता है.

अब अब बात करते हैं डिजास्टर मैंनेजमेंट की. एनडीआरएफ (NDRF) के जवानों का काम तब शुरू होता है जब डिजास्टर दस्तक दे देता है. उससे पहले इसका अनुमान लगाने और समस्या समाधान निकालने का जिसका काम है वो यह काम नहीं करता.

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तालाब खत्म होने, जंगल कटने से भी बढ़ा संकट

बाढ़ बढ़ने की एक और बड़ी वजह है कैचमेंट एरिया (जलग्रहण क्षेत्र) की कैपिसिटी का लगातार कम होना. ठक्कर कहते हैं कि बारिश सिर्फ नदी में तो होती नहीं कि हम उसका दोष दे पाएंगे. बल्कि पानी पूरे एरिया में बरसता है. पहले यह पानी तालाबों, जंगलों और वेटलैंड में भर जाता था.

लेकिन अब हम जंगल काटते जा रहे हैं. तालाब खत्म हो गए हैं, वेटलैंड खत्म हो रहे हैं. वाटर बॉडीज खत्‍म हो रही हैं. नदियों के फैलाव की जमीन अतिक्रमण हो रहा है. शहरीकरण की वजह से नदी-नालों पर कब्जे हो रहे हैं. जिससे पानी लो लैंड एरिया में एकत्र होकर तेजी से आगे बढ़ता है. पानी की रिचार्ज क्षमता खत्‍म हो रही है. नदी में बाढ़ नहीं आ रही बल्कि बस्तियां बाढ़ के मैदान में जा बसी हैं इसलिए भी बाढ़ और उससे नुकसान बढ़ रहा है.

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तटबंध टूटने की वजह से नुकसान ज्यादा बढ़ गया है


ऐसा हो बांधों का ऑपरेटिंग सिस्टम

-किस डैम के गाद की सफाई कब हुई थी. इसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए. जब डैम का गेट खोला गया उससे पहले रास्ते में आने वाली बस्ती को किस तरह से अलर्ट किया गया. इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए.

-कब और कैसे एक बांध को भरना व खाली करना चाहिए इसका एक स्टैंडर्ड होना चाहिए. अगर मानसून के अंत तक बांध में पानी भरा जाए तो अत्यधिक बारिश के दौरान उसमें से पानी छोड़ने का दबाव नहीं पड़ेगा. पानी नहीं छोड़ा जाएगा या कम छोड़ा जाएगा तो बाढ़ नहीं आएगी.




जब बाढ़ की वजह बने डैम

-2006 में ताप्ती नदी (Tapi River) पर बने उकाई डैम से पानी छोड़े जाने की वजह से सूरत में वहां की सबसे बड़ी बाढ़ आई थी.

-2016 में फरक्का और बाणसागर डैम की वजह से बिहार में बाढ़ आई. बिहार और यूपी में बाढ़ के पीछे ये दोनों बांध भी बताए गए हैं. बाणसागर मध्य प्रदेश के सोन नदी पर बना है, जबकि फरक्का बांध पश्चिम बंगाल में गंगा नदी पर बना हुआ है.

-2018 में केरल में जो बाढ़ आई थी उसमें भी डैम का कुप्रबंधन सामने आया था. केरल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि तमिलनाडु द्वारा मुल्लापेरियार बांध से अचानक पानी छोड़ा जाना भी बाढ़ की बड़ी वजहों में से एक है.

-2019 में कोयना डैम टूटने से महाराष्ट्र में और अपर कृष्णा (अलमट्टी डैम) की वजह से कर्नाटक में बाढ़ आई.
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