SC के आदेश के पहले भी सबरीमाला मंदिर में थी महिलाओं की एंट्री!

सबरीमाला मंदिर (फाइल फोटो पीटीआई)
सबरीमाला मंदिर (फाइल फोटो पीटीआई)

केरल हाईकोर्ट में 25 साल पुराने एक एफिडेविट (शपथ-पत्र) में मंदिर प्रबंधकों ने माना है कि सबरीमाला में आने वाली युवातियों और नवविहिताओं की संख्या बढ़ी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2018, 6:08 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने केरल के बहुचर्चित सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं की एंट्री की इजाजत दे दी है. शीर्ष अदालत के फैसले को लेकर अभी भी विवाद है. ऐसे में एक पुराना एफिडेविट अलग ही कहानी लेकर सामने आया है. इस एफिडेविट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पहले भी सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति थी.

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25 साल पहले केरल हाईकोर्ट में दायर किए गए इस एफिडेविट में कहा गया है कि मंदिर में युवतियां और नवविवाहित स्त्रियां बड़ी संख्या में आती हैं. ये एफिडेविट त्रवंकोर देवास्वाम बोर्ड और अयप्पा सेवा संघम की ओर से दायर किया गया था.



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एस. महेंद्रम की याचिका में गवाह के तौर पर अयप्पा सेवा संघम के उस समय सेक्रेटरी केपीएस नैयर ने कहा है कि सबरीमाला में 10 से 50 साल की आयु वर्ग की महिलाओं की संख्या बढ़ी है. इनमें वे महिलाएं भी हैं, जो विभिन्न प्रांतों से सन्निधानम में आती हैं. पुलिस ने महिलाओं के प्रवेश के बारे में संघम की गुजारिश पर बहुत ध्यान नहीं दिया है.

गवाही में कहा गया है- “सर्किल इंस्पेक्टर ने स्वयंसेवियों को रोक दिया और महिलाएं सीढ़ियां चढ़ती गईं और मंदिर में भी पहुंच गईं. बड़ी संख्या में दूसरे प्रांतों से आने वाली युवतियां मंदिर में चली जाती हैं. इस तरह के पर्यटकों में नवविवाहित जोड़े भी देखे जाते हैं.”

गवाही में ये बात भी कही गई है कि इस तरह से स्थान की पवित्रता की अनदेखी की गई है. एफिडेविट में ये भी कहा गया है कि संघम ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिससे महिलाओं का प्रवेश रोका जा सके.

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बता दें कि 10 से 50 साल की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश 28 सितंबर को आया. पहले तो देवास्वम बोर्ड और कुछ हिंदू संगठनों ने कोर्ट के आदेश का सम्मान किया, लेकिन बाद में जब कुछ संगठनों से इसका विरोध किया, तो उन्होंने भी अपना रुख बदल लिया.
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