Delhi Violence: रिटायर्ड जज बोले- 'दिल्ली हिंसा ने मुझे 1992 के मुंबई दंगों की याद दिला दी'

दिल्ली दंगों के दौरान जली कार की फाइल फोटो (News18.com)
दिल्ली दंगों के दौरान जली कार की फाइल फोटो (News18.com)

Delhi Riots 2020: जस्टिस (रिटायर्ड) श्रीकृष्ण ने रिपोर्ट के प्रस्तावना में लिखा, 'दिसंबर 1992-जनवरी 1993 के दौरान मुम्बई में हुए दंगों की जांच के लिए बनी इंक्वायरी कमीशन की पूछताछ के दौरान दंगों में पीड़ितों के प्रति उदासीनता और दिल दहलाने वाले अनुभवों से गुजरा.'

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  • Last Updated: October 6, 2020, 10:38 AM IST
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नई दिल्ली. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित उत्तर पूर्वी दिल्ली (North East Delhi Riot)  में इस साल फरवरी में हुए दंगों पर सजग नागरिकों, वकीलों और छात्रों की अगुवाई में एक रिपोर्ट जारी की गई है. इस रिपोर्ट पर सेवानिवृत्त जज बीएन श्रीकृष्ण ने कहा है कि इन घटनाओं ने उन्हें दिसंबर 1992 से जनवरी 1993 के बीच हुई मुंबई दंगो की याद दिली दी.

द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिटायर्ड जज ने  227 पन्नों की रिपोर्ट के प्रस्तावना में यह बात कही. रिपोर्ट के प्रस्तावना में जस्टिस श्रीकृष्ण ने लिखा, 'दिसंबर 1992-जनवरी 1993 के दौरान मुम्बई में हुए दंगों और हिंसक घटनाओं की जांच के लिए बनी इंक्वायरी कमीशन की पूछताछ के दौरान दंगों में पीड़ितों के प्रति उदासीनता और दिल दहलाने वाले अनुभवों से गुजरा. जब मैंने यह रिपोर्ट (दिल्ली दंगे की) पढ़ी तो मुझे लगा कि मुझे इसका अनुभव पहले ही हो चुका है.' उन्होंने कहा कि यह समय था कि राज्य मशीनरी और संवैधानिक अधिकारी ऐसे दंगों के कारणों की जांच में अधिक गंभीरता दिखाएं.

मुबंई दंगों के इन्क्वायरी कमीशन की अगुवाई कर चुके हैं जस्टिस श्रीकृष्णा
बता दें जस्टिस श्रीकृष्ण ने जनवरी 1993 में गठित सांप्रदायिक दंगों के कारणों की जांच के लिए एक जांच आयोग की अध्यक्षता की थी. मुंबई दंगों में 900 लोग मारे गए थे. दिल्ली दंगों की इस रिपोर्ट की प्रस्तावना में सेवानिवृत्त न्यायाधीश ने लिखा है कि 'जब सरकार द्वारा जारी किए गए बयानों पर संदेह पैदा हो और वह अस्वीकार्य भी हों  तो यह जरूरी है कि लोगों द्वारा देखे गए तथ्यों का एक वैकल्पिक संस्करण भी प्रस्तुत और प्रचारित किया जाए. यह रिपोर्ट ऐसे सामूहिक प्रयास के फलस्वरूप जारी की गई है.'
रिपोर्ट में कहा गया है कि दंगों के भड़कने से पहले, 'हिंसा के लिए वातावरण तैयार किया गया' और दावा किया कि एक पुलिस की प्रतिक्रिया ने '26 फरवरी तक हिंसा को बेरोकटोक जारी रखने की अनुमति दी, जिसके परिणामस्वरूप जान माल की हानि हुई.'



रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि 'सबूतों की निष्पक्ष समीक्षा, जांच प्रक्रिया, जान माल के हानि का आकलन, मुआवजे की प्राप्ति और नागरिक शिकायतों पर बहुस्तरीय जवाबदेही टीम का गठन' किए जाएं.
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