नाबार्ड के पूर्व अध्‍यक्ष ने कहा, किसानों का कर्ज और ब्‍याज माफ करने का चलन है गलत

डॉ. प्रकाश बख्‍शी ने कहा, खेती में पारंपरिक तरीकों के इस्‍तेमाल के कारण जल संकट (Water Crisis) बढ़ रहा है. साथ ही कृषि भूमि (Agriculture Land) के लगातार टुकड़ों में बंटने (Fragmentation) के कारण देश का कृषि क्षेत्र (Agriculture Sector) संकट में आ रहा है. News18 को दिए साक्षात्‍कार में नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन ने कहा कि सरकार को संकट से निपटने के लिए कृषि शिक्षा पर जोर देना चाहिए.

News18Hindi
Updated: September 9, 2019, 1:35 PM IST
नाबार्ड के पूर्व अध्‍यक्ष ने कहा, किसानों का कर्ज और ब्‍याज माफ करने का चलन है गलत
नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन डॉ. प्रकाश बक्‍शी ने कहा कि कृषि भूमि का लगातार बंटवारा हो रहा है. सिंचाई के लिए पानी की उपलब्‍ध घट रही है. वहीं, कुल सिंचित क्षेत्र बढ़ता जा रहा है और खेतों का आकार घटता जा रहा है.
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Updated: September 9, 2019, 1:35 PM IST
नई दिल्‍ली. जल संकट (Water Crisis) की चर्चाओं के बीच देश का कृषि उद्योग (Agri-Industry) बदलाव की राह पर है. कृषि क्षेत्र का विकास ही देश की खाद्य नीति (Food Policy) और आर्थिक सुस्‍ती (Economic Slowdown) से उबरने की राह दिखाएगा. हालांकि, विशेषज्ञ ज्‍यादा खाद्यान्‍न के बजाय खाद्यान्‍न की ज्‍यादा किस्‍मों के उत्‍पादन की वकालत कर रहे हैं. वास्‍तव में कृषि क्षेत्र में खास और पारंपरिक तौर-तरीकों के इस्‍तेमाल को अब भी बढ़ावा दिया जा रहा है. उत्‍पादन बढ़ाने की होड़ में लागत बढ़ती गई. इससे भूजल की उपलब्‍धता पर भी बुरा असर पड़ा है. अगर कृषि क्षेत्र की बदहाली के लिए यही काफी नहीं है तो अब किसान कर्ज के जाल में बुरी तरह फंस चुके हैं. कृषि क्षेत्र से जुड़े ऐसे ही तमाम अहम मुद्दों पर News18 ने नेशनल बैंक फॉर एग्रीकल्‍चर एंड रूरल डेवलपमेंट (NABARD) के पूर्व चेरयमैन डॉ. प्रकाश बक्‍शी (Dr. Prakash Bakshi) से बातचीत की.

हर किसान के पास कृषि भूमि का घटता आकार है बड़ा संकट
डॉ. बक्‍शी ने कहा कि कृषि भूमि का लगातार बंटवारा हो रहा है. सिंचाई के लिए पानी की उपलब्‍ध घट रही है. वहीं, कुल सिंचित क्षेत्र बढ़ता जा रहा है और खेतों का आकार घटता जा रहा है. आज कृषि क्षेत्र का सबसे बड़ा मुद्दा कृषि भूमि के बंटवारे और आकार घटने का ही है. इस समय देश में 14.5 करोड़ किसानों के पास कृषि योग्‍य भूमि है. वर्ष 2040 में यह आंकड़ा 20 करोड़ किसान हो जाएगा. इस समय देश की 15 करोड़ हेक्‍टेयर भूमि कृषि योग्‍य है. इसका सीधा मतलब है कि अगले 15 साल में हर किसान के पास मौजूद खेत का आकार औसतन एक हेक्‍टेयर रह जाएगा. ये बड़ा संकट है.

कृषि भूमि का आकार घटने पर आपूर्तिकर्ताओं की बढ़ती है समस्‍या

डॉ. प्रकाश ने कहा कि जैसे-जैसे खेतों का आकार कम होता जाएगा, वैसे-वैसे किसानों की खेती के लिए जरूरतें भी कम होती जाएंगी. ऐसे में खेती से जुड़ी चीजों की आपूर्ति करने वालों के सामने कम मात्रा में चीजों की जरूरतों के कारण बड़ी चुनौती खड़ी हो जाएगी. उदाहरण के लिए अगर एक किसान 100 हेक्‍टेयर जमीन में गेहूं की पैदावार करता है तो बीज की जरूरत एकसमान रहेगी. इसी जमीन में अगर 100 किसान भी गेहूं की खेती करते हैं तो भी बीज की जरूरत उतनी ही रहेगी. लेकिन, बीज विक्रेताओं के मुताबिक, किसी एक किसान को 100 हेक्‍टेयर के लिए बीज बेचना और 100 किसानों को बीज बेचने में बड़ा अंतर है.

जमीन के बंटवारे के साथ खेती की लागत बहुत ज्‍यादा बढ़ जाएगी
बीज विक्रेताओं के मुताबिक, 100 किसानों के मामले में बीज की कीमत और बिक्री रणनीति अलग-अलग होगी. यही नियम बिजली आपूर्ति पर भी लागू होता है. 100 हेक्‍टेयर के एक खेत के लिए एक कनेक्‍शन की जरूरत होगी, जबकि 100 किसान अलग कनेक्‍शन लेंगे. साफ है कि जमीन के बंटवारे के साथ खेती की लागत बहुत ज्‍यादा बढ़ जाएगी. अब बात जलसंकट के मुताबिक कृषि क्षेत्र में जरूरी बदलाव की. यहां किसानों को मुफ्त में चीजें उपलब्‍ध कराने की नीति पर फिर से विचार करने की जरूरत है.
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नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन ने News18 को दिए साक्षात्‍कार में कहा कि 100 फीसदी भूजल और जमीन के ऊपर उपलब्‍ध पानी के इस्‍तेमाल के बाद भी हमारे करीब 30 फीसदी खेत अभी भी असिंचित हैं.


पानी की बचत करने वाले कृषि उपकरणों पर जोर देने की जरूरत
नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन ने News18 को दिए साक्षात्‍कार में कहा कि 100 फीसदी भूजल और जमीन के ऊपर उपलब्‍ध पानी के इस्‍तेमाल के बाद भी हमारे करीब 30 फीसदी खेत अभी भी असिंचित हैं. हमारे पास बहुत ज्‍यादा पानी उपलब्‍ध नहीं है. ऐसे में हमें पानी की बचत करने वाले कृषि उपकरणों पर जोर देने की जरूरत है. हमें प्रति हेक्‍टेयर उत्‍पादन के साथ ही प्रति घनमीटर भूमि में इस्‍तेमाल किए गए पानी पर भी ध्‍यान देने की जरूरत है. इस दिशा में कुछ कदम उठाए गए हैं, लेकिन ये काफी नहीं हैं. पिछले आम बजट में गन्‍ने की खेती में ड्रिप प्रणाली से सिंचाई को अनिवार्य किया गया.

कृषि कर्ज और ब्‍याज माफी नीतिगत तौर पर है गलत चलन
डॉ. प्रकाश के मुताबिक, पिछली सरकारों की कृषि क्षेत्र में पारंपरिक तरीकों के इस्‍तेमाल की सोच के कारण भी जलसंकट के हालात बने. किसानों ने भी कम लापरवाही नहीं बरती है. अगर उन्‍हें मुफ्त बिजली मिल रही है तो उन्‍होंने हर समय चल रहे पंपों की ओर ध्‍यान ही नहीं दिया. उन्‍होंने बिना जरूरत के भी खेतों में पानी छोड़ा. अगर उन्‍हें बिजली का भुगतान करना पड़ता तो वे इस ओर ज्‍यादा ध्‍यान देते. वहीं, मैं किसानों की कर्ज माफी या ब्‍याज माफी के सख्‍त खिलाफ हूं. नीतिगत तौर पर यह गलत चलन है. जब कर्ज पर ब्‍याज खेती की कुल लागत का 10 फीसदी भी न हो तो कर्ज बड़ी तस्‍वीर का छोटा पहलू है.

कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तत्‍काल उठाए जाने चाहिए तीन कदम
डॉ. बक्‍शी के मुताबिक, सरकार को कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए तत्‍काल तीन कदम उठाने चाहिए. पहला कदम लैंड लीजिंग पॉलिसी को लेकर है. सरकार को तय करना चाहिए कि कृषि योग्‍य भूमि को लीज पर नहंी दिया जा सकता है. दूसरा, एग्रीकल्‍चर प्रोड्यूस मार्केटिंग कमेटी (APMC) में सुधार की जरूरत है. ज्‍यादातर राज्‍यों में कृषि उत्‍पादों को एपीएमसी स्‍वीकृत मंडियों में ही बेचा जा सकता है. अगर कोई किसान अपने उत्‍पाद को किसी व्‍यक्ति को सीधा बेचना चाहता है तो उसे इसकी छूट मिलनी चाहिए. किसी दूसरे को मंडी में इस पर कमीशन क्‍यों मिलना चाहिए. तीसरा, खाद्यान्‍न नीति से ध्‍यान हटाना चाहिए. हमने इसे खाद्यान्‍न संकट के समय अपनाया था. अब हमें गैर-खाद्यान्‍न फसलों पर ध्‍यान देना चाहिए. हम बागगानी, फल व सब्‍जी उत्‍पादन को नजरअंदाज कर रहे हैं. इससे किसानों की आय बढ़ेगी.

सरकार को सामान्‍य कृषि पाठ्यक्रम शुरू करने का दिया सुझाव 
नाबार्ड के पूर्व चेयरमैन ने कहा कि किसानों को बेहतर तरीके से खेती करने को लेकर शिक्षित करने की जरूरत भी है. हमें उन्‍हें वर्टिकल एग्रीकल्‍चर के बारे में बताना होगा. हमें उन्‍हें सिखाना होगा कि कैसे पानी का बेहतर इस्‍तेमाल किया जा सकता है. इसके लिए सरकार को सामान्‍य कृषि पाठ्यक्रम शुरू करने होंगे. हमें किसानों को बताना होगा कि उत्‍पादकता बढ़ाने के साथ उत्‍पाद की गुणवत्‍ता को कैसे बढ़ाया जाए. हमें उन्‍हें बताना होगा कि बड़े आकार के खेतों में गुणवत्‍ता बरकरार रखना छोटे आकार के खेतों के मुकाबले आसान है.

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First published: September 9, 2019, 1:35 PM IST
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