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लाल बहादुर शास्त्री के पोते नए कृषि कानूनों के समर्थन में, बताया ऐतिहासिक पल

केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ संजय नाथ सिंह (News18)
केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के साथ संजय नाथ सिंह (News18)

Farmers Protest: किसानों और सरकार के बीच 7 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक ज्यादातर मुलाकातें बेनतीजा रहीं. हालांकि, इस दौरान सरकार ने किसानों की पराली जलाने और बिजली पर सब्सिडी की बात को मान लिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 7, 2021, 1:11 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री (Lal Bahadur Shastri) के पोते संजय नाथ सिंह (Lal Bahadur Shastri) नए कृषि कानूनों (New Farm Laws) के समर्थन में आए हैं. संजय नाथ सिंह के नेतृत्व वाली ‘ऑल इंडिया फार्मर्स एसोसिएशन’ (All India Farmers Association) ने बुधवार को तीन नए कृषि कानूनों को अपना समर्थन जताया है. खास बात है कि इन नए कानूनों के चलते 40 किसान संगठन एक महीने से ज्यादा समय से राष्ट्रीय राजधानी की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे हैं.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर (Narendra Singh Tomar) के माध्यम से संजय नाथ सिंह ने केंद्र सरकार को कुछ सुझाव दिए, जो प्रदर्शन कर रहे किसान संगठनों के साथ आठ जनवरी को होने वाली बातचीत में मददगार साबित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि एआईएफए ने कृषि अनुबंधों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र नियामक संस्था स्थापित करने, कृषि उत्पादों की खरीद और बिक्री में मूल्य की निगरानी के लिए मूल्य नियामक प्राधिकरण बनाने और अनुबंध समझौतों के प्रावधानों को लागू करने सहित अन्य सिफारिश की है.

संजय नाथ सिंह ने कहा, ‘इन सुझावों के साथ, श्रीमान तोमर हम अनुरोध करते हैं कि जल्दी समाधान निकालने के लिए आप किसान नेताओं के साथ बातचीत करें. हमें उम्मीद है कि आपको सफलता मिलेगी और आशा करते हैं कि नए कृषि कानून वापस नहीं लिए जाएंगे.’ नए कृषि कानूनों को भारतीय कृषि के लिए ऐतिहासिक क्षण बताते हुए संजय नाथ सिंह ने कहा कि चूंकि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और एपीएमसी मंडी प्रणाली पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अच्छा काम कर रही है, इसलिए यहां के किसानों को नए कानूनों को लेकर कुछ ‘शंका’ है और केंद्र ने उसके निवारण के लिए अपना सर्वोत्तम प्रयास किया है.



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उन्होंने कहा, ‘ऐसा प्रतीत होता है कि निहित स्वार्थ वाले लोग और राजनीतिक अवसरवादी तत्व उन्हें भ्रमित कर रहे हैं.’ संजय नाथ सिंह ने दावा किया कि नए कृषि कानून भारतीय कृषि के लिए आगे का रास्ता खोलेंगे.

किसानों और सरकार के बीच 7 दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक ज्यादातर मुलाकातें बेनतीजा रहीं. हालांकि, इस दौरान सरकार ने किसानों की पराली जलाने और बिजली पर सब्सिडी की बात को मान लिया था. यह मांगें सरकार ने 30 दिसंबर को हुई मुलाकात में मान ली थीं. हालांकि, कानून वापस लेने की मांग पर अड़े किसान लगातार आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दे रहे हैं.

गुरुवार को राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर किसानों ने ट्रैक्टर रैली का आयोजन किया. इस रैली में करीब 40 किसान संगठनों ने भाग लिया था. किसानों ने इस रैली को आगामी 26 दिसंबर को होने वाले गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान दिल्ली में ट्रैक्टर परेड की रिहर्सल बताया है. रैली को देखते हुए प्रशासन पहले ही अलर्ट हो गया था. नोएडा, दिल्ली और गुरुग्राम में यातायात के संबंध में एडवाइजरी जारी कर दी गई थी.
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