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EXCLUSIVE: दो लाख राष्ट्रीय धरोहरों को संरक्षित करेगी सरकार, 100 सालों के लिए हाईटेक स्टोरेज पर चल रहा विचार

EXCLUSIVE: दो लाख राष्ट्रीय धरोहरों को संरक्षित करेगी सरकार, 100 सालों के लिए हाईटेक स्टोरेज पर चल रहा विचार

मौजूदा राष्ट्रीय संग्रहालय की इमारतें 1960 में निर्मित हुई थी और इन सालों में वस्तुओं को एकत्र किया जाना तेजी से बढ़ा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

मौजूदा राष्ट्रीय संग्रहालय की इमारतें 1960 में निर्मित हुई थी और इन सालों में वस्तुओं को एकत्र किया जाना तेजी से बढ़ा है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Shutterstock)

New Museum Storage Facility: न्यूज18 को प्लान से जुड़े कुछ खास दस्तावेज मिले हैं, जिसके तहत सरकार इस जगह को भविष्य में 5 लाख स्क्वायर फीट बढ़ाने की कल्पना कर रही है, ताकि अन्य संग्रहालयों, संस्थानों और भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण की जरूरतें पूरी हो सकें.

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नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) सरकार राष्ट्रीय संग्रहालय में मौजूद प्राचीन काल की 1.95 लाख धरहरों के लिए विश्व स्तर की एक केंद्रीकृत भंडारण सुविधा तैयार करने पर विचार कर रही है. इस गैलरी की जगह बदलकर सेंट्रल विस्टा प्लान में शामिल नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में स्थापित किया जाएगा. न्यूज18 को प्लान से जुड़े कुछ खास दस्तावेज मिले हैं, जिसके तहत सरकार इस जगह को भविष्य में 5 लाख स्क्वायर फीट बढ़ाने की कल्पना कर रही है, ताकि अन्य संग्रहालयों, संस्थानों और भारत के पुरातत्व सर्वेक्षण की जरूरतें पूरी हो सकें.

राष्ट्रीय संग्रहालय की तरफ से 14 अक्टूबर को लाए गए एक्स्प्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) मे बताया गया है, ‘यह क्लपना की गई है कि यह स्टोरेज फेसिलिटी इस तरह से डिजाइन की जाएगी कि यह अगले 100 सालों की जरूरत को पूरा कर सके. यह स्टोरेज, जो शहर से दूर हो सकता है, सभी राष्ट्रीय खजानों के एक भंडार के रूप में भी काम करेगा. संग्राहालय से अलग एक केंद्रीकृत भंडारण बनाने की अवधारणा विश्व में जारी ट्रैंड है और जर्मनी, फ्रांस और नीदरलैंड्स जैसे विकसित देशों ने राष्ट्रीय भंडार पहले ही विकसित कर लिए हैं.’

सेंट्रल विस्टा प्लान के तहत नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में राष्ट्रीय म्यूजियम को स्थानांतरित करने को लेकर इससे पहले भी करीब 2.06 लाख पुरातन वस्तुओं का सवाल उठा था. फिलहाल, राष्ट्रीय संग्रालय में केवल 7 हजार वस्तुएं प्रदर्शनी में लगाई गई हैं. जबकि, बाकी 45 हजार वर्ग फुट में रखी गई हैं.

News18.com की तरफ से देखे गए EOI में राष्ट्रीय म्यूजियम को नॉर्थ और साउथ ब्लॉक में भेजने का प्रस्ताव दिया गया है, जहां ‘नए संग्रालय में भारत के कई संग्राहलय शामिल होंगे और भारत के बनने की प्रक्रिया दिखाई जाएगी.’

राष्ट्रीय संग्रहालय के करीब 8 से 10 हजार धरोहरें ‘भारत के नए राष्ट्रीय संग्रहालय’ में प्रदर्शित की जाएंगी, जबकि, 1.95 धरोहरों को संरक्षित करने की जगह मिलेगी.

अब इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स और नेशनल आर्काइव्स एनेक्स की कलाकृतियों को लेकर भी चिंता जाहिर की जा रही है. मई में 70 बुद्धिजीवियों के समूह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था, जिसमें यह सवाल किया गया था कि नेशनल म्यूजियम ऑफ आर्ट की चीजों को रखा जाएगा और प्रदर्शित किया जाएगा.

क्या है योजना
नेशनल म्यूजियम एक एजेंसी की मदद तलाश रहा है, जो पुरातन वस्तुओं के वर्ग, प्रवृति और मात्रा का अध्ययन करेगी और स्टेट ऑफ आर्ट तकनीक की मदद से उचित स्टोरेज फेसिलिटी की अवधारणा तैयार करेगी. इस स्टोरेज में आंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया जाएगा. स्टोरेज फेसिलिटी बेशकीमती चीजों को सुरक्षित तरीके से रखे जाने, अनुकूलित जलवायु के हालात, हर समय निगरानी करने वाली सुरक्षा व्यवस्था, चीजों की RFID टैगिंग, समय-समय पर चीजों की जांच के लिए कंजर्वेशन लैब को सुनिश्चित करेगी.

EoI में कहा गया है कि मौजूदा राष्ट्रीय संग्रहालय की इमारतें 1960 में निर्मित हुई थी और इन सालों में वस्तुओं को एकत्र किया जाना तेजी से बढ़ा है, जिसके चलते जगह और स्टोरेज की कमी दर्ज की गई है. EoI के अनुसार, ‘मौजूदा स्टोरेज स्पेस पूरी तरह से डिजाज्टर प्रूफ नहीं है. फिलहाल, स्टोरेज की जगह करीब 45 हजार वर्ग फीट है, जिसमें पत्थर की मूर्तियां रखने के लिए खुली जगह शामिल है. राष्ट्रीय संग्रहालय में प्रदर्शनी की जगह 1.5 लाख वर्ग फीट है.’

इसलिए, राष्ट्रीय संग्रहालय की उन वस्तुओं की स्टोरेज की जरूरतों को पूरा करने के लिए, जो प्रदर्शनी में नहीं है, एक अलग और किसी भी संग्रहालय से हटकर एक रिजर्व स्टोर का प्रस्ताव दिया गया है.

राष्ट्रीय संग्रहालय में वस्तुओं का कलेक्शन पूर्व-ऐतिहासिक युग (10,000 ईसा पूर्व), सिंधु घाटी सभ्यता (5,000-1,800 ईसा पूर्व) से लेकर 1900 सदी से संबंधित है. इसमें मध्य एशियाई प्राचीन वस्तुएं, पेंटिंग, पांडुलिपियां, हथियार, पत्थर और टेराकोटा के पुरानी वस्तुएं, जैविक और लकड़ी के सामान मौजूद हैं.

चुनी हुई एजेंसी पहले संस्कृति मंत्रालय की तरफ से नियुक्त की हुई एक्सपर्ट्स कमेटी के आकलन और मंजूरी के लिए दस्तावेज तैयार करेगी. इसके बाद एक विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जाएगा और एजेंसी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर भी काम कर सकती है.

Tags: Central Vista project, Museum Storage

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