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Exclusive: भारतीय सेना ने बताया, गलवान घाटी झड़प में मारे गए थे कितने चीनी सैनिक

गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच खूनी झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. (पीटीआई फाइल फोटो)
गलवान घाटी में भारत-चीन के बीच खूनी झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. (पीटीआई फाइल फोटो)

Lieutenant General YK Joshi on India-China standoff in Ladakh: नॉर्दन कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी ने कहा कि 10 फरवरी से दोनों देशों की फौज वापसी की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने बताया कि चार स्टेप में दोनों देशों की सेनाएं पीछे हटेंगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 17, 2021, 9:53 PM IST
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नई दिल्ली. पूर्वी लद्दाख (Northern Ladakh) में मई 2020 से भारत और चीन (India-China) के बीच जारी विवाद पर नॉर्दन कमांड के चीफ लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी ने कहा कि गलवान घाटी की झड़प के बाद 50 चीनी सैनिकों को वाहनों के जरिए ले जाया गया था. जोशी ने कहा कि इस गलवान की झड़प में चीनी सेना के काफी लोग मारे गए थे. जोशी ने कहा कि चीनी सैनिक 50 से ज्यादा जवानों को वाहनों में ले जा रहे थे लेकिन वे घायल थे या मरे इसके बारे में कहना मुश्किल है. जोशी ने कहा कि रूसी एजेंसी TASS ने 45 चीनी जवानों के मारे जाने की बात कही है और हमारा अनुमान भी इसी के आसपास है.

बता दें जून 2020 में पूर्वी लद्दाख में गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हुई खूनी झड़प में करीब 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे. इस घटना में चीन के भी कई सैनिक मारे गए थे लेकिन चीन ने इसे लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया था. जोशी ने डिसइंगेजमेंट के बारे में कहा कि भारत और चीन के बीच डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया शुरू हो गई है जो कि चार चरणों में पूरी हो जाएगी. जोशी ने बताया कि 10 फरवरी को पैंगोंग त्सो में डिसइंगजमेंट की प्रक्रिया चल रही है, दोनों सेनाएं इसे चार स्टेप में पूरा करेंगी. उन्होंने बताया कि अब तक दोनों पक्ष बख्तर बंद गाड़ियां, टैंक डिसइंगेज कर चुके हैं. उन्होंने कहा तीसरे चौथे चरण में कैलाश रेंज रेजांग में पैदल सेना के जवान हटेंगे.

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29-30 अगस्त को भारत-चीन के बीच क्या हुआ था?
जोशी ने अगस्त में हुए विवाद को लेकर कहा कि, 'हमारे जवानों ने 29-30 अगस्त को रेजान ला की ऊंचाई वाले इलाकों में कब्जा कर लिया. हमारे टैंक पूरे इलाके में कब्जा कर चुके थे. हमारे टैंक ऊपर थे और चीन की तरफ से भी टैंक आ रहा था. टैंक के टेलीस्कोप में हमारे जवान देख रहे थे कि चीनी टैंक आ रहे हैं. ऐसी स्थिति में जवानों को सीधे फायरिंग की इजाजत होती है लेकिन हमने धैर्य रखा और संयम के साथ इलाके पर कब्जा बनाए रखा. हां, टेंशन जरूर थी लेकिन हमने युद्ध जैसी स्थिति पैदा नहीं होने दी.'

लेफ्टिनेंट जनरल जोशी ने कहा कि चीन की पीछे हटने पर थोड़ा अचंभा तो होता है क्योंकि इतनी जल्दी इसकी उम्मीद नहीं थी. उन्होंने कहा, 'उम्मीद तो नहीं थी लेकिन भारतीय फौज ने 29-30 अगस्त की रात को LAC पर जो किया था वह टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. उसके बात चीन लेवल पर आकर माना और फिर डिसइंगेजमेंट की प्रक्रिया के लिए माना.'
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