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Exclusive Interview: 'अगर मुस्लिम पक्ष चाहता तो...' अयोध्या मालिकाना हक मामले पर योगी आदित्यनाथ का दावा

News18Hindi
Updated: September 19, 2019, 11:55 PM IST
Exclusive Interview: 'अगर मुस्लिम पक्ष चाहता तो...' अयोध्या मालिकाना हक मामले पर योगी आदित्यनाथ का दावा
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पांच जजों की पीठ ने मामले की सुनवाई की समय सीमा तय कर दी है. इसके तुरंत बाद योगी आदित्‍यनाथ (Yogi Adityanath) ने यह बात कही.

राम जन्‍म भूमि बाबरी मस्जिद विवाद (Ram Janmabhoomi Babri Masjid Issue) पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की पांच जजों की पीठ ने मामले की सुनवाई की समय सीमा तय कर दी है. इसके तुरंत बाद योगी आदित्‍यनाथ (Yogi Adityanath) ने यह बात Network18 के एडिटर इन चीफ राहुल जोशी (Rahul Joshi) को दिए एक्‍सक्‍लूसिव इंटरव्‍यू में कही.

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  • Last Updated: September 19, 2019, 11:55 PM IST
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गोरखपुर. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने भी माना है कि राम मंदिर विवाद में ये बेहतर होता कि दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) जाने के बजाय आपसी बातचीत से मसले को सुलझा लेते. उन्होंने यह बात सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी कर लेने के तथ्य के बाद कही.

Network18 के एडिटर इन चीफ राहुल जोशी (Rahul Joshi) को दिए एक्‍सक्‍लूसिव इंटरव्‍यू में आदित्यनाथ ने कहा, 'बेहतर होता कि मुस्लिम समुदाय उसी समय मध्यस्थता के जरिए इस मामले को निपटा लेता जब सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्था का मौका दिया था, लेकिन यह नहीं हुआ. कोई व्यक्ति तभी किसी नतीजे तक पहुंच सकता है जब वह सकारात्मक ढंग से सोचता है. लेकिन जब लोग अड़ जाते हैं तो सुप्रीम कोर्ट ही फैसला कर सकता है.'

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करती है. फैसला तथ्य और सबूतों के आधार पर लिया जा रहा है. 'हमें पूरी उम्मीद है और हम जजमेंट को मानेंगे. इससे पहले भी हमने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया है.'

इलाहाबाद हाईकोर्ट में था मामला

इससे पहले मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या (Ayodhya) का भूमि विवाद मामला मध्यस्थता के लिए भेजा था. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) के 2010 के फैसले के खिलाफ कुल 14 अपीलें सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं.

सीएम योगी ने बताया कि वे भी अयोध्या मामले को बातचीत से सुलझाने के पक्ष में थे.


हाईकोर्ट ने 2.77 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर दायर दीवानी मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और रामलला विराजमान को बराबर-बराबर जमीन देने की बात कही थी. सुप्रीम कोर्ट ने मध्यस्था के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जो पैनल बनाया था उसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस एफएम खलीफुल्लाह कर रहे थे. इसमें श्री श्री रविशंकर और श्री राम पंचू भी शामिल थे.
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इस पैनल को 15 मार्च से 15 मई के बीच 8 हफ्ते में मध्यस्थता का काम पूरा करना था. इस कार्रवाई को कवर करने से मीडिया को रोक दिया गया था ताकि मामले की गोपनीयता बरकरार रहे.

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First published: September 19, 2019, 4:00 PM IST
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