प्रदेश18 विशेष: 17 साल की उम्र में इन जुड़वां भाइयों ने किया ऐसा काम, सब कर रहे हैं सलाम

दिल्ली के रहने वाले 17 साल के युवराज और यशराज आम बच्चों से कुछ अलग सोचते हैं...इनकी आंखों में कुछ सपने हैं....ये हिन्दुस्तान की तस्वीर बदलने का जज्बा रखते हैं.

Pooja Batra | Pradesh18
Updated: October 5, 2016, 11:56 PM IST
Pooja Batra | Pradesh18
Updated: October 5, 2016, 11:56 PM IST
दिल्ली के रहने वाले 17 साल के युवराज और यशराज आम बच्चों से कुछ अलग सोचते हैं...इनकी आंखों में कुछ सपने हैं....ये हिन्दुस्तान की तस्वीर बदलने का जज्बा रखते हैं. 12th में पढ़ने वाले इन बच्चों ने अपनी प्रतिभा से पूरी दुनिया में हलचल मचा दी है. प्रदेश18 से खास बातचीत में इन भाइयों ने बताया कि छठी क्लास से इन्होंने रिसर्च करनी शुरु की, जो अब तक जारी है और आगे भी जारी रहेगी.

किस तरह हुई रिसर्च की शुरुआत

युवराज ने एक किस्सा सुनाते हुए बताया कि एक बार वे सातवीं क्लास में थे तो वे साइंस के किसी इवेंट में गए थे और ब्रेक के दौरान अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे. उस ब्रेक में चीफ गेस्ट अपना लेक्चर देते हैं उस दौरान चीफ गेस्ट नोबेल पुरस्कारों के बारे में चर्चा कर रहे थे तो वहीं से हमें ख्याल आया कि हमें भी भारत को सम्मान दिलाने के लिए कुछ करना चाहिए. हालांकि ये अलग बात है कि वो इवेंट में हम बुरी तरह हार गए थे, लेकिन तभी हमने ठान लिया कि साइंस में ही कुछ ना कुछ ऐसा जरूर करेंगे जिसपर हमारे देश के लोगों को गर्व होगा. वो हार एक नए जीत की दिशा की बढ़ने का एक संकेत था हमारे लिए.

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यशराज ने बताया कि शुरुआत में हम बहुत ज्यादा डिस्कवरी और नेशनल जियोग्राफिक्स चैनल देखते थे और उस दौरान हमारे ही मन में जो भी सवाल आते थे हम साइंटिस्ट से मेल के जरिए उनसे बात करते थे. तब हमें लगा कि हम सही दिशा में जा रहे हैं और हमें इसी में काम करना चाहिए.

क्या होता है पेटेंट, कैसे करवाया जाता है

उसके बाद हमनें एक प्रोजेक्ट पर काम किया कि कद्दू के बीजों से पानी को कैसे साफ किया जा सकता है. लोगों को हमारा ये प्रोजेक्ट काफी पसंद भी आया था. लेकिन उसमें एक प्राब्लम ये आई कि हमने उसके राइट्स इस्तेमाल कर लिए थे. जिसकी वजह से वो लीक हो गया था, मेरे पास कोई प्रूफ नहीं था कि ये प्रोजेक्ट मेरा है, तब हमें पता चला कि पेटेंट नाम की भी कोई चीज होती है. फिर हमने उसके बारे में जानकारी हासिल की और अपने प्रोजक्ट्स को पेटेंट करवाया. हमारे जैसे कई और भी ऐसे स्टूडेंट हो सकते हैं जिनके पास अच्छे आइडिया हों लेकिन जानकारी के अभाव उन्हें भी इस तरह की परेशानियों से होकर गुजरना पड़े. आपको बता दें पेटेंट करवाने का तरीका बेहद ही आसान है इसकी प्रकिया आप वीडियो में देख सकते हैं.

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[quote]17 साल की उम्र में वे 22 रिसर्च पेपर पर काम कर चुके हैं. अपनी 7 रिसर्च का वे पेटेंट करवा चुके हैं. इसके अलावा वे Zenith Vipers के को-फाउंडर्स भी हैं. अपनी मेहनत और लगन के कारण वे Tedex जैसे प्लेटफॉर्म पर बुलाए जा चुके हैं. अब जल्द ही ब्रिटेन की एक संस्था इन्हें विज्ञान में अद्भुत खोज के लिए सम्मानित करेगी.[/quote]

ऐसे मिलकर करते हैं दोनों भाई किसी प्रोजेक्ट पर काम

हम दोनों भाई मिलकर काम करते हैं लेकिन अगर किसी प्रोजेक्ट पर हम दोनों की सहमति नहीं होती तो हम उस विषय पर उसका शोकेस बनाते हैं. फिर आपस में उसपर बहस करते हैं. अगर इसके बावजूद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाता तो हम उस विषय पर लोगों की राय भी लेते हैं.

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बातचीत में दोनों भाइयों ने बताया कि बस हमारा एक ही सपना है कि हमें भारत के लिए कुछ रखना है. हमारे मां-बाप भी यही चाहते हैं कि हम ऐसा कुछ करें जो देश के लोगों के काम आए.

युवराज ने बताया कि वैसे तो हमें खाली वक्त ही नहीं मिलता लेकिन अगर कभी ऐसा होता है तो हम सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर लोगों से बात करते हैं. उनकी मदद भी करते हैं. बहुत अच्छा लगता है जब हम किसी इवेंट में जाते हैं और जीतकर वापस लौटते हैं.

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इन भाइयों ने बताया कि सबसे पहले सवाल आता है कि अगर आप रिसर्च करना चाहते हैं तो किस विषय पर करें तो उसका जवाब यह है खुद से सवाल करें. अपनी हर आसपास की चीज से सवाल करो....ऐसा क्यों हो रहा है...कैसे हो रहा है...और ये सवाल लगातार करते रहे फिर आप एक ऐसे प्वाइंट पर आ जाओगे जिसका जवाब किसी को नहीं पता होगा और यहीं से होगी आपकी खोज की शुरुआत.

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अपने एक रिसर्च बीसीआई के बारे में जिक्र करते हुए युवराज ने बताया कि इसे यूज करके आप अपने ब्रेन को कंट्रोल कर सकते हो. उदाहरण के तौर पर अगर आप सोच रहे हो कि लाइट ऑफ हो जाए तो लाइट ऑफ हो जाएगी.

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जानिए इनकी दमदार रिसर्च के बारे में

All In One Medical Assistance Machine- यशराज और युवराज ने बताया कि ये हमारा ड्रीम प्रोजेक्ट है. यह एक ऐसा पोर्टेबल डिवाइस है, जिसकी मदद से आम इंसान की सभी शारीरिक जांच एक साथ की जा सकती हैं. ग्रामीण क्षेत्र में रह रहे नागरिकों को काफ़ी लाभ मिलेगा. इस रिसर्च के पीछे की वजह हमारे दादाजी थे उनकी मृत्यु हार्ट अटैक से हुई थी. इसलिए हमने सोचा कि हम इस प्रोजेक्ट पर काम करेंगे.

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Bajra Purifier - जहरीला पानी आज भी हमारे देश में समस्या का विषय बना हुआ है. इस पर भी यशराज और युवराज ने काम किया है. उन्होंने खोज निकाला है कि बाजरे की मदद से पानी को कैसे शुद्ध किया जा सकता है. इसकी मदद से रासायनिक और ज़हरीले तत्वों को भी पानी से दूर किया जा सकता है. यह खोज वास्तव में अद्भुत है.

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सही मायने में ये होते हैं रिसर्च के मायने

युवराज ने बताया कि जरूरी नहीं है कि आप जो भी रिसर्च कर रहे हैं उसमें आपको हमेशा ही अच्छे परिणाम मिले. कई बार आप गलत भी साबित हो सकते हो, लेकिन वो कोई बड़ी बात नहीं है. उससे कभी भी घबराना नहीं चाहिए. और ये भी हो सकता है कि आपकी रिसर्च का कुछ लोग मजाक भी उड़ाएं लेकिन आप बिल्कुल भी इसकी ओर ध्यान ना दें. सही मायने में तो रिसर्च वही होती है जिसपर पहले लोग हंसे फिर वे मजबूर हो जाएं आपकी बात को समझने में. रिसर्च के सही अर्थ में मायने यही होते हैं कि आप अपने आसपास की चीजों को सही तरीके से समझे, बस आपके मन में एक सवाल आए और आप उसके पीछे भागते रहें और उसका जवाब पता लगा कर रहें. यही रिसर्च है.

[caption id="attachment_1494802" align="alignnone" width="630"]Photo- from Video Photo- from Video[/caption]

हमारा देश हमारे लिए सर्वोतम

जब हमने इस बारे में युवराज और यशराज की प्रिंसिपल से बात की तो उन्होंने बताया कि ये गर्व की बात है कि ये बच्चे उनके स्कूल से हैं. ये बच्चे तो जो कर रहे हैं वो कर ही रहे हैं लेकिन ये खुशी की बात है कि बाकि बच्चे भी इनसे आगे बढ़ने की प्रेरणा ले रहे हैं. मेरी इनकी सफलता के लिए शुभकामनाएं और आशीवार्द है. हां, एक बात मैं जरूर कहना चाहूंगी कि ये लोग विदेश जाकर पढ़ाई करें...रिसर्च करें लेकिन हमारा देश हमारे लिए सर्वोतम है उसके लिए सबसे पहले काम करें.

 
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